आंध्र प्रदेश में चक्रवात मुरासु का कहर: समंदर में नाव पलटने से लापता हुए तमिलनाडु के चार मछुआरों के शव बरामद

दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में हाल ही में आए खतरनाक चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclones Murasu) की वजह से मची तबाही के निशान और दर्दनाक हादसे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के समुद्री तटों पर इस प्राकृतिक आपदा ने ऐसा तांडव मचाया कि कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई। ताजा और बेहद दुखद खबर आंध्र प्रदेश के प्रकाशम (Prakasam) जिले से सामने आ रही है, जहां चक्रवात मुरासु के दौरान समुद्र में नाव पलटने के कारण लापता हुए तमिलनाडु के नौ मछुआरों में से चार के शव बरामद कर लिए गए हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद से तटीय इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि बाकी के पांच लापता मछुआरों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस भीषण चक्रवात के दौरान समुद्र के भीतर क्या कुछ घटा और प्रशासन द्वारा राहत व बचाव कार्य किस तरह से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

चक्रवात मुरासु का तांडव: प्रकाशम जिले के कलेक्टर पी. राजा बाबू ने दी पूरी जानकारी

प्रकाशम जिले के जिला कलेक्टर पी. राजा बाबू ने मीडिया और समाचार एजेंसी पीटीआई को इस पूरी दुखद घटना की जानकारी देते हुए बताया कि तमिलनाडु के ये सभी मछुआरे बीते 29 अक्टूबर को चेन्नई से समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकले थे। जब मौसम विभाग की ओर से चक्रवात ‘मुरासु’ के आने की चेतावनी जारी की गई, तो इन मछुआरों को अपनी नावें लेकर किसी सुरक्षित स्थान पर लौटने की सलाह दी गई थी।

चैन्नई से आने के बाद इन मछुआरों ने अपनी नावों को आंध्र प्रदेश के विभिन्न तटों पर सुरक्षित खड़ा किया था। इनमें से तीन नावें रामायपट्टनम (Ramayapatnam) बंदरगाह पर और एक नाव निजामपट्टनम (Nizamapatnam) बंदरगाह पर खड़ी की गई थी। अधिकारियों को पूरी उम्मीद थी कि सभी नावें और उन पर सवार लोग सुरक्षित हैं, लेकिन प्रकृति के भयंकर प्रकोप के आगे इंसानी योजनाएं धरी की धरी रह गईं और मुरासु चक्रवात ने सब कुछ उलट-पुलट कर रख दिया।

कैसे हुआ यह भीषण हादसा? बिना सूचना दिए समुद्र में उतरना पड़ा भारी

जिला प्रशासन द्वारा दी गई शुरुआती जांच और रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के अधिकारियों ने गत दो नवंबर को यह पुष्टि की थी कि सभी मछुआरे और उनकी नावें संबंधित बंदरगाहों पर सुरक्षित हैं। लेकिन इसके बाद 3 नवंबर को एक बड़ी लापरवाही या जल्दबाजी सामने आई। निजामपट्टनम बंदरगाह पर खड़ी एक नाव पर सवार नौ मछुआरों ने आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु के किसी भी स्थानीय अधिकारी को बिना कोई सूचना दिए, अपने अन्य साथियों के पास पहुंचने के लिए रामायपट्टनम की ओर अपनी नाव आगे बढ़ा दी।

जैसे ही ये नौ मछुआरे अपनी नाव लेकर रामायपट्टनम की तरफ जा रहे थे, उसी दौरान चक्रवात मुरासु के प्रभाव से समंदर में तेज हवाएं चलने लगीं और मौसम बेहद भयानक हो गया। तेज हवाओं और ऊंची उठती खतरनाक लहरों की चपेट में आकर उनकी नाव संतुलन खो बैठी और समंदर के बीचों-बीच पलट गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद सभी नौ मछुआरे गहरे पानी में लापता हो गए थे, जिसके बाद तटरक्षक बल (Coast Guard) और स्थानीय प्रशासन को तुरंत इसकी सूचना दी गई।

चार मछुआरों के शव बरामद, तीन शव तट पर बहकर आए

जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ा, वैसे-वैसे इस हादसे की डरावनी तस्वीरें सामने आने लगीं। अब तक की गई तलाश के बाद लापता नौ मछुआरों में से चार के शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, बरामद किए गए चार शवों में से तीन शव बहकर कोथापट्टनम (Kothapatnam) के तट पर आ गए थे, जबकि चौथे शव को सघन तलाशी अभियान के दौरान पानी से बाहर निकाला गया।

सभी चारों शवों को कानूनी और चिकित्सीय औपचारिकताएं पूरी करने के लिए स्थानीय सरकारी जनरल अस्पताल (GGH) में भेजा जा रहा है। प्रकाशम जिला कलेक्टर ने बताया कि उन्होंने तमिलनाडु सरकार के शीर्ष अधिकारियों से इस संबंध में सीधी बात की है, और तमिलनाडु से अधिकारियों की एक विशेष टीम आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हो चुकी है। इस टीम में मत्स्य विभाग के एक सहायक निदेशक भी शामिल हैं, जो मृतकों की पहचान की पुष्टि करेंगे और पूरी कागजी कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करेंगे।

पांच अन्य लापता मछुआरों की तलाश जारी, पलटी हुई नाव को भी बाहर निकालने के इंतजाम

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता इस समय बाकी बचे पांच लापता मछुआरों को सुरक्षित ढूंढना या उनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी हासिल करना है। कलेक्टर पी. राजा बाबू ने आश्वस्त किया है कि तटरक्षक बल, मरीन पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांचों लापता मछुआरों की तलाश का अभियान पूरी मुस्तैदी के साथ जारी रहेगा। इसके अलावा, समंदर में पलटी हुई उस क्षतिग्रस्त नाव को भी खींचकर सुरक्षित तट पर लाने के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बरामद किए गए सभी शवों को सम्मान के साथ तमिलनाडु के अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा, ताकि वे उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचा सकें। इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने भी आंध्र प्रदेश में अपने अधिकारियों की टीम भेजकर राहत कार्यों में पूरा सहयोग देने का ऐलान किया है।

नेल्लोर और नरसपुर के बीच ओंगोल के पास तट से टकराया था ‘मुरसु’ चक्रवात

गौरतलब है कि मंगलवार तड़के ‘मुरसु’ (Murasu) नाम के इस भीषण चक्रवाती तूफान ने दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया था। इस चक्रवात ने नेल्लोर और नरसपुर के बीच, विशेष रूप से ओंगोल (Ongole) के पास के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और समंदर की उफनती लहरों ने तटीय इलाकों में खड़े पेड़ों, बिजली के खंभों और मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम विभाग और सरकार की तमाम चेतावनियों के बावजूद समुद्र के भीतर हुई यह अनहोनी एक बार फिर यह साबित करती है कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने एक बार फिर सभी तटीय इलाकों के नागरिकों और मछुआरों से अपील की है कि वे मौसम पूरी तरह से सामान्य होने तक समुद्र की ओर जाने का कोई जोखिम न उठाएं।

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