कुदरत ने ओढ़ी बर्फ की सफेद चादर: धौलाधार और मनाली की चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी से बदला मौसम का मिजाज

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के वायुमंडल में सर्दियों की आहट ने इस बार तय समय से पहले ही जोरदार दस्तक दे दी है। कांगड़ा घाटी के सिरमौर कहे जाने वाले भव्य धौलाधार पर्वत श्रृंखला और पर्यटन नगरी मनाली की गगनचुंबी चोटियों ने सीजन की पहली ताजा बर्फबारी के साथ कुदरत की चमचमाती सफेद चादर ओढ़ ली है। समुद्र तल से 13,058 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व विख्यात रोहतांग दर्रा, शिंकुला टॉप, बारालाचा ला, कुंजुम पास और लाहौल-स्पीति घाटी के ऊपरी रिहायशी इलाकों में लगातार रुक-रुक कर हो रहे हिमपात ने पूरे प्रदेश को भीषण ठंड की आगोश में ले लिया है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में ही इस तरह अचानक पहाड़ों पर गिरी बर्फ ने न केवल स्थानीय जनजीवन की दिनचर्या को बदल दिया है, बल्कि मैदानी इलाकों से पहुंचे पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। चोटियों पर बर्फ की सफेद परत जमने के साथ ही वादियों से उठने वाली बर्फीली और ठंडी हवाएं निचले इलाकों में तेजी से उतरने लगी हैं। कुल्लू, धर्मशाला, पालमपुर और शिमला के पहाड़ी ढलानों पर सुबह और शाम के समय घना कोहरा छाने लगा है और स्थानीय लोगों ने बमुश्किल अक्टूबर के महीने में ही अलमारियों से भारी ऊनी कपड़े, स्वेटर, जैकेट और रजाई-कंबल बाहर निकाल लिए हैं।

ताजा बर्फबारी और निचले इलाकों में लगातार हो रही मानसूनी विदाई के बाद की बारिश ने हिमाचल के तापमान ग्राफ को धड़ाम से नीचे गिरा दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) शिमला के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के औसत अधिकतम तापमान में एक ही दिन के भीतर 6.7 डिग्री से लेकर 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 0.5 से 1.8 डिग्री सेल्सियस के बेहद ठंडे स्तर पर आ गया है, जबकि ताबो में न्यूनतम पारा 2.3 से 3.4 डिग्री और कल्पा में 5.6 से 6.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मनाली में अधिकतम तापमान सामान्य से 7.2 डिग्री नीचे गिरकर 11.2 से 14.6 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट गया है, जिससे दोपहर के समय भी हवा में चुभन महसूस हो रही है। राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान गिरकर 16.4 डिग्री और कुफरी में 13.1 डिग्री सेल्सियस तक आ चुका है। दिन के समय ही अचानक छा जाने वाले घने काले बादलों और ठंडी हवाओं के चलते शिमला और मनाली के माल रोड पर घूमने वाले सैलानियों और स्थानीय दुकानदारों को दिन में ही अलाव और हीटरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पहाड़ों पर समय से पहले हुई इस बर्फबारी ने जहां खूबसूरती बिखेरी है, वहीं सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों पर आवाजाही के लिए गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। लाहौल-स्पीति और जांस्कर घाटी को जोड़ने वाले 16,580 फीट ऊंचे दारचा-शिंकुला मार्ग पर भारी बर्फबारी और सड़क की सतह पर पानी जमने से खतरनाक ‘ब्लैक आइस’ (अदृश्य फिसलन वाली बर्फ) की परत बिछ गई है। सड़क पर फिसलकर वाहनों के खाई में गिरने के बढ़ते जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने दारचा-शिंकुला मार्ग पर सभी प्रकार के दोपहिया वाहनों और हल्के वाहनों की आवाजाही को एहतियातन पूरी तरह बंद कर दिया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्नो-कटर मशीनें और बीकन के जवान पटरियों से बर्फ हटाने के काम में जुटे हुए हैं। मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और अटल टनल रोहतांग के साउथ और नॉर्थ पोर्टल के आसपास भी पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को अलर्ट मोड पर डालते हुए टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया है और पर्यटकों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अनजाने बर्फीले रास्तों, संवेदनशील ढलानों और ब्यास व चंद्रा नदियों के तेज बहाव वाले किनारों की ओर न जाएं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अप्रत्याशित मौसमी बदलाव के पीछे उत्तर भारत के क्षोभमंडल में सक्रिय हुआ एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और उससे प्रेरित चक्रवाती हवाओं का दबाव क्षेत्र है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अंधड़ चलने, आकाशीय बिजली कड़कने और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए बाकायदा येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है। मौसम विभाग के बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि कांगड़ा, धर्मशाला, पालमपुर, चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर के मध्य और निचले पर्वतीय इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। वहीं, 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले सभी हिमालयी शिखरों पर मध्यम से लेकर भारी हिमपात का दौर जारी रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का यह असर अगले 48 घंटों तक बना रहेगा, जिसके बाद पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में आसमान धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है, लेकिन हवा में मौजूद नमी और जमी हुई बर्फ के चलते तापमान में कोई राहत नहीं मिलेगी।

