
वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक ऐसा ऐतिहासिक और अप्रत्याशित मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक लंबी और बेहद अहम टेलीफोनिक वार्ता के बाद घोषणा की है कि रूस तत्काल प्रभाव से अमेरिकी और वैश्विक बाजार में लाखों टन डीजल ईंधन की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति संकट और अमेरिका में आसमान छूती ईंधन कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते पर मुहर लगाई है। इस बड़े कूटनीतिक समझौते के तुरंत बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त विभाग) ने अपने नियमों में संशोधन करते हुए रूसी संघ से बने डीजल ईंधन के आयात, बिक्री और अनलोडिंग पर लगे सभी कड़े प्रतिबंधों को 7 अप्रैल 2027 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस ऐलान के साथ ही न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज और यूरोपीय कमोडिटी बाजारों में डीजल के वायदा भाव में तत्काल तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ईंधन की महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
पुतिन से सफल बातचीत के बाद ट्रंप का ऐलान: 30 लाख टन से ज्यादा डीजल देगा रूस
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक युगांतरकारी जीत करार दिया। ट्रंप ने लिखा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अत्यधिक सफल और ठोस चर्चा पूरी की है, जिसके तहत रूस तुरंत 3,00,000 टन (3 लाख टन) से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले डीजल ईंधन की आपूर्ति अमेरिकी और वैश्विक बाजारों को करेगा। समझौते के अगले चरण के अनुसार, मॉस्को नवंबर के महीने में 5,00,000 टन (5 लाख टन) अतिरिक्त डीजल भेजेगा और उसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल की एक और बड़ी खेप रवाना की जाएगी। इसके अलावा, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि रूस अपनी रिफाइनरियों की स्थिति और परिचालन क्षमता के आधार पर बहुत कम समय के भीतर 30 लाख टन (30,00,000 टन) डीजल ईंधन की भारी आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। ट्रंप का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी निगरानी और रूसी ईंधन के इस बड़े प्रवाह से अमेरिका और पूरी दुनिया में डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर और बेहद तेजी से नीचे आएंगे।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का बड़ा यू-टर्न: 7 अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में ढील
इस समझौते की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रंप के बयान के कुछ ही मिनटों के भीतर अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने एक विशेष सामान्य लाइसेंस जारी कर दिया। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध और प्राइस कैप लगा रखे थे। हालांकि, नए आदेश के अनुसार 'रूसी हानिकारक विदेशी गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंध नियमों' (RuHSR) के तहत प्रतिबंधित सभी प्रकार के लेन-देन को 7 अप्रैल 2027 की रात 12:01 बजे तक के लिए छूट दे दी गई है। इसके तहत रूसी मूल के डीजल ईंधन की समुद्री खरीद, शिपिंग, इंश्योरेंस, पोर्ट अनलोडिंग और अमेरिकी घरेलू रिफाइनरी नेटवर्क में सीधे आयात को कानूनी मान्यता मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विश्लेषक इसे वाशिंगटन की विदेश नीति में एक बड़ा यू-टर्न मान रहे हैं, जो यह साबित करता है कि घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और मुद्रास्फीति के दबाव के आगे भू-राजनीतिक प्रतिबंधों को भी किनारे कर दिया गया है।
ईंधन की आग में क्यों झुलस रहा था अमेरिका और ट्रंप पर क्यों था भारी दबाव
अमेरिका में डीजल की कीमतों में आए इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव और यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए गए ड्रोन हमले प्रमुख वजह रहे हैं। सऊदी अरब और लाल सागर के जलमार्गों पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने वैश्विक कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों के आवागमन को बाधित कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू रही थीं, जिसने सीधे तौर पर रसद, माल ढुलाई और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को झकझोर कर रख दिया था। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के मद्देनजर ईंधन की यह महंगाई ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक सिरदर्द बन चुकी थी। अमेरिकी किसान, पशुपालक, ट्रांसपोर्टर्स और लंबी दूरी के ट्रक चालक बढ़ते डीजल बिलों के खिलाफ मुखर हो रहे थे। ऐसे में पुतिन के साथ यह सीधी डील कर ट्रंप ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं—घरेलू मतदाताओं को महंगाई से तुरंत राहत का भरोसा दिया है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार की बागडोर को फिर से अपने नियंत्रण में खींच लिया है।
वैश्विक बाजारों और भारत पर क्या पड़ेगा असर: क्या कच्चे तेल के दाम भी गिरेंगे
वैश्विक स्तर पर डीजल को सभी औद्योगिक और कृषि गतिविधियों का प्रमुख 'वर्कहॉर्स' ईंधन माना जाता है। जब भी डीजल महंगा होता है, तो खेतों में ट्रैक्टर चलाने से लेकर मंडियों तक अनाज पहुंचाने की पूरी लागत बढ़ जाती है, जिससे खुदरा खाद्य महंगाई अनियंत्रित हो जाती है। रूस द्वारा लाखों टन डीजल अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारे जाने से सिंगापुर, रॉटरडैम और गल्फ रिफाइनिंग मार्जिन्स में नरमी आना तय है। भारत के नजरिए से देखें, तो भारत पहले से ही रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल (Crude Oil) का बड़ा खरीदार रहा है। यदि वैश्विक बाजार में तैयार डीजल की उपलब्धता बढ़ती है और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड व गैसऑयल की कीमतें ठंडी पड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भारतीय तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को मिलेगा। नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों में माल ढुलाई सस्ती होने से आवश्यक वस्तुओं के थोक भावों पर सकारात्मक असर दिखेगा और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावनाएं मजबूत होंगी।
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