एनसीपीआई सांसदों के पाला बदलने की अटकलों पर लगा विराम: दिल्ली में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ हुई बैठक, यूसुफ पठान समेत कई नेता रहे मौजूद

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए सांसदों के नए गुट को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। टीएमसी छोड़कर ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (NCPI) में शामिल हुए यूसुफ पठान और अबु ताहिर जैसे बड़े चेहरों को लेकर सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर कहीं कोई मतभेद या असंतोष नहीं है।

हाल ही में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि NCPI के कुछ सांसद एनडीए (NDA) के साथ काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं और वे वापस ममता बनर्जी के खेमे में लौट सकते हैं। हालांकि, मंगलवार (04 अगस्त 2026) को दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद इन सभी चर्चाओं को खारिज कर दिया गया।

सीएम के साथ लंच और नेताओं की प्रतिक्रिया

मंगलवार को दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और NCPI के तमाम सांसदों के बीच एक विशेष लंच मीटिंग हुई। इस बैठक में वे सभी सांसद भी मौजूद थे, जिनके पाला बदलने की चर्चाएं मीडिया में चल रही थीं। बैठक के बाद नेताओं ने अपने अनुभव साझा किए:

  • सुखेंदु शेखर रॉय: बीजेपी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने बैठक के बाद कहा कि यह महज एक शिष्टाचार भेंट थी और वह केवल सीएम से मिलने आए थे।

  • रचना बनर्जी: टीएमसी की बागी और NCPI सांसद रचना बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ यह मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि बैठक में क्षेत्र के विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और कई बहुमूल्य सलाह भी मिलीं।

बैठक के राजनीतिक मायने और आगे की रणनीति

विधानसभा चुनाव के ठीक बाद टीएमसी से बगावत कर अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI का दामन थाम था। ये सभी सांसद संसद के भीतर एनडीए सहयोगी के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि इस ग्रुप को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के अंतिम फैसले का इंतजार अभी भी बना हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक के बाद राज्य की बीजेपी नीत सरकार और NCPI सांसदों के बीच आपसी तालमेल और अधिक मजबूत होगा। यह समन्वय संसदीय रणनीति, संगठनात्मक मुद्दों और संबंधित लोकसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इससे पहले 8 जून को जब टीएमसी संसदीय दल में टूट हो रही थी, तब सुवेंदु अधिकारी ने इन बागी सांसदों से मुलाकात की थी। उसके बाद यह पहली बड़ी ठोस बैठक है, जिसने तमाम राजनीतिक कयासों पर पूरी तरह पूर्णविराम लगा दिया है।

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