नवी मुंबई एयरपोर्ट पर 265 उड़ानों के शिफ्ट होने के आदेश पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी

भारत के उड्डयन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास और नए आधुनिक हवाई अड्डों के निर्माण का सिलसिला तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासनिक फैसलों और एयरलाइंस के संचालन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस भी शुरू हो चुकी है। हाल ही में मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के उड्डयन परिदृश्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 265 उड़ानों को नए विकसित हो रहे नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्थानांतरित (Shift) करने के आदेश जारी किए गए हैं। इस प्रशासनिक निर्णय के सामने आते ही विमानन गलियारों और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। इस आदेश पर सबसे तीखी और मुखर प्रतिक्रिया शिवसेना (UBT) की वरिष्ठ सांसद और तेज-तर्रार नेत्री प्रियंका चतुर्वेदी की ओर से आई है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी जताते हुए सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि यात्रियों की वास्तविक सुविधाओं, कनेक्टिविटी और स्थानीय प्राथमिकताओं को ताक पर रखकर इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों को अचानक शिफ्ट करना आखिरकार कैसे ठीक या न्यायसंगत हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरफ जहां मुंबई के बढ़ते हवाई यातायात और एयरपोर्ट के लोड मैनेजमेंट को बहस के केंद्र में ला दिया है, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों की परेशानियों और एयरलाइंस के ऑपरेशनल दबाव को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का मुख्य छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (CSMIA) दुनिया के सबसे व्यस्त सिंगल-रनवे आधारित और हाई-डेंसिटी वाले एयरपोर्ट्स में शुमार है। यहाँ पहले से ही उड़ानों का भारी दबाव है, जिसके कारण स्लॉट की कमी, विमानों की आवाजाही में देरी (Delays) और पीक ऑवर्स में एयर ट्रैफिक कंजेशन जैसी समस्याएं आम बात बन चुकी हैं। इन सभी परेशानियों के स्थायी समाधान के रूप में और मुंबई क्षेत्र के बढ़ते कमर्शियल ट्रैफिक को बांटने के लिए नवी मुंबई के पनवेल क्षेत्र में एक अत्याधुनिक और विशाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण किया गया है, जिसका उद्देश्य विमानन दबाव को कम करना है। इसी रणनीति के तहत नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA), एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एयरलाइंस के बीच समन्वय स्थापित करके लगभग 265 दैनिक या साप्ताहिक उड़ानों को पुराने मुंबई एयरपोर्ट से हटाकर नए नवी मुंबई एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने का खाका तैयार किया गया था। इस प्रक्रिया का मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और मुंबई के मुख्य हवाई अड्डे पर होने वाली भीड़-भाड़ से निजात मिलेगी। हालांकि, कागजों पर दिखने वाला यह तकनीकी और ढांचागत समाधान धरातल पर आने के बाद यात्रियों, एयरलाइंस ऑपरेटरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी चुनौती और चिंता का विषय बन गया है, जिस पर अब खुलकर विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं।

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस आदेश के तुरंत बाद अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार, उड्डयन मंत्रालय और संबंधित एयरपोर्ट प्रशासनों पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर खुलकर सवाल उठाया कि बिना पूरी तरह से पब्लिक कनेक्टिविटी और लोकल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के तैयार हुए इतनी बड़ी संख्या में उड़ानों को नए एयरपोर्ट पर धकेल देना यात्रियों के साथ सरासर अन्याय है। प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि मुंबई के मुख्य हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए लोगों के पास लोकल ट्रेनों, मेट्रो, कैब और अन्य परिवहन माध्यमों का एक सुचारू और स्थापित नेटवर्क है, जबकि इसके मुकाबले नवी मुंबई एयरपोर्ट तक आवाजाही के लिए अभी भी कई बुनियादी सड़क और रेल मार्ग पूरी तरह से विकसित होने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने पूछा कि जो यात्री महीनों पहले अपनी टिकटें बुक करा चुके हैं या जिन्हें दक्षिण मुंबई, पश्चिमी उपनगरों या ठाणे से यात्रा करनी होती है, उन्हें अचानक नवी मुंबई जाने के लिए मजबूर करने से उनकी यात्रा का समय और खर्च दोनों कई गुना बढ़ जाएंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इस प्रकार के मनमाने और जल्दबाजी में लिए गए प्रशासनिक फैसले आम जनता और यात्रियों की सहूलियत को नजरअंदाज करते हैं, इसलिए सरकार और एयरलाइंस को इस आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि किसी भी यात्री को मानसिक या आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा व्यावहारिक संकट आम यात्रियों के सामने खड़ा हो गया है, जिन्हें अचानक से अपने फ्लाइट शेड्यूल और डिपार्चर पॉइंट्स में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी नए एयरपोर्ट के संचालन के शुरुआती दौर में यह बेहद जरूरी होता है कि वहां तक पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट, विशेष रूप से लोकल ट्रेन कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे लिंकेज और बस सेवाओं को पूरी तरह से चाक-चौबंद किया जाए। हालांकि नवी मुंबई एयरपोर्ट के आसपास बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम चल रहा है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि मुंबई के मुख्य इलाकों से वहां तक समय पर पहुंचना अभी भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। यदि एयरलाइंस कंपनियों को बिना पर्याप्त तैयारी के अचानक 265 उड़ानों को वहां संचालित करने के लिए बाध्य किया जाता है, तो इससे फ्लाइट्स के समय में देरी, बैगेज हैंडलिंग में समस्याएं और मिस-कनेक्शन जैसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस के लिए भी ग्राउंड स्टाफ, मेंटेनेंस यूनिट्स और क्रू लॉजिस्टिक्स को रातों-रात एक एयरपोर्ट से दूसरे एयरपोर्ट पर शिफ्ट करना एक भारी वित्तीय और तकनीकी सिरदर्द साबित हो रहा है। यही कारण है कि न केवल राजनीतिक प्रतिनिधि बल्कि कई विमानन विशेषज्ञ भी यह मान रहे हैं कि इस ट्रांजिशन पीरियड को थोड़ा क्रमिक (Gradual) और सुनियोजित बनाया जाना चाहिए था, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुंबई जैसे विशाल महानगर के लिए दूसरा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होना समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य मांग है, क्योंकि मौजूदा हवाई अड्डा अपनी अधिकतम क्षमता से अधिक ट्रैफिक संभाल रहा है। नवी मुंबई एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल इस क्षेत्र के आर्थिक विकास को पंख लगेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए नए रास्ते भी खुलेंगे। लेकिन किसी भी बड़े मेगा-प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में आम जनता की सहूलियत, पारदर्शी संवाद और चरणबद्ध तरीके से बदलाव लाना सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है। प्रियंका चतुर्वेदी द्वारा उठाए गए मुद्दों ने इस बात को उजागर कर दिया है कि केवल कागजी और तकनीकी आंकड़ों के आधार पर हवाई अड्डों का संचालन नहीं बदला जा सकता, बल्कि इसके लिए धरातल पर यात्रियों के अनुभवों को भी प्राथमिकता देनी होगी। आने वाले दिनों में उड्डयन मंत्रालय, एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस कंपनियों को मिलकर एक ऐसा संतुलित रोडमैप तैयार करना होगा जिससे एक तरफ नवी मुंबई एयरपोर्ट का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके और दूसरी तरफ मुंबई के आम यात्रियों को कनेक्टिविटी या अन्य किसी भी प्रकार की परेशानियों से पूरी तरह से राहत मिल सके।

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