राष्ट्रगान पर खामोशी बनी सियासी तूफान! ईरान लौटीं महिला फुटबॉलर्स पर मंडराया खतरा, पहलवान की फांसी के बाद बढ़ी दुनिया की चिंता

तेहरान: अंतरराष्ट्रीय मंच पर विरोध दर्ज कराने की कीमत क्या हो सकती है, इसका अंदाजा इन दिनों ईरान की महिला फुटबॉल टीम को लेकर लगाई जा रही आशंकाओं से लगाया जा सकता है। एएफसी महिला एशियन कप में राष्ट्रगान के दौरान चुप रहकर विरोध जताने वाली ईरानी खिलाड़ी स्वदेश लौट आई हैं, लेकिन उनके भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता गहरा गई है। हाल ही में एक युवा पहलवान को फांसी दिए जाने के बाद इस मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

राष्ट्रगान पर खामोशी बनी विवाद की जड़

ऑस्ट्रेलिया में खेले गए एशियन कप के दौरान दक्षिण कोरिया के खिलाफ मुकाबले में ईरान की 26 सदस्यीय टीम ने राष्ट्रगान के समय चुप्पी साध ली थी। इस कदम को सरकार के खिलाफ प्रतिरोध के तौर पर देखा गया। हालांकि अगले ही मैच में खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया और सैल्यूट किया, जिससे यह संकेत मिला कि उन पर दबाव डाला गया हो सकता है। ईरान के सरकारी मीडिया ने इस चुप्पी को देशद्रोह तक करार दिया, जिससे विवाद और गहरा गया।

दो खिलाड़ियों ने विदेश में ली शरण

टीम की दो खिलाड़ियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ऑस्ट्रेलिया में ही शरण ले ली है। उन्हें मानवीय आधार पर वीजा मिला है, जिसके तहत वे वहां एक साल तक रह सकती हैं और स्थायी निवास के लिए आवेदन भी कर सकती हैं। इन खिलाड़ियों की बिना हिजाब ट्रेनिंग करती तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिन्हें ईरान की सख्त पाबंदियों के खिलाफ उनके विरोध के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में सात खिलाड़ियों ने शरण लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में पांच ने अपना फैसला बदल लिया। इसके पीछे परिवारों पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।

भव्य स्वागत या दिखावा?

स्वदेश लौटने पर ईरानी महिला फुटबॉल टीम का सीमा पर फूलों और लाल कालीन के साथ भव्य स्वागत किया गया। फुटबॉल अधिकारियों ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए उनके प्रदर्शन को साहसिक बताया। तेहरान में भी उनके सम्मान में बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचने के लिए किया गया दिखावा मान रहे हैं और खिलाड़ियों की वास्तविक सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पहलवान की फांसी ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में 19 वर्षीय पहलवान सालेह मोहम्मदी को विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में फांसी दी गई, जिससे मानवाधिकार संगठनों की चिंता और बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि विरोध से जुड़ी इन महिला खिलाड़ियों को भी देश लौटने पर गुप्त रूप से प्रताड़ित किया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने खेल और राजनीति के खतरनाक मेल को उजागर कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी हुई सक्रिय

इस मामले में अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी खुलकर सामने आई है। अमेरिकी हस्तक्षेप और खिलाड़ियों को मिले शरण के फैसले को ईरानी मीडिया ने राजनीतिक साजिश बताया है। वहीं वैश्विक मानवाधिकार संगठन लगातार खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

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