
लद्दाख के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे जाने-माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गए हैं। लद्दाख के प्रमुख संगठनों—लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA)—के साथ मिलकर वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ लेह में एक महत्वपूर्ण बैठक की।
इस बैठक में लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगों की एक विस्तृत सूची पेश की और स्पष्ट कर दिया कि लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
पूर्ण वित्तीय अधिकारों से लैस केंद्र शासित विधानसभा की मांग
प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के समक्ष सीधे जनता द्वारा चुनी गई और वास्तविक शक्तियों से लैस केंद्र शासित प्रदेश (UT) स्तर की विधानसभा की मांग को सबसे प्रमुख और ‘नॉन-नेगोशिएबल’ (अटल) बताया। उनका तर्क है कि केवल प्रतीकात्मक विधानसभा से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे बजट निर्धारण, कराधान (Taxation), सार्वजनिक खर्च, कर्ज लेने और वित्तीय आवंटन के पूर्ण संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए।
इसके साथ ही लद्दाख के लिए संवैधानिक रूप से सुरक्षित समेकित निधि (Consolidated Fund) और आकस्मिक निधि (Contingency Fund) की भी मांग की गई है, ताकि स्थानीय निर्वाचित सरकार स्वतंत्र रूप से वित्तीय फैसले ले सके।
अलग लोक सेवा आयोग और लद्दाख-विशिष्ट कैडर
लद्दाख के युवाओं के भविष्य और स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए प्रतिनिधियों ने क्षेत्र के लिए एक अलग लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) के गठन का प्रस्ताव रखा है।
इसके तहत लद्दाख प्रशासनिक सेवा (LAS) और लद्दाख पुलिस सेवा (LPS) का गठन करने के साथ-साथ केंद्र से उपयुक्त लद्दाख-विशिष्ट प्रशासनिक कैडर तैयार करने की मांग की गई है। प्रतिनिधियों का मानना है कि भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों को समझने वाले अधिकारियों का होना बेहद जरूरी है।
व्यापार और नौकरियों के लिए लद्दाख रेजिडेंस सर्टिफिकेट (LRC) अनिवार्य करने की शर्त
स्थानीय जनसांख्यिकी और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए लद्दाख के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि किसी भी प्रकार की कारोबारी इकाई के पंजीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों की स्थापना और ट्रेड लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण के लिए वैध लद्दाख रेजिडेंस सर्टिफिकेट (LRC) को अनिवार्य बनाया जाए।
इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लाभों और सुरक्षा उपायों के तहत लद्दाख-विशिष्ट एसटी प्रमाणन को ही आधार मानने पर जोर दिया गया है, ताकि बाहरी दबावों से स्थानीय संसाधनों की रक्षा हो सके।
संवैधानिक समाधान तक अंतरिम सुरक्षा और न्याय की मांग
सोनम वांगचुक और अन्य नेताओं ने कहा कि जब तक लद्दाख के लिए पूर्ण और स्थायी संवैधानिक ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र की जमीन, रोजगार, पर्यावरण और जनसांख्यिकीय हितों की सुरक्षा के लिए ठोस अंतरिम सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
बैठक में पूर्व की पुलिस फायरिंग की घटनाओं में प्रभावित नागरिकों के लिए न्याय, सम्मानजनक मुआवजे और दर्ज मुकदमों को बिना शर्त वापस लेने की मांग भी गृह मंत्रालय के समक्ष प्रमुखता से उठाई गई।
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