
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से शारदीय नवरात्रि और दुर्गा विसर्जन के पर्व के बीच एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ पूरा इलाका मां दुर्गा की भक्ति और उल्लास में डूबा हुआ था, वहीं एक पल की लापरवाही और तेज रफ्तार ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन कर वापस अपने घर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉला को तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौके पर या उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुखद घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और पीड़ित परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गया तथा घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रात के समय सड़कों पर भारी वाहनों की रफ्तार और यातायात सुरक्षा के कड़े नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोंडा जिले के मोतीगंज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के कुछ लोग पारंपरिक उत्साह के साथ अपनी स्थानीय दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉला पर सवार होकर गए थे। विसर्जन की सभी धार्मिक रस्मों और प्रक्रियाओं को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न करने के बाद सभी श्रद्धालु और युवा डीजे की धुन और माता के जयकारों के साथ अपने घर वापस लौट रहे थे। जैसे ही उनका ट्रैक्टर-ट्रॉला निर्धारित मार्ग पर स्थित राजासगरा चौराहे के पास पहुंचा, तभी सामने से आ रहे एक अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त और भयानक थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉला पर सवार लोग संभल भी नहीं पाए और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। अंधेरा होने के बावजूद स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया और ट्रैक्टर-ट्रॉला के नीचे दबे तथा छिटककर दूर गिरे घायलों को बाहर निकाला।
इस भयानक सड़क हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें फौरन जिला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार, हादसे में घायल हुए नितिन, सोनू, रामकुमार, संतराम, राजनरेंद्र, शिवकुमार, राजेश और संतोष समेत आठ लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद दो गंभीर रूप से घायल युवाओं—संजय और आशीष ने दम तोड़ दिया। इन दोनों युवकों की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में कोहराम मच गया और उनके घर में चीख-पुकार मच गई। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है क्योंकि वे अपने घर के इकलौते सहारे और मेहनतकश युवक थे जो मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। अन्य घायल हुए श्रद्धालुओं का इलाज अभी भी विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
इस दर्दनाक सड़क दुर्घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं कि पर्व के समय भारी वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक क्यों नहीं लगाई गई थी। हादसे के बाद राजासगरा चौराहे के पास करीब बीस मिनट तक भारी जाम लग गया और यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया, जिसे बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुचारू कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टक्कर मारने वाले ट्रक और दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर-ट्रॉला को कब्जे में ले लिया गया है तथा फरार या जिम्मेदार चालक की तलाश की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि त्योहारों और विसर्जन के दौरान विशेष सावधानी बरतें और भारी वाहनों के मूवमेंट के वक्त अतिरिक्त सतर्कता रखें। हालांकि, एक तरफ जहां गोंडा में विसर्जन के दौरान नदियों में डूबने से चार अन्य लोगों की मौत की खबर ने पहले ही प्रशासन को हिला रखा था, वहीं इस सड़क हादसे ने इस पावन पर्व को हमेशा के लिए एक गहरे जख्म में बदल दिया है। स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े ट्रैफिक प्रतिबंधों की मांग कर रहे हैं।
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