‘राजनाथ सिंह क्यों बन गए जग्गा जासूस’: प्रशांत भूषण के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, कहा- चुनाव से सरकार बदलना लोकतंत्र का हिस्सा

देश की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे बाण और राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी सुधारों से जुड़े मुद्दों को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जोरदार हमला बोला है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जताई गई आपत्ति के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी पर करारा प्रहार किया। पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना और सत्ता परिवर्तन की बात करना पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, तो फिर राजनाथ सिंह को इस पर आपत्ति क्यों है और वे ‘जग्गा जासूस’ की तरह क्यों रिएक्ट कर रहे हैं?

पवन खेड़ा ने राजनाथ सिंह के बयान को बताया ‘पाखंड’

राजधानी नई दिल्ली में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने विपक्ष के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले शब्दों को लेकर सवाल खड़े किए थे। राजनाथ सिंह ने कहा था कि विपक्ष के इन बयनों से यह साफ हो जाता है कि उनकी यह पूरी लड़ाई किसी चुनाव सुधार या आम जनता के मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि केवल और केवल सरकार को हटाने के गुप्त एजेंडे पर आधारित है।

इस पर पलटवार करते हुए पवन खेड़ा ने बीजेपी के रुख को कोरा ‘पाखंड’ करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “हम अपने इस लक्ष्य को बार-बार दोहरा रहे हैं कि हमें इस सरकार को हराना है और इस व्यवस्था को बदलना है। तो फिर राजनाथ सिंह जी इस बात पर इतने परेशान क्यों हो रहे हैं और ‘जग्गा जासूस’ की तरह क्यों बर्ताव कर रहे हैं?” खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का सबसे बड़ा और बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार ही यही होता है कि वह चुनावों के जरिए मौजूदा सरकार को सत्ता से बेदखल करे।

‘1977 में क्या हुआ था? लोकतंत्र में चुनाव ही सत्ता बदलने का रास्ता है’

पवन खेड़ा ने अपने तर्कों को मजबूत करते हुए देश के ऐतिहासिक राजनीतिक उदाहरणों का भी हवाला दिया। उन्होंने वर्ष 1977 के आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि क्या उस वक्त देश में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) नहीं हुआ था? लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है और जब भी विपक्ष सड़क पर उतरकर जनता की आवाज उठाता है, तो उसका अंतिम उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बदलाव लाना ही होता है।

उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में रिजीम कैसे बदलता है? चुनावों के जरिए ही तो बदलता है! चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना ही तो विपक्ष का मुख्य और एकमात्र राजनीतिक मकसद होता है, और इसके अलावा दूसरा क्या मकसद हो सकता है?” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि आज भारतीय जनता पार्टी सत्ता के नशे में इतनी चूर हो चुकी है कि वह लोकतांत्रिक परंपराओं और विपक्ष की आलोचनाओं को सहन करने की अपनी आदत पूरी तरह भूल चुकी है। जब भी पार्टी को जनता और विपक्ष की तपिश झेलनी पड़ती है, तो वे बौखला जाते हैं।

क्या था पूरा विवाद और प्रशांत भूषण का बयान

यह पूरा राजनीतिक टकराव उस वक्त शुरू हुआ जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए। इन प्रदर्शनों के बीच वरिष्ठ और चर्चित वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bushan) ने केंद्र सरकार पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए एक बयान दिया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि अगर सरकार को यह लगता है कि यह लड़ाई ‘सत्ता परिवर्तन’ की है, तो हाँ, हम इस देश में ‘रिजीम चेंज’ करना चाहते हैं और इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं।

प्रशांत भूषण के इसी बयान को आधार बनाकर बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया और शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे देश की संवैधानिक व्यवस्था पर हमला करार दिया। बीजेपी का कहना था कि विपक्ष के इरादे साफ नहीं हैं और वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना चाहते हैं।

‘2013-14 में यही प्रशांत भूषण बीजेपी को लगते थे प्यारे’

पवन खेड़ा ने बीजेपी के इस विरोध पर करारा कटाक्ष करते हुए पुरानी यादें ताजा कर दीं। उन्होंने याद दिलाया कि जिस वकील प्रशांत भूषण के आज के बयानों पर बीजेपी इतनी आपत्ति जता रही है, वही वकील 2012-2013 के दौरान तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ चले आंदोलनों का प्रमुख चेहरा हुआ करते थे। उस समय भारतीय जनता पार्टी उनकी हर बात पर ताली बजाती थी और उनकी चीयरलीडर बनी हुई थी।

खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि उस समय जब प्रशांत भूषण ‘रिजीम चेंज’ की बात करते थे, तब बीजेपी को बहुत अच्छा लगता था, लेकिन आज जब वही बात उनके खिलाफ इस्तेमाल हो रही है तो उन्हें परेशानी हो रही है। उन्होंने अंत में दावा किया कि बीजेपी अच्छी तरह से यह भांप चुकी है कि आने वाले समय में सत्ता उनके हाथों से खिसकने वाली है, इसलिए वे ऐसे बेबुनियाद मुद्दों को तूल दे रहे हैं।

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