अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बड़ा झटका देते हुए भारत समेत अपने 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नया टैरिफ (आयात शुल्क) बम फोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले झटके और कानूनी अड़चनों के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301) का इस्तेमाल करते हुए 10 फीसदी से लेकर 12.5 फीसदी तक का नया टैरिफ लागू कर दिया है।
यह नया शुल्क शुक्रवार रात (ईस्टर्न टाइम 12:01 AM) से प्रभावी हो चुका है। अमेरिका ने इसका मुख्य कारण वैश्विक सप्लाई चेन में ‘फोर्स्ड लेबर’ (जबरन मजदूरी) के इस्तेमाल को रोकने में नाकाम रहना बताया है।
भारत पर कितना लगेगा टैक्स और क्यों मिला 10% का ब्रैकेट?
अमेरिका ने प्रभावित 60 देशों को दो मुख्य टैरिफ स्लैब—10% और 12.5% में बांटा है:
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भारत को राहत (10% श्रेणी): अमेरिकी ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) जेमीसन ग्रीर के अनुसार, शुरुआती योजना में भारत पर 12.5% का भारी शुल्क लगाने की बात थी। हालांकि, भारत सरकार द्वारा जून में विदेशी व्यापार नीति (FTP) में संशोधन कर ‘जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध’ लगाने के कदम के बाद अमेरिका ने भारत को 10% वाली निचली श्रेणी में रखा है।
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10% स्लैब वाले प्रमुख देश: भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, मेक्सिको, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान को भी 10% शुल्क के दायरे में रखा गया है।
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12.5% स्लैब वाले देश: चीन, जापान, ब्राजील, वियतनाम, तुर्की और दक्षिण अफ्रीका जैसे 43 देशों पर 12.5% का उच्च टैरिफ लागू किया गया है, क्योंकि अमेरिका का मानना है कि इन देशों में कठोर नियमों का अभाव है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रंप का ‘धारा 301’ वाला रास्ता
फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ (Liberation Day Tariffs) को खारिज कर दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक व्यापार पर अस्थाई 10% शुल्क लगाया था जिसकी मियाद गुरुवार आधी रात को खत्म हो गई।
अब इसके विकल्प के रूप में ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का प्रयोग किया है, जिसका उपयोग ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन के खिलाफ किया था। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस नए कानूनी ढांचे को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
भारतीय निर्यात और उद्योगों पर प्रभाव
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इस नए 10% अतिरिक्त शुल्क का असर भारतीय निर्यातकों पर मिश्रित रहेगा:
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रत्न-आभूषण और टेक्सटाइल: जेम्स एंड ज्वैलरी, कपड़े, चमड़ा, रसायन और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यातकों का मानना है कि इस शुल्क से मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा।
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प्रतियोगी बढ़त: चूंकि चीन (12.5%), वियतनाम (12.5%) और तुर्की जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों पर 12.5% शुल्क लगा है, इसलिए भारतीय सामान प्रतिस्पर्धियों की तुलना में थोड़ा सस्ता रहेगा।
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छूट की श्रेणी: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन कच्चे माल की अमेरिका में कमी है या जिनसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में व्यवधान आ सकता है (लगभग 1,600 क्रिटिकल आइटम्स), उन्हें इस टैरिफ से छूट दी गई है।
भारत सरकार ने इस टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अमेरिकी पक्ष के साथ लगातार द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Talks) में शामिल है ताकि भारतीय उद्योग के हितों की रक्षा की जा सके।
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