
मध्य पूर्व में जारी भयंकर तनाव के बीच इजरायल के भीतर से ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। इजरायल की डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख यायर गोलन (Yair Golan) ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान दिया है। यायर गोलन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के शीर्ष नेता को निशाना बनाना इजरायल के लिए एक बड़ी गलती साबित हुई है। इस बयान के सामने आने के बाद इजरायली राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और युद्ध की रणनीतियों पर बहस तेज हो गई है।
'खामेनेई को मारना इजरायल के हितों में नहीं था' – यायर गोलन
अल्जीरियाई और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली विपक्षी नेता यायर गोलन ने एक बयान में कहा कि उनका यह स्पष्ट मानना है कि अयातुल्ला अली खामेनेई को खत्म करना इजरायल के लिए रणनीतिक रूप से सही कदम नहीं था। उन्होंने साफ किया कि यह बात इस वजह से नहीं कही जा रही है कि खामेनेई इस सजा के हकदार नहीं थे, बल्कि इसलिए क्योंकि इस कार्रवाई से इजरायल के राष्ट्रीय हितों को कोई वास्तविक या ठोस फायदा नहीं पहुंचा है। इसके साथ ही, गोलन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के उस दावे को भी पूरी तरह से अवास्तविक और खारिज कर दिया है, जिसमें वे ईरान की मौजूदा सरकार को पूरी तरह से उखाड़ फेंकने की बात कह रहे हैं।
अमेरिकी-इजरायली संयुक्त सैन्य हमले में हुई थी खामेनेई की मौत
गौरतलब है कि 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसी वर्ष 28 फरवरी को युद्ध के पहले ही दिन तेहरान स्थित उनके लीडरशिप कंपाउंड पर हुए एक भीषण संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। इस हमले को अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने मिलकर अंजाम दिया था। इस हमले में ईरान के कई अन्य शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी भी मारे गए थे, जिसके परिणामस्वरूप ईरान पर खामेनेई का दशकों पुराना शासन समाप्त हो गया था। अपने लंबे शासनकाल के दौरान खामेनेई ने ईरान की सशस्त्र सेनाओं और क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क का बेहद कड़ाई से नेतृत्व किया था।
बेटे मोजतबा खामेनेई के हाथों में है ईरान की कमान
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने ईरान की सत्ता और कमान संभाली है। जानकारों का मानना है कि मोजतबा अपने दिवंगत पिता की तुलना में काफी हद तक कम जोखिम लेने वाले नेता हैं। पद संभालने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से कम ही सामने आए हैं और मुख्य रूप से लिखित बयानों या पर्दे के पीछे से ही शासन का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में इजरायली विपक्षी नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर ही सैन्य कार्रवाइयों के दीर्घकालिक परिणामों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।
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