शहबाज शरीफ के ट्वीट अमेरिका से आते हैं: ईरानी अधिकारी ने खोली पाकिस्तान की पोल

इस्लामिक जगत और मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक नया और बड़ा धमाका हुआ है, जिसने इस्लामाबाद से लेकर वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। ईरान के एक अत्यंत वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर बेहद सीधा और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि शहबाज शरीफ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से होने वाले सभी प्रमुख ट्वीट असल में पाकिस्तान से नहीं, बल्कि सीधे अमेरिका से संचालित और नियंत्रित होते हैं। ईरानी अधिकारी के इस विस्फोटक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की निष्पक्षता और उसकी स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य पूर्व में तनाव कम करने और मुस्लिम देशों के बीच शांति बहाली के लिए मध्यस्थता करने का दावा करने वाले पाकिस्तान के लिए यह बयान एक तगड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। ईरानी कूटनीतिज्ञ ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश अपनी विदेश नीति और बयानबाजी के लिए भी पश्चिमी ताकतों पर निर्भर रहता है, वह दो देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका कैसे निभा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख और अमेरिकी प्रभाव का बड़ा सच

ईरानी अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर खुद को एक जिम्मेदार और शांतिप्रिय मुस्लिम राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, ईरान के इस तीखे प्रहार ने इस्लामाबाद की कूटनीतिक रणनीति की हवा निकाल दी है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और उसके बड़े नेताओं के सार्वजनिक बयान स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिका की भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के हिसाब से लिखे और तैयार किए जाते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर लगे इन संगीन आरोपों से यह बात एक बार फिर सामने आई है कि इस्लामाबाद अपनी आर्थिक और राजनीतिक मजबूरियों के कारण वाशिंगटन के इशारों पर चलने के लिए मजबूर है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी ऐसे देश को मध्यस्थ स्वीकार नहीं करेगा जिसकी डोर अमेरिका जैसी महाशक्ति के हाथों में हो।

तालिबान सरकार की तारीफ और अफगानिस्तान के क्षेत्रीय प्रभाव की सराहना

इस तीखे हमले के बीच ईरान ने पड़ोसी देश अफगानिस्तान पर शासन कर रहे तालिबान की अप्रत्याशित रूप से जमकर तारीफ की है। ईरानी अधिकारी ने तालिबान सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिमी दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तालिबान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर मजबूती से टिका हुआ है। ईरान ने माना कि तालिबान ने किसी बाहरी महाशक्ति के आगे घुटने नहीं टेके हैं और अपने फैसले खुद लेने का साहस दिखाया है। पाकिस्तान के विपरीत, तालिबान ने क्षेत्रीय स्थिरता और संप्रभुता के मामले में अधिक परिपक्वता का परिचय दिया है। ईरान का यह तालिबान प्रेम और पाकिस्तान पर तीखा हमला इस बात का साफ संकेत है कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के कूटनीतिक समीकरणों में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है, जहाँ अमेरिका विरोधी धड़ा एक-दूसरे के करीब आ रहा है।

दक्षिण और मध्य एशिया की भू-राजनीति पर इस बयान के गहरे कूटनीतिक प्रभाव

ईरान और पाकिस्तान के बीच का यह ताजा विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और संबंधों पर पड़ने वाले हैं। पाकिस्तान हमेशा से अफगानिस्तान और मध्य पूर्व के मामलों में खुद को मुख्य खिलाड़ी साबित करना चाहता रहा है, लेकिन ईरान के इस खुलकर सामने आने से उसकी छवि को गहरा धक्का लगा है। दूसरी ओर, ईरान द्वारा तालिबान की तारीफ करने से इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से बने तनावपूर्ण संबंधों में और आग लगने की संभावना है। तालिबान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और डूरंड लाइन को लेकर लगातार झड़पें होती रही हैं। ऐसे में ईरान का तालिबान का समर्थन करना और शहबाज शरीफ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपने ही पड़ोसियों के बीच अलग-थलग पड़ता जा रहा है।

भविष्य के समीकरण और इस्लामाबाद के सामने खड़ी नई कूटनीतिक चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें इस्लामाबाद के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं कि वे ईरान के इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देते हैं। अमेरिका के साथ अपने बिगड़ते-संभलते रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाली मदद के बीच पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली है। ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय मामलों में किसी भी तीसरे देश की कठपुतली मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बना पाता है या फिर उसकी स्वतंत्र कूटनीति का ढोंग दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा।

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