जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अभिन्न हिस्सों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को लेकर भारत सरकार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के भारतीय क्षेत्रों में आने वाले “गिलगित-बाल्टिस्तान” में पाकिस्तान सरकार द्वारा आगामी रविवार (7 जून) को तथाकथित ‘विधानसभा चुनाव’ कराने की घोषणा पर भारत ने तीव्र आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA) ने शुक्रवार (5 जून) को एक बेहद कड़ा और आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान को दो टूक लहजे में फटकार लगाई है। भारत ने पड़ोसी देश को चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि वह भारतीय सरजमीं पर लोकतंत्र का ढोंग रचना बंद करे, क्योंकि यह पूरा इलाका भारत का अटूट हिस्सा है और पाकिस्तान को इसे हर हाल में खाली करना ही होगा।
1947 का विलय पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय है— विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की इस हिमाकत पर अपना पुराना और संवैधानिक रुख दोहराते हुए स्पष्ट किया कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का है। बयान में कहा गया:
“साल 1947 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा द्वारा भारत में किए गए पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय (Complete, Legal and Irreversible Accession) के परिणामस्वरूप तथाकथित ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ सहित जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और हमेशा रहेंगे। इस संप्रभु सत्य को बदला नहीं जा सकता।”
नई दिल्ली ने कड़े शब्दों में जोर देकर कहा कि पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में चुनाव कराने या किसी भी प्रकार का भौतिक अथवा जनसांख्यिकीय बदलाव लाने का कोई भी प्रयास पूरी तरह से अवैध और अमान्य है। भारत ऐसे किसी भी कदम को सिरे से खारिज करता है।
चुनाव के जरिए मानवाधिकारों के हनन को छिपा नहीं सकता पाकिस्तान
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में रह रहे नागरिकों की बदहाली की ओर खींचते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के चुनावी ड्रामे रचकर पाकिस्तान वहां जमीनी स्तर पर हो रहे अत्याचारों को दुनिया की नजरों से छिपा नहीं सकता। पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले इन क्षेत्रों में आज ये असल और गंभीर मुद्दे हावी हैं:
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मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन: स्थानीय नागरिकों की आवाज को सेना के दम पर कुचला जा रहा है।
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राजनीतिक दमन: पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बोलने वाले स्थानीय नेताओं को जेलों में ठंसा जा रहा है।
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आर्थिक शोषण: इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने फायदे के लिए कर रहा है, जबकि यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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आजादी का अभाव: स्थानीय अवाम को किसी भी प्रकार की लोकतांत्रिक और मौलिक स्वतंत्रता हासिल नहीं है।
रविवार को होने हैं चुनाव, भारत ने दर्ज कराया कड़ा राजनयिक विरोध
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद ने आगामी रविवार यानी 7 जून 2026 को गिलगित-बाल्टिस्तान में नई ‘विधानसभा’ के गठन के लिए आम चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर ली है। पाकिस्तान की इसी योजना को भांपते हुए भारत सरकार ने पाकिस्तानी हुक्मरानों के सामने बेहद कड़ा और आधिकारिक राजनयिक विरोध (Diplomatic Protest) दर्ज कराया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान के अंत में बेहद सख्त लहजे में साफ कर दिया कि पाकिस्तान की कोई भी गीदड़भभकी या राजनीतिक पैंतरा इस अंतरराष्ट्रीय सच्चाई को कभी नहीं बदल सकता कि उसने भारतीय क्षेत्रों पर जबरन और गैर-कानूनी तरीके से कब्जा जमाया हुआ है। भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार या बातचीत का रास्ता तभी खुल सकता है जब पाकिस्तान इन कब्जाए गए क्षेत्रों को पूरी तरह से खाली कर दे।
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