चेन्नई/तमिलनाडु: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस ने अपने पुराने गठबंधन साथी DMK का साथ छोड़कर सुपरस्टार विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है। इस अप्रत्याशित ‘दलबदल’ पर डीएमके की वरिष्ठ नेता कनिमोझी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने बेहद परिपक्व और लोकतांत्रिक रुख अपनाया है।
कनिमोझी का बयान: “राजनीति में फैसले लेने का सबको हक है”
जब कनिमोझी से कांग्रेस के अचानक पाला बदलने और विजय के खेमे में जाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई तीखा हमला करने के बजाय कहा:
“किसी भी दल के पास वह करने का अधिकार है, जिसे वह सही समझता है। हमने कई चुनाव एक साथ मिलकर जीते हैं और इस बार हम साथ लड़े लेकिन हार गए। मैं किसी और के फैसले पर टिप्पणी नहीं करना चाहती, लेकिन हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”
जब उनसे कांग्रेस द्वारा ‘सेकुलरिज्म’ (धर्मनिरपेक्षता) के नाम पर TVK को समर्थन देने पर सवाल हुआ, तो कनिमोझी ने कहा, “यदि TVK एक नया सेकुलर दल बनकर उभर रहा है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ऐसे दलों का राजनीति में स्वागत होना चाहिए।”
विजय का गणित: छोटे दलों के सहारे ‘फुल पावर’ की तैयारी
तमिलनाडु में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। विजय की पार्टी TVK का संख्या बल इस प्रकार है:
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TVK की सीटें: 108 (प्रभावी संख्या 107 होगी क्योंकि विजय एक सीट छोड़ेंगे)।
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कांग्रेस का साथ: 5 सीटें।
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अन्य संभावित साथी: वीसीके (2), सीपीआई (2) और सीपीएम (2)।
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कुल जादुई आंकड़ा: 107 + 5 + 2 + 2 + 2 = 118।
विजय की रणनीति स्पष्ट है कि वे AIADMK जैसे बड़े दल का समर्थन लेने के बजाय छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते हैं, ताकि प्रशासन पर उनका पूरा नियंत्रण (Full Power) बना रहे और किसी बड़े सहयोगी का दबाव न हो।
DMK के लिए बड़ा झटका, लेकिन विचारधारा पर अडिग
डीएमके के लिए कांग्रेस का अलग होना एक बड़ा झटका है, क्योंकि एमके स्टालिन के नेतृत्व में यह गठबंधन काफी मजबूत माना जाता था। कनिमोझी ने जोर देकर कहा कि स्टालिन हमेशा गठबंधन के साथियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं और उनका गठबंधन केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक रहा है।
2024 में गठित हुई TVK ने महज दो साल में तमिलनाडु की सत्ता के करीब पहुंचकर एक नया इतिहास रच दिया है। अब देखना यह है कि रील लाइफ के ‘थलापति’ रियल लाइफ के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य को किस दिशा में ले जाते हैं।
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