कानूनी संवाददाता: देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे अवैध निर्माण (Illegal Construction) और उसके कारण होने वाले दर्दनाक हादसों को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। हाल ही में दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में हुए भीषण अग्निकांड और इमारतों के ढहने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन केवल ‘कुछ खास चेहरों’ को बचाने के लिए बिल्डरों को गिरफ्तार कर अपना पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन उन भ्रष्ट अफसरों पर कोई आंच नहीं आती जिनकी नाक के नीचे यह सब खेल चलता है।
इन 5 शहरों के नगर निकायों के अफसरों को तगड़ा अल्टीमेटम
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निकायों के आला अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने इन सभी संबंधित अफसरों को सख्त निर्देश दिया है कि वे 4 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से (Physically) हाजिर रहें। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अब सिर्फ कागजी कार्रवाई और खोखले दावों से काम नहीं चलेगा, अफसरों को जमीन पर की गई ठोस कार्रवाई का ब्योरा देना होगा।
अवमानना की कार्रवाई और सीधे CEO-कमिश्नर होंगे जिम्मेदार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साकेत में बिल्डिंग ढहने और मालवीय नगर व लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांडों का विशेष रूप से जिक्र किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली रिपोर्ट में उन सभी सीनियर अधिकारियों के नाम उजागर किए जाएं जो अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह फेल रहे हैं। कोर्ट ने अल्टीमेटम देते हुए कहा, “अगर अगली तारीख तक कोई ठोस एक्शन प्लान नहीं दिखता है, तो सीधा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या कमिश्नर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।” आदेश का पालन न होने की स्थिति में कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दी है।
गुरुग्राम की 93% बिल्डिंग्स में फायर सेफ्टी फेल, ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट पर संज्ञान
अदालत ने गुरुग्राम विकास प्राधिकरण (GDA) के मुख्य कार्यकारी प्रमुख को भी समन जारी कर कोर्ट में तलब किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के दिल्ली एडिशन में छपी एक चौंकाने वाली खोजी रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि गुरुग्राम की लगभग 93% (93 प्रतिशत) इमारतें फायर सेफ्टी नियमों का पालन करने में पूरी तरह फेल रही हैं। इस गंभीर लापरवाही पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की।
दिल्ली के संवेदनशील इलाकों की जांच के लिए IIT प्रोफेसर्स की स्पेशल टीम
राजधानी दिल्ली में साकेत, मालवीय नगर, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर जैसे भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों की जमीनी हकीकत जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष उच्च स्तरीय टीम के गठन का निर्देश दिया है। इस टीम में आईआईटी (IIT) दिल्ली के दो सीनियर प्रोफेसर और दो ड्राफ्ट्समैन शामिल होंगे, जो दिल्ली नगर निगम (MCD) और एनडीएमसी (NDMC) के अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी सर्वे करेंगे। बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि कमेटी को पूरी ईमानदारी से अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। यदि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की हेरफेर या शक की गुंजाइश पाई गई, तो सुप्रीम कोर्ट खुद अपनी विशेष टीम भेजकर इसकी दोबारा सच्चाई की जांच कराएगा।
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