क्रिकेट जगत में शोक की लहर, महानतम ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स का निधन; सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर हुए बेहद भावुक

क्रिकेट इतिहास के सबसे महान और बेजोड़ ऑलराउंडर माने जाने वाले वेस्टइंडीज के दिग्गज सर गारफील्ड सोबर्स (Sir Garfield Sobers) का शुक्रवार को बारबाडोस में 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे महज 11 दिन बाद अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे डेनियल ने की। इस दुखद खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े दिग्गजों, ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर ने सर गैरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें बेहद भावुक श्रद्धांजलि दी है।

सचिन तेंदुलकर ने याद की ‘आखिरी मुलाकात’

सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सर गैरी के साथ अपनी यादों को साझा करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट लिखा। सचिन ने कहा, “यह स्वीकार करना वास्तव में कठिन है कि सर गैरी अब हमारे बीच नहीं हैं। 2003 विश्व कप में उनके हाथों ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का अवॉर्ड लेने से लेकर, मेरे शतक पूरा करने पर उनके द्वारा सम्मानित किए जाने और बधाई देते हुए कहे गए उनके गर्मजोशी भरे शब्द मुझे हमेशा याद रहेंगे। वे बेहद विनम्र और दयालु इंसान थे। कुछ साल पहले लंदन में हमारी जो मुलाकात हुई थी, वही हमारी आखिरी मुलाकात साबित होगी, यह अहसास मुझे गहराई से परेशान कर रहा है। वह सचमुच अद्वितीय थे।”

सुनील गावस्कर बोले- ‘क्रिकेट के इतिहास का सबसे दुखद दिन’

दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सर गारफील्ड सोबर्स के निधन को क्रिकेट के लिए सबसे काला और दुखद दिन बताया है। गावस्कर ने भावुक होते हुए कहा, “इस धरती के सबसे महान क्रिकेटर ने आज हमसे विदा ले ली। कोई भी शब्द सर गारफील्ड सोबर्स की महानता को बयां नहीं कर सकता। जब हम बचपन में पहली बार बल्ला या गेंद थामते थे, तो हम सिर्फ और सिर्फ उनके जैसा बनने का सपना देखते थे। उनसे जुड़ी तमाम यादें मेरे जेहन में घूम रही हैं और हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेंगी।”

ऐसा रहा सर गैरी सोबर्स का बेमिसाल करियर

36 जुलाई 1936 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सर गैरी सोबर्स ने मार्च 1954 से अप्रैल 1974 के बीच वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 57.78 की अविश्वसनीय औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल थे। एक गेंदबाज के रूप में भी उन्होंने अपनी फिरकी और तेज गेंदबाजी के मिश्रण से 235 टेस्ट विकेट चटकाए। अपनी अद्वितीय ऑलराउंड क्षमता, शानदार कप्तानी और मैदान पर असाधारण खेल कौशल के कारण उनका नाम क्रिकेट इतिहास के सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनके जाने से एक ऐसी महान विरासत का अंत हो गया है जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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