अक्टूबर के महीने में ही बर्फबारी की यह खबर जैसे ही सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों के जरिए फैली, मैदानी राज्यों—पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से पर्यटकों का सैलाब पहाड़ों की ओर उमड़ पड़ा है। मनाली, सोलंग वैली, गुलाबा, सिसु, कोक्सर और धर्मशाला के मैकलोडगंज में होटल बुकिंग और होमस्टे की ऑक्यूपेंसी में 35 से 40 प्रतिशत तक का अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है। त्योहारी सीजन और दिवाली की छुट्टियों से ठीक पहले हुई इस बर्फबारी को हिमाचल के पर्यटन उद्योग के लिए एक वरदान माना जा रहा है। हालांकि, पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिलने के साथ ही स्थानीय पुलिस प्रशासन ने बाहरी राज्यों से आने वाले निजी वाहन चालकों के लिए सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। ड्राइवरों को सलाह दी गई है कि वे तेज गति में गाड़ी न चलाएं और बर्फबारी वाले मोड़ों पर अचानक ब्रेक लगाने से बचें क्योंकि इससे वाहन के स्किड होकर खाई में गिरने का खतरा रहता है। पर्यटकों को अपने साथ पर्याप्त मात्रा में वूलन इनरवेअर, विंड-प्रूफ जैकेट्स, वाटरप्रूफ जूते, स्नो गॉगल्स और सर्दी-जुकाम व सांस संबंधी जरूरी दवाइयां रखने की सख्त हिदायत दी गई है।

हिमाचल प्रदेश की धौलाधार और पीर पंजाल पर्वतमालाओं पर गिरी सीजन की पहली बर्फ केवल पहाड़ी राज्य तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका सीधा और व्यापक असर उत्तर भारत के समूचे मैदानी भूभाग पर दिखना शुरू हो गया है। पहाड़ों की बर्फीली चोटियों से टकराकर आ रही शुष्क और ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने पंजाब के अमृतसर, जालंधर, हरियाणा के करनाल, अंबाला और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पश्चिमी व मध्य जिलों में सिहरन पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़ और बरेली जैसे प्रमुख शहरों में रात का न्यूनतम तापमान तेजी से लुढ़ककर 19 से 21 डिग्री सेल्सियस के दायरे में पहुंच गया है। सुबह के समय आसमान में हल्की धुंध की चादर नजर आने लगी है और पार्कों में सैर करने वाले लोगों को हल्की सिहरन और ‘गुलाबी ठंड’ का स्पष्ट अहसास होने लगा है। घरों में दिनभर चलने वाले एयर कंडीशनर (AC) अब बंद होने लगे हैं और पंखों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। मौसम के इस त्वरित संक्रमण काल ने यह साफ कर दिया है कि इस वर्ष उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दियां अपने तय समय से काफी पहले ही पूरे शबाब पर होंगी, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराने जा रहा है।

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