दुबई/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि वहां तैनात 22,500 से अधिक अमेरिकी मरीन सैनिक एक तरह से ईरान के ‘जाल’ में फंस गए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरानी सेना की सख्त घेराबंदी और बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण मरीन बलों की वापसी और रसद आपूर्ति का रास्ता पूरी तरह ठप हो गया है।
हॉर्मुज में ‘लॉक’ हुए अमेरिकी सैनिक: क्या है स्थिति?
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि वहां से अमेरिकी जहाजों का निकलना लगभग असंभव हो गया है।
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सुरक्षा का संकट: पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में सैनिकों की सुरक्षा ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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रसद और रवानगी ठप: ईरान द्वारा समुद्री आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण लगाने से अमेरिकी मरीन न तो बाहर निकल पा रहे हैं और न ही उन तक जरूरी रसद (Supplies) पहुंच पा रही है।
क्या युद्धविराम खत्म हो गया है?
तनाव के बीच एक बड़ी चर्चा यह थी कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो चुका है? इस पर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्थिति स्पष्ट की है:
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युद्धविराम बरकरार: हेगसेथ ने कहा कि हॉर्मुज में छिटपुट गोलीबारी के बावजूद तकनीकी रूप से ‘युद्धविराम’ अभी भी खत्म नहीं हुआ है।
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ईरानी हमले: उन्होंने खुलासा किया कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर 10 से अधिक हमले किए हैं, लेकिन अमेरिका फिलहाल इन्हें ‘पूर्ण युद्ध’ (Full-scale war) की श्रेणी में नहीं रख रहा है।
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और अमेरिका की जवाबी तैयारी
ईरान की आक्रामकता का जवाब देने के लिए अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक मिशन शुरू किया है।
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उद्देश्य: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग को बहाल करना।
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सुरक्षा घेरा: जनरल डैन केन के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हॉर्मुज के दक्षिणी हिस्से में सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) का विस्तार कर दिया है।
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संयुक्त शक्ति: इस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब थलसेना, नौसेना और वायुसेना संयुक्त रूप से संभाल रही हैं।
ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती
डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एक तरफ उनके हजारों सैनिक दुश्मन के इलाके के करीब फंसे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कही जाने वाली ‘तेल की सप्लाई’ पर संकट मंडरा रहा है।
ईरान की ‘स्मॉल बोट्स’ (छोटी नौकाओं का बेड़ा) अमेरिका के विशाल जहाजों के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ घंटों में कूटनीतिक रास्ता नहीं निकला, तो यह तनाव किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
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