बदल रहा है केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख: पहले मेडिकल कॉलेज से लेकर हाईकोर्ट बेंच तक, 7 वर्षों में विकास के ऐतिहासिक माइलस्टोन किए पार

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आए लद्दाख ने पिछले सात वर्षों में विकास, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक स्वायत्तता के मोर्चे पर ऐतिहासिक छलांग लगाई है। कभी सर्दियों के छह महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कटे रहने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझने वाला यह रणनीतिक सीमावर्ती भूभाग आज आधुनिक कनेक्टिविटी, उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं, न्यायिक पहुंच और सौर ऊर्जा क्रांति का नया केंद्र बन चुका है। केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष समन्वय और उपराज्यपाल प्रशासन के नेतृत्व में लद्दाख के दोनों जिलों—लेह और करगिल—में शुरू की गई बहुआयामी योजनाओं ने स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। लेह में स्थापित हो रहे क्षेत्र के पहले मेडिकल कॉलेज से लेकर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की वर्चुअल बेंच और रणनीतिक जोजिला टनल तक, लद्दाख ने विकास के वे मील के पत्थर हासिल किए हैं जिनकी दशकों से प्रतीक्षा थी।

लद्दाख के दूरदराज और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए गंभीर बीमारियों का इलाज हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा था। किसी भी जटिल सर्जरी, कैंसर उपचार या हृदय रोग के लिए स्थानीय लोगों को हवाई मार्ग से चंडीगढ़, श्रीनगर या दिल्ली का रुख करना पड़ता था, जो आर्थिक रूप से बेहद महंगा साबित होता था।

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद केंद्र सरकार ने लेह के एसएनएम अस्पताल (SNM Hospital Leh) को अपग्रेड करते हुए लद्दाख के पहले ‘सरकारी मेडिकल कॉलेज’ की स्थापना को मंजूरी दी। सैकड़ों करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी ब्लॉक, क्रिटिकल केयर यूनिट्स (CCU), उन्नत डायग्नोस्टिक लैब और 100 एमबीबीएस सीटों वाले मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से पूरा किया गया है। इसके साथ ही टेली-मेडिसिन सेवाओं के माध्यम से सुदूरवर्ती चांगथांग और जांस्कर घाटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को सीधे बड़े अस्पतालों से जोड़ दिया गया है, जिससे आपात स्थिति में स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ उपचार संभव हो सका है।

पहले लद्दाख के नागरिकों और अधिवक्ताओं को न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए श्रीनगर या जम्मू स्थित उच्च न्यायालय जाना पड़ता था, जिससे भारी समय और धन का अपव्यय होता था। न्यायिक प्रणाली को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की विशेष वर्चुअल बेंच और सर्किट बेंच की व्यवस्था लेह और करगिल में सक्रिय की गई।

अब हाई-स्पीड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-कोर्ट प्रणाली के जरिए लद्दाख के वकील और वादी सीधे अपने गृह जिले से ही मामलों की पैरवी कर रहे हैं। इसके अलावा, दोनों स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (LAHDC Leh और LAHDC Kargil) को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से अधिक सशक्त बनाया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर बजट आवंटन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में नौकरशाही की देरी खत्म हुई है।

लद्दाख के सामरिक और आर्थिक विकास की सबसे बड़ी रीढ़ उसकी ऑल-वेदर कनेक्टिविटी है। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के चलते श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग महीनों तक बंद रहता था, जिससे रसद और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो जाती थी।

  • जोजिला सुरंग परियोजना: एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशात्मक (Bi-directional) टनल में शामिल 14.15 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल का निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है। इस टनल के चालू होने से श्रीनगर से लद्दाख के बीच साल के 365 दिन निर्बाध आवागमन सुनिश्चित होगा और यात्रा का समय 3 से 4 घंटे घट जाएगा।

  • बीआरओ का रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: सीमा सड़क संगठन (BRO) ने शिंकुन ला टनल, उमलिंग ला (दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क) और कई नए रणनीतिक कॉरिडोर विकसित कर सीमावर्ती सुरक्षा और नागरिक आवाजाही को अभूतपूर्व मजबूती दी है।

  • लेह एयरपोर्ट का नया टर्मिनल: लेह के कुशोक बकुला रिम्पोचे (KBR) हवाई अड्डे पर आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और अधिक यात्री क्षमता वाले नए एकीकृत टर्मिनल भवन का निर्माण पूरा किया गया है, जिससे लद्दाख में सालभर पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रधानमंत्री के ‘कार्बन न्यूट्रल लद्दाख’ के संकल्प के तहत पंग (Pang) और आसपास के ऊंचे रेगिस्तानी पठारों पर 13 गीगावाट (GW) की विशाल अक्षय ऊर्जा परियोजना पर काम चल रहा है। लद्दाख में सौर विकिरण (Solar Irradiance) देश में सबसे अधिक है, जिसका उपयोग करके न केवल स्थानीय बिजली जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, बल्कि 5 गीगावाट की ट्रांसमिशन लाइन के जरिए अधिशेष हरित बिजली को देश के उत्तरी ग्रिड में भेजने का खाका तैयार है। इसके साथ ही, सर्दियों में पानी जमने की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक इन्सुलेटेड पाइपलाइन और ‘जल जीवन मिशन’ के तहत शून्य से 30 डिग्री नीचे तापमान में भी घरों तक नल से जल पहुंचाने का जटिल कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ‘सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय’ (Sindhu Central University) की स्थापना ने स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में उच्च व तकनीकी शिक्षा हासिल करने का अवसर दिया है। पश्मीना ऊन, खुबानी (लद्दाखी रकतसे कारपो एप्रिकॉट जिसे जीआई टैग मिला है) और सी-बकथॉर्न जैसे स्थानीय उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स और वैल्यू चेन बनाकर स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है।

लद्दाख का यह सात वर्षों का सफर दर्शाता है कि सही नीति, प्रत्यक्ष बजट आवंटन और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के दम पर भौगोलिक चुनौतियों से घिरे सबसे दुर्गम क्षेत्र को भी विकास की मुख्यधारा का नेतृत्वकर्ता बनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में पूर्ण कनेक्टिविटी और औद्योगिक ईको-सिस्टम के साथ लद्दाख आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के नए शिखर छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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