
दिल्ली-एनसीआर में दैनिक आवाजाही करने वाले लाखों वाहन चालकों, दैनिक यात्रियों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। राजधानी दिल्ली के सराय काले खां और डीएनडी फ्लाईवे से हरियाणा के सोहना और पलवल को सीधे जोड़ने वाले नए एलिवेटेड और सिग्नल-फ्री लिंक एक्सप्रेसवे का ट्रायल रन पूरी तरह ‘सुपरहिट’ साबित हुआ है। ट्रायल के दौरान इस पूरे 59 किलोमीटर लंबे आधुनिक स्ट्रेच पर गाड़ियां फर्राटा भरते हुए नजर आईं। जिस दूरी को तय करने में आश्रम, बदरपुर, फरीदाबाद और गुरुग्राम के भीषण ट्रैफिक जाम के कारण पीक ऑवर्स में ढाई से तीन घंटे का समय बर्बाद होता था, वह सफर अब ट्रायल के दौरान महज 45 से 50 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के ‘अर्बन लिंक पैकेज’ के तहत विकसित किया गया यह कॉरिडोर राजधानी की सबसे व्यस्त सड़कों पर दबाव घटाने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है। आश्रम चौक, कालकाजी, ओखला, बदरपुर बॉर्डर, और बल्लभगढ़ जैसे पारंपरिक बॉटलनेक्स पर फंसे बिना गाड़ियां सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से बाहर निकल सकेंगी। सफल ट्रायल के बाद अब सुरक्षा ऑडिट और अंतिम फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
वर्तमान में दिल्ली के मध्य और पूर्वी हिस्से से यदि किसी को सोहना, पलवल या जयपुर की ओर निकलना होता है, तो रिंग रोड, मथुरा रोड, बदरपुर फ्लाईओवर और फरीदाबाद बाईपास से होकर गुजरना पड़ता है। इन मार्गों पर दर्जनों रेड लाइट्स, भारी कमर्शियल ट्रैफिक और स्थानीय बाजार होने के चलते वाहन रेंगते हुए चलते हैं। सुबह और शाम के ऑफिस टाइम में 2 से 3 घंटे लगना आम बात हो गई थी।
नए कॉरिडोर को पूरी तरह ‘कंट्रोल्ड-एक्सेस’ और सिग्नल-फ्री बनाया गया है। इसमें 6 लेन का चौड़ा एलिवेटेड स्ट्रक्चर और जमीन पर बेहतर सर्विस लेन तैयार की गई हैं। डिजाइन स्पीड 100 किमी/घंटा रखी गई है। ट्रायल रन के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने वाहनों की गति, मोड़, प्रवेश और निकास रैंप (Entry-Exit Ramps) तथा लोड क्षमता का परीक्षण किया, जिसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चन दर्ज नहीं हुई। जाम और रेड लाइट न होने के कारण ईंधन की भारी बचत होगी और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह आधुनिक एक्सप्रेसवे अलाइनमेंट दिल्ली के सराय काले खां और डीएनडी फ्लाईवे जंक्शन से शुरू होता है। यहां से यह यमुना नदी के पश्चिमी किनारे और आगरा नहर के समानांतर आगे बढ़ता है:
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दिल्ली सेक्शन: सराय काले खां, महारानी बाग, ओखला और कालिंदी कुंज को पार करते हुए यह एलिवेटेड रूट फरीदाबाद की सीमा में प्रवेश करता है।
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हरियाणा सेक्शन (फरीदाबाद बाईपास): फरीदाबाद बाईपास के ऊपर बने मल्टी-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर से होकर यह सीधे बल्लभगढ़ के पास तक पहुंचता है।
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सोहना और पलवल का स्पर (स्प्लिट): मंडकोला और सेक्टर 65 के पास यह दो हिस्सों में कनेक्ट होता है। एक हिस्सा सीधे केएमपी (KMP Expressway) और सोहना की तरफ दिल्ली-मुंबई मुख्य एक्सप्रेसवे से जुड़ जाता है, जबकि दूसरा स्पर पलवल और आगरा हाईवे (NH-19) की ओर निर्बाध निकास देता है।
इस नए हाईवे के पूरी तरह चालू होने का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष लाभ दक्षिण और पूर्वी दिल्ली की स्थानीय सड़कों को मिलेगा। नोएडा, गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली और मध्य दिल्ली से फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोहना या राजस्थान की ओर जाने वाले भारी वाहन, कमर्शियल ट्रक और लंबी दूरी की कारें अब रिंग रोड या मथुरा रोड पर नहीं उतरेंगी। वे सराय काले खां और डीएनडी से सीधे इस एलिवेटेड रूट पर चढ़ जाएंगे।
नतीजतन, आश्रम चौक, सराय काले खां बस अड्डा, मूलचंद, लाजपत नगर, नेहरू प्लेस और बदरपुर बॉर्डर पर स्थानीय वाहनों का दबाव 30 से 40 प्रतिशत तक घट जाएगा। इससे रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले स्थानीय यात्रियों को जाम की भीषण किल्लत से स्थायी मुक्ति मिल सकेगी।
एनएचएआई ने इस पूरे एक्सप्रेसवे स्ट्रेच को अत्याधुनिक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) से लैस किया है। पूरे रूट पर हाई-रेजोल्यूशन एआई कैमरे, वेदर मॉनिटरिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक स्पीड डिटेक्शन रडार लगाए गए हैं ताकि तेज रफ्तार के दौरान ओवरस्पीडिंग और लेन अनुशासन का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जा सके।
इसके अतिरिक्त, टोलिंग के लिए पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह ओपन टोलिंग और आधुनिक फास्टैग (FASTag) रीडर लगाए जा रहे हैं, जिससे टोल कटने के लिए वाहनों को कतारों में रुकना नहीं पड़ेगा। आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता के लिए हर 5 किलोमीटर पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स और एम्बुलेंस व क्रेन सहायता की 24×7 व्यवस्था की जा रही है।
सराय काले खां से सोहना और पलवल तक यात्रा समय में हुई इस ऐतिहासिक कटौती का सीधा असर फरीदाबाद, सोहना और ग्रेटर फरीदाबाद (नेहरपार) के रियल एस्टेट व औद्योगिक सेक्टर पर पड़ेगा। सोहना और पलवल अब दिल्ली से भौगोलिक रूप से दूर होने के बावजूद समय के पैमाने पर केवल 45 मिनट की दूरी पर आ गए हैं।
लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग पार्क और आईटी कंपनियों के लिए यह कॉरिडोर एक लाइफलाइन साबित होगा। औद्योगिक संगठनों का मानना है कि इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी और सप्लाई चेन में तेजी आएगी। आम जनता के लिए इसका औपचारिक लोकार्पण आगामी कुछ हफ्तों में किए जाने की पूरी संभावना है, जो एनसीआर के बुनियादी ढांचे में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
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