
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक समरसता और किसान कल्याण को गति देने के लिए विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश कर दिया है। इस अनुपूरक बजट में राज्य के अलग-अलग विकास कार्यों, प्रशासनिक भवनों के निर्माण, ग्रामीण जलापूर्ति, सामाजिक कल्याण योजनाओं और कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक तक बेहतर प्रशासनिक सेवाएं पहुंचाना और राज्य के भौगोलिक क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को समान रूप से आगे बढ़ाना है। इस बजट के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे आम जनता और सरकारी तंत्र दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
संभल के बहजोई और वाराणसी में बनेंगे अत्याधुनिक समेकित कलेक्ट्रेट भवन
योगी सरकार के इस नए अनुपूरक बजट की सबसे बड़ी खासियतों में से एक राज्य के प्रशासनिक मुख्यालयों का आधुनिकीकरण है। इसके तहत प्रशासनिक मुख्यालय बहजोई (संभल) और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में नए समेकित कलेक्ट्रेट भवन (Integrated Collectorate Buildings) का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट में 140.65 करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित की है। इन नए भवनों के बनने से प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और तेजी आएगी। इसके साथ ही, जिला स्तर पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को एक आधुनिक और बेहतर कार्यस्थल मिल सकेगा, जिससे वे जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर सकेंगे। स्थानीय नागरिकों को भी सरकारी सेवाओं और प्रमाण पत्रों के लिए अब कार्यालयों के चक्कर कम काटने पड़ेंगे क्योंकि एक ही परिसर में तमाम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
राजस्व विभाग और प्रशासनिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए भारी-भरकम राशि
राजस्व प्रशासन के बुनियादी ढांचे को अधिक मजबूत और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों में प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व विभाग के लिए कुल 1014.11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को तुरंत अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य आपदा मोचक निधि (SDMF) के वास्ते 739 करोड़ रुपये की बड़ी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सरकार ने केवल बड़े शहरों तक ही सीमित न रहकर, प्रदेश के सभी मंडलों, जिलों और तहसीलों के स्तर पर आवासीय भवनों के नवनिर्माण, विस्तार, पुनर्निर्माण और उनके सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए संभल के बहजोई में इंटीग्रेटेड आवासों के निर्माण के साथ-साथ पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए आवास व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु 85 करोड़ रुपये की एकमुश्त बजट व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इस पहल से दूरदराज के तहसीलों और जिलों में तैनात अमले को रहने और काम करने की बेहतरीन सहूलियतें मिलेंगी।
भू-जल संरक्षण और जागरूकता के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान
पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निपटने की दिशा में योगी सरकार ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। अनुपूरक बजट के माध्यम से नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अंतर्गत आने वाले लघु सिंचाई विभाग के भू-जल जन जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार योजना के लिए 1.475 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रस्तावित की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों को भू-जल (Groundwater) के अत्यधिक दोहन के खतरों के प्रति सचेत करना, इसके संरक्षण के तरीकों के बारे में बताना और इसके बेहतर व विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना है। आज के समय में जब जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, इस प्रकार के जागरूकता अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में जल संचयन (Water Harvesting) की संस्कृति को बढ़ावा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सामाजिक समरसता और महापुरुषों की विरासत का संरक्षण: अंबेडकर मूर्ति विकास योजना
सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज के निर्माण को अपनी प्राथमिकता बताते हुए योगी सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृतियों के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। अनुपूरक बजट में ‘डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ के लिए 407 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि प्रस्तावित की गई है। इस धन का उपयोग महान महापुरुषों की विरासतों के संरक्षण, मूर्तियों के विकास और सामाजिक समरसता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को गति देने के लिए किया जाएगा। संपूर्ण समाज कल्याण विभाग के लिए अनुपूरक बजट में 1655 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसमें सामान्य वर्ग दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति एवं छात्रवृत्ति योजना के लिए 155 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री मेधावी अनुसूचित जाति एवं जनजाति उच्च शिक्षा सहायता योजना के लिए 2 करोड़ रुपये की विशेष व्यवस्था शामिल है, जिससे प्रदेश के गरीब और मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक मदद मिल सकेगी।
किसानों के लिए बड़ी राहत: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को एक साल का विस्तार
कृषि और कृषक कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में संचालित ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत किसानों को सेवाएं दे रही बीमा कंपनियों को अगले एक वर्ष तक के लिए सेवा विस्तार की आधिकारिक अनुमति प्रदान कर दी गई है। यह तीन वर्षीय फसल बीमा योजना मौजूदा खरीफ सीजन के साथ ही समाप्त होने वाली थी, लेकिन किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इसे अगले वर्ष रबी सीजन की समाप्ति तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस विस्तार से प्रदेश के लाखों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, बेमौसम बारिश या सूखे के कारण फसल नुकसान होने की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा मिलती रहेगी, जिससे अन्नदाताओं का आर्थिक जोखिम कम होगा और वे कृषि कार्यों में पूरी तरह निश्चिंत होकर जुट सकेंगे।
इस प्रकार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत यह अनुपूरक बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह राज्य के संतुलित विकास, प्रशासनिक सुधार, ग्रामीण समृद्धि, सामाजिक उत्थान और किसान कल्याण की एक स्पष्ट और मजबूत रूपरेखा प्रस्तुत करता है। संभल और वाराणसी जैसे क्षेत्रों में नए कलेक्ट्रेट भवनों के निर्माण से लेकर भू-जल संरक्षण, सामाजिक कल्याण योजनाओं और फसल बीमा के विस्तार तक, हर एक कदम प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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