
नई दिल्ली। देश में बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा अलर्ट जारी हुआ है। इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (NFI 2026) ने साफ निर्देश दिए हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ और कोल्ड सिरप बिल्कुल नहीं दिया जाना चाहिए। यह सिर्फ सलाह नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के आधार पर तैयार की गई गाइडलाइन है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
क्या कहती है नई गाइडलाइन?
NFI 2026 के ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 2 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप न तो प्रिस्क्राइब किया जाए और न ही दिया जाए। इतना ही नहीं, 5 साल तक के बच्चों में भी इन दवाओं के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है, जब तक कि बेहद जरूरी न हो।
यह गाइडलाइन देशभर में डॉक्टरों, फार्मासिस्ट और पैरेंट्स के लिए एक अहम रेफरेंस मानी जाती है, जो दवाओं के सुरक्षित उपयोग का मानक तय करती है।
क्यों खतरनाक हैं छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप?
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों का शरीर बेहद संवेदनशील होता है। कफ सिरप में मौजूद दवाएं उनके शरीर पर गंभीर असर डाल सकती हैं। इनमें शामिल हैं—
- सांस लेने में परेशानी
- अत्यधिक नींद या सुस्ती
- दिल की धड़कन पर असर
गाइडलाइन के मुताबिक, इन दवाओं का फायदा बेहद सीमित है, जबकि जोखिम कई गुना ज्यादा है। यही वजह है कि इस उम्र के बच्चों के लिए कोई सुरक्षित डोज भी तय नहीं की गई है।
खांसी को दबाना क्यों सही नहीं?
NFI 2026 के अनुसार, खांसी कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र है। यह सांस की नली में मौजूद धूल, बलगम और हानिकारक कणों को बाहर निकालने में मदद करती है। ऐसे में हर खांसी को दवा से दबाना जरूरी नहीं होता।
किन दवाओं पर सबसे ज्यादा चिंता?
फॉर्मुलरी में खासतौर पर कोडीन और डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन जैसे कफ सप्रेसेंट्स का जिक्र किया गया है।
- कोडीन: केवल 12 साल से ऊपर के बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित
- डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन: 2 साल से कम उम्र के बच्चों में पूरी तरह से प्रतिबंधित
इससे साफ है कि छोटे बच्चों के लिए ये दवाएं जोखिम भरी मानी गई हैं।
पिछली घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल के वर्षों में कफ सिरप से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें मिलावटी दवाओं के कारण बच्चों की मौत तक हो चुकी है। इसके बाद ही दवा सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई गई और नई गाइडलाइन लाई गई।
पैरेंट्स के लिए जरूरी सलाह
अगर छोटे बच्चे को खांसी हो तो घबराने के बजाय ये उपाय अपनाएं—
- बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ दें
- कमरे में नमी बनाए रखें
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें
जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
निष्कर्ष
NFI 2026 की गाइडलाइन साफ संकेत देती है कि बच्चों की सेहत के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। खासकर दो साल से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप का इस्तेमाल पूरी तरह से टालना ही सुरक्षित है।
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