
टेलीविज़न इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री श्वेता तिवारी और उनके पूर्व पति राजा चौधरी का रिश्ता एक बार फिर से सुर्खियों के बाजार में गर्म हो गया है। ‘कसौटी जिंदगी की’ फेम श्वेता तिवारी के एक्स-हस्बैंड राजा चौधरी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान अपनी पर्सनल लाइफ, बेटी पलक तिवारी और उस चर्चित कानूनी समझौते पर खुलकर बात की है, जिसमें बेटी की कस्टडी छोड़ने के एवज में 93 लाख रुपये का फ्लैट लेने की बात कही गई थी। सालों बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए राजा चौधरी ने श्वेता तिवारी पर कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं और उस दौर के हालातों का ब्योरा दिया है जब दोनों के बीच तलाक का कानूनी केस कोर्ट में चल रहा था।
93 लाख के फ्लैट और बेटी की कस्टडी विवाद पर राजा चौधरी का पक्ष
इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए राजा चौधरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि साल 2007 में वे दोनों कानूनी रूप से एक-दूसरे से अलग हो गए थे और उनका पारिवारिक अदालत में तलाक का केस चल रहा था। राजा ने दावा किया कि साल 2007 से 2012 के बीच श्वेता शायद ही कभी 10 बार कोर्ट में पेश हुई होंगी, जबकि वे खुद हर तारीख पर अदालत में मौजूद रहते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अदालत के आदेश के बावजूद श्वेता कभी भी पलक को तयशुदा जगह पर उनसे मिलाने नहीं लेकर गईं। राजा ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि वे कई अन्य मामलों में बुरी तरह फंस चुके थे और हालात इतने बदतर हो गए थे कि कोई उन्हें किराए पर घर देने को भी तैयार नहीं था। तंग आकर उन्होंने फैसला किया कि उन्हें अब और विवादों में नहीं पड़ना है, जिसके बाद उन्होंने रहने के लिए एक ठिकाना और मानसिक शांति को प्राथमिकता दी।
फ्लैट के इतिहास और श्वेता के ‘बलिदान’ वाले दावों पर तीखा पलटवार
राजा चौधरी ने उस 1 बीएचके फ्लैट के बारे में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जिस प्रॉपर्टी को लेकर श्वेता द्वारा उनके नाम ट्रांसफर करने की बात कही जाती है, असल में वह फ्लैट उनके पिता ने श्वेता के साथ उनकी शादी के वक्त खरीदा था। राजा के मुताबिक, उस फ्लैट की शुरुआती कीमत 9 लाख रुपये थी, जिसकी डाउन पेमेंट उनके पिता ने दी थी और बाद में उसकी ईएमआई श्वेता और उन्होंने मिलकर चुकाई थी। राजा ने कहा कि उन्होंने श्वेता से साफ कह दिया था कि वह अपना साम