राजनीतिक संवाददाता: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। पिछले महीने राज्यसभा और टीएमसी से इस्तीफा देने वाले पार्टी के तीन पूर्व सांसद— सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बड़ाईक ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में तीनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। भट्टाचार्य ने तीनों दिग्गजों को भाजपा का झंडा थमाकर और पट्टा पहनाकर पार्टी में उनका स्वागत किया।
चुनावों में हार के बाद बदला रुख, 24 जुलाई को उपचुनाव
हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद इन तीनों नेताओं ने पिछले महीने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश बड़ाईक का राज्यसभा कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था। इनके इस्तीफे से खाली हुई इन तीन राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं, जहां अब समीकरण पूरी तरह भाजपा के पक्ष में झुक चुके हैं।
विधानसभा का नया समीकरण: दो धड़ों में बंटी टीएमसी
साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद सूबे का सियासी भूगोल पूरी तरह बदल चुका है। 294 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा 208 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जबकि सत्ता से बेदखल हुई टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई। मौजूदा समय में कुछ इस्तीफों के बाद भाजपा के पास 207 विधायक हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी अब दो खेमों में पूरी तरह टूट चुकी है। एक खेमा ममता बनर्जी का है, तो दूसरा धड़ा विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी का है। मौजूदा स्थिति के मुताबिक, टीएमसी के 80 विधायकों में से लगभग 65 विधायक ऋतब्रत खेमे के साथ जा चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी के पास सिर्फ 15 विधायकों का ही समर्थन बचा है।
तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप की तैयारी में भाजपा
राज्यसभा उपचुनाव के गणित के अनुसार, 294 सदस्यीय सदन में किसी भी उम्मीदवार को सीधे जीत दर्ज करने के लिए लगभग 70 ‘फर्स्ट-प्रेफरेंस’ वोटों की आवश्यकता होगी। भाजपा के पास अपने 207 विधायक होने के कारण वह आसानी से अपने वोटों को तीन हिस्सों में विभाजित कर (लगभग 69-69 वोट) तीनों उम्मीदवारों को जिता सकती है। वहीं, टीएमसी का कोई भी गुट (ममता या ऋतब्रत) अकेले अपने दम पर संख्या बल न होने के कारण एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि भाजपा इन तीनों नए शामिल हुए नेताओं को ही आगामी 24 जुलाई के उपचुनाव में दोबारा राज्यसभा भेज सकती है।
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