
अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख करीब आ रही है, वाशिंगटन की सत्ता का माहौल बेहद तनावपूर्ण होता जा रहा है। हाल ही में सामने आए रॉयटर्स/इप्सोस, वाशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज के प्रमुख जनमत सर्वेक्षणों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग रसातल में गिरकर महज 31 से 33 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ पहुंची है। अमेरिकी जनता के बीच बढ़ता यह असंतोष न केवल व्हाइट हाउस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत को भी गंभीर खतरे में डाल चुका है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी के पास बढ़त हासिल करने का सबसे मजबूत मौका है, जहां वे कांग्रेस बैलेट पर 12 अंकों की बड़ी बढ़त बनाए हुए हैं।
पहला बड़ा मुद्दा: अनियंत्रित महंगाई और जीवन यापन की बेकाबू लागत
अमेरिकी मतदाताओं के बीच इस समय सबसे बड़ा और जलता हुआ मुद्दा देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई दर (Cost of Living) है। लगभग आठ में से दस पंजीकृत मतदाताओं का मानना है कि दैनिक जीवन की जरूरतें, खाद्य पदार्थ, ईंधन और मकान का किराया उनके बजट की सीमा पार कर चुका है। सर्वेक्षणों के अनुसार, करीब 68 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक प्रबंधन और महंगाई से निपटने के तरीकों से पूरी तरह असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए लागू की गई टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापार में आ रहे झटकों के कारण रोजमर्रा की चीजों की कीमतें उम्मीद से काफी अधिक बढ़ गई हैं। मध्यवर्ग और मजदूर वर्ग की जेब पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे खुद रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक भी अपनी सरकार से नाराज होकर विकल्प की तलाश कर रहे हैं।
दूसरा बड़ा मुद्दा: विदेश नीति की नाकामी और मध्य पूर्व युद्ध का खिंचाव
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि वे वैश्विक दौर के किसी भी युद्ध को महज कुछ हफ्तों में खत्म करवा देंगे। हालांकि, मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष और अंतर्राष्ट्रीय मोर्चों पर जारी अनिश्चितता थमने का नाम नहीं ले रही है। इस लंबे खिंचते विवाद ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों को भड़का दिया है, बल्कि अमेरिकी करदाताओं का भारी पैसा भी इस सैन्य अभियान में खर्च हो रहा है। युद्ध में बढ़ती अमेरिकी संलिप्तता और राष्ट्रपति के वादों में विरोधाभास के चलते विदेश नीति के मोर्चे पर ट्रंप की विश्वसनीयता को करारा झटका लगा है।
तीसरा बड़ा मुद्दा: श्रम बाजार की सुस्ती और नीतिगत ढांचागत बदलाव की मांग
अमेरिका के घरेलू बाजार में सुस्त रोजगार वृद्धि और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने जनता के बीच व्यवस्था के प्रति असंतोष को और ज्यादा गहरा कर दिया है। सर्वेक्षण बताते हैं कि लगभग आधे अमेरिकी नागरिक अब देश की दिशा में बुनियादी और बड़े बदलाव (Substantial Change) की मांग कर रहे हैं। जब मतदाता बुनियादी स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षित भविष्य को लेकर आशंकित महसूस करते हैं, तो सत्तारूढ़ पार्टी के लिए सत्ता बचा पाना लगभग असंभव हो जाता है। इन तीनों आर्थिक, कूटनीतिक और सामाजिक संकटों का सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।
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