
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस पवित्र महीने में देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना का विशेष विधान है। शिव भक्तों के लिए रुद्राक्ष महज एक आभूषण या मोती नहीं है, बल्कि यह साक्षात भगवान शंकर का आशीर्वाद है। धार्मिक मान्यताओं और शिव महापुराण के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। यही कारण है कि इसे धारण करने वाले व्यक्ति के जीवन से बड़े-बड़े पापों का नाश हो जाता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आज के समय में युवा वर्ग और दुनिया भर के आध्यात्मिक साधक रुद्राक्ष के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व को जानने के लिए इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुद्राक्ष धारण करने के कुछ बेहद सख्त नियम हैं? यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है।
शिव महापुराण में छिपा है रुद्राक्ष के आकार का सबसे बड़ा रहस्य
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि किस आकार का रुद्राक्ष पहनना सबसे ज्यादा फलदायी होता है? जियोग्राफिकल (Geographical) और स्थानीय बाजारों में आपको कई तरह के रुद्राक्ष मिल जाएंगे, लेकिन शिव महापुराण में इसके आकार को लेकर बहुत ही स्पष्ट और वैज्ञानिक बात कही गई है। ग्रंथों के अनुसार, रुद्राक्ष को उसके छोटे या बड़े होने के आधार पर उत्तम माना गया है।
जो रुद्राक्ष बेर के फल के आकार के बराबर होता है, वह लोक में उत्तम फल देने वाला और जीवन में सुख-सौभाग्य की अपार वृद्धि करने वाला माना गया है। वहीं, शिव महापुराण यह भी स्पष्ट करता है कि जो रुद्राक्ष आंवले के फल के बराबर होता है, वह मनुष्य के जीवन में आने वाले समस्त विघ्नों और संकटों का पूरी तरह से विनाश करने वाला होता है। सबसे रोचक और ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि रुद्राक्ष का आकार जैसे-जैसे छोटा होता जाता है, उसका प्रभाव और फल देने की क्षमता वैसे-वैसे अधिक शक्तिशाली होती जाती है। यानी छोटे दाने वाला रुद्राक्ष आध्यात्मिक और भौतिक, दोनों दृष्टियों से अत्यधिक मूल्यवान और ऊर्जावान माना जाता है।
रुद्राक्ष धारण करने वालों के लिए सख्त नियम: भूलकर भी ना खाएं ये चीजें
यदि आपने अपने गले, कलाई या शरीर के किसी भी अंग पर रुद्राक्ष धारण किया है, तो आपको अपनी जीवनशैली और खान-पान में व्यापक बदलाव करने होंगे। रुद्राक्ष एक अत्यंत पवित्र और सात्विक ऊर्जा का स्रोत है। शिव महापुराण के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
अगर आपने रुद्राक्ष पहना है, तो आपको भूलकर भी मदिरा (शराब) का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही मांस का भक्षण भी पूरी तरह से वर्जित है। केवल मांसाहार ही नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट सब्जियों और पौधों के सेवन पर भी सख्त पाबंदी लगाई गई है। रुद्राक्ष पहनने वाले को लहसुन, प्याज, सहिजन (ड्रमस्टिक) और लिसोड़ा आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इन चीजों को तामसिक प्रवृत्ति का माना जाता है, जो शरीर में अशुद्ध ऊर्जा पैदा करती हैं और रुद्राक्ष की सकारात्मक एवं दिव्य ऊर्जा को नष्ट कर देती हैं। इसलिए, यदि आप शिव की सच्ची कृपा पाना चाहते हैं, तो इन कठोर नियमों का पालन करना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
उत्तम कोटि का रुद्राक्ष कैसा होता है? जानिए सही पहचान का तरीका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्राकृतिक रूप से परिपूर्ण चीजें सबसे अधिक ऊर्जा उत्सर्जित करती हैं। शिव पुराण के अनुसार, आपकी कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राक्ष का सही आकार-प्रकार होना बहुत जरूरी है।
बाजार से रुद्राक्ष खरीदते समय ध्यान रखें कि दाने समान आकार के हों। वे चिकने, सुदृढ़ (मजबूत), स्थूल और कण्टकयुक्त होने चाहिए। कण्टकयुक्त का अर्थ है कि रुद्राक्ष के ऊपर प्राकृतिक रूप से उभरे हुए छोटे-छोटे दाने या धारियां स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। ऐसे सुंदर और सुडौल रुद्राक्ष को ही भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाला बताया गया है।
रुद्राक्ष की गुणवत्ता को लेकर एक और बहुत बड़ा रहस्य यह है कि जिस रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से (अपने आप ही) डोरा या धागा पिरोने के योग्य छेद हो गया हो, उसे सबसे उत्तम और सर्वोच्च कोटि का रुद्राक्ष माना जाता है। इसके विपरीत, जिस रुद्राक्ष में मनुष्य द्वारा मशीन या किसी अन्य उपकरण के प्रयास से छेद किया जाता है, उसे मध्यम श्रेणी का कहा जाता है। इसलिए रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसके छेद और उसकी बनावट का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए।
सावधान! भूलकर भी धारण ना करें ऐसा दूषित और खण्डित रुद्राक्ष
जैसे सही रुद्राक्ष जीवन संवार सकता है, वैसे ही गलत या दूषित रुद्राक्ष जीवन में नकारात्मकता ला सकता है। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन सा रुद्राक्ष बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए।
शिव महापुराण स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है कि जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने खा लिया हो या दूषित कर दिया हो, उसे कभी धारण नहीं करना चाहिए। जो रुद्राक्ष खण्डित (टूटा हुआ) हो, चटका हुआ हो, या जिसमें प्राकृतिक रूप से उभरे हुए दाने (कण्टक) न हों, वह अशुद्ध माना जाता है। इसके अलावा, जो रुद्राक्ष ब्रणयुक्त (घाव या दाग वाला) हो और जो आकार में पूरा-पूरा गोल न हो (यानी चपटा या बेडौल हो), ऐसे रुद्राक्षों को तुरंत त्याग देना चाहिए। रुद्राक्ष का चयन करते समय बहुत सोच-विचार और किसी अनुभवी ज्योतिषी या जानकार की सलाह लेना आवश्यक है।
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