‘यूक्रेन युद्ध ने खोल दी हमारी आंखें, ड्रोन के मामले में अमेरिका से बहुत आगे निकल गया यूक्रेन’

वैश्विक रक्षा रणनीतियों, आधुनिक सैन्य तकनीकों और महाशक्तियों की सैन्य तैयारियों को लेकर दुनिया के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन (Pentagon) के टेक्नोलॉजी चीफ एमिल माइकल ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर यह खुलकर स्वीकार किया है कि अमेरिका आधुनिक ड्रोन युद्ध (Drone Warfare) के बदलते स्वरूप और उसकी अनिश्चितताओं के लिए पूरी तरह तैयार नहीं था। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे भीषण युद्ध ने अमेरिकी सैन्य तैयारियों की पोल खोल दी है और यह साबित कर दिया है कि कम लागत वाले ड्रोन तकनीक के मामले में यूक्रेन ने अमेरिका जैसी महाशक्ति को भी पीछे छोड़ दिया है। इस खुलासे के बाद से अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों के बीच हड़कंप मच गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पेंटागन के इस शीर्ष अधिकारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल टेक कॉन्फ्रेंस के दौरान और क्या-क्या बड़े खुलासे किए हैं और भविष्य के युद्धक्षेत्रों को लेकर अमेरिका की क्या नई चिंताएं सामने आ रही हैं।

"हम आधुनिक ड्रोन युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे": पेंटागन के टेक्नोलॉजी चीफ की दो टूक स्वीकारोक्ति

कैलिफोर्निया के नापा में आयोजित प्रतिष्ठित वॉल स्ट्रीट जर्नल टेक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पेंटागन के टेक्नोलॉजी चीफ एमिल माइकल ने बेहद बेबाकी से स्वीकार किया कि अमेरिका को इस बात का कभी अंदाजा ही नहीं था कि आधुनिक संघर्षों में कमर्शियल और छोटे ड्रोन युद्ध की दिशा को पूरी तरह से बदल देंगे। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने अमेरिका को पूरी तरह से चौंका दिया है, क्योंकि अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने कभी इस स्तर के ड्रोन युद्ध की कल्पना ही नहीं की थी।

माइकल ने यह भी माना कि हालांकि अमेरिका ने युद्ध के शुरुआती दौर से ही यूक्रेन को भारी सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की है, लेकिन कई मौकों पर यूक्रेनी सेना को युद्ध के मैदान की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी तकनीक खुद ही विकसित करनी पड़ी, क्योंकि अमेरिकी रक्षा भंडार में वे तकनीकें उपलब्ध ही नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमने यूक्रेन की हरसंभव मदद की, लेकिन उन्हें युद्ध क्षेत्र में जिस तरह की मारक क्षमता और ड्रोन समाधानों की आवश्यकता थी, उसे उन्होंने खुद ही ईजाद किया क्योंकि हमारे पास उस वक्त वह तकनीक मौजूद नहीं थी।"

ड्रोन उत्पादन के भारी अंतर ने खोली पोल: अमेरिका के पास 5 लाख, तो यूक्रेन बना रहा करोड़ों ड्रोन

पेंटागन के टेक्नोलॉजी चीफ ने आंकड़ों का जिक्र करते हुए अमेरिका और युद्धग्रस्त यूक्रेन की निर्माण क्षमताओं के बीच के भारी अंतर को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि पिछली अमेरिकी सरकार के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी रक्षा उद्योगों ने लगभग 1,000 ड्रोन का निर्माण किया था, जिसे बढ़ाकर अब करीब 500,000 (पांच लाख) ड्रोन के भंडार तक पहुंचाया गया है।

लेकिन, जब इसकी तुलना यूक्रेन के उत्पादन से की जाती है, तो यह आंकड़ा बहुत छोटा नजर आता है। रूस के साथ चल रहे इस भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन अकेला इस साल लगभग 80 से 100 लाख (यानी 8 से 10 मिलियन) ड्रोन बनाने का भारी-भरकम अनुमान लगा रहा है। कम लागत और बड़े पैमाने पर ड्रोन के इस अंधाधुंध उत्पादन ने यूक्रेन को युद्ध के मैदान में एक बेहद मजबूत बढ़त दिलाई है, जिसे अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ भी अब स्वीकार कर रहे हैं।

भविष्य के युद्धक्षेत्रों का अध्ययन कर रहा है पेंटागन, स्पेसएक्स और एलन मस्क भी शामिल

रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले कड़े सबक के बाद पेंटागन अब भविष्य के युद्धों की रणनीति को सिरे से बदलने में जुट गया है। माइकल ने जानकारी दी कि रक्षा विभाग के अंतर्गत 'प्रोजेक्ट मेरिडियन' (Project Meridian) नामक एक विशेष पहल की शुरुआत की गई है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यह जांच करना है कि आने वाले समय में युद्ध किस प्रकार के हो सकते हैं, जिसमें जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) और अंतरिक्ष (स्पेस) में होने वाले संभावित संघर्ष भी शामिल हैं।

इस अति-महत्वपूर्ण पहल में अमेरिका के निजी तकनीक जगत की बड़ी हस्तियों को भी जोड़ा गया है। स्पेसएक्स (SpaceX) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क (Elon Musk) और एंडुरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक पामर लकी जैसे दिग्गज उद्योगपति इस दिशा में रक्षा विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि अमेरिका भविष्य की हर सामरिक चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम बन सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टारगेटिंग को लेकर अमेरिकी सतर्कता

भले ही अमेरिकी सेना तेजी से सस्ते और स्वायत्त (Autonomous) प्रणालियों की ओर बढ़ रही है, लेकिन एमिल माइकल ने स्पष्ट किया कि युद्ध के मैदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर पेंटागन अभी भी बहुत अधिक सतर्कता बरत रहा है। उन्होंने बताया कि आज भी सैन्य हमलों और लक्ष्य (Target) तय करने की प्रक्रिया में एआई के बजाय पारंपरिक खुफिया रिपोर्टों (Intelligence Reports), उपग्रह से मिली तस्वीरों (Satellite Images) और इंसानी जांच (Human Verification) को ही सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। एआई टारगेटिंग के मामले में अमेरिका अभी शुरुआती दौर में ही है और मानवीय निर्णय की महत्ता सर्वोपरि है।

इसके अलावा, वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दौड़ पर बात करते हुए माइकल ने दावा किया कि अमेरिका अभी भी चीन से इस मामले में आगे है। उनके अनुसार, अमेरिका के पास अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स और विशाल डेटा-सेंटर क्षमता की जो ताकत है, वह उसे बीजिंग पर बढ़त दिलाती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चीन और अमेरिका के बीच एआई के विकास को लेकर मुकाबला बेहद कड़ा है और दोनों देशों के बीच फासला बहुत कम रह गया है।

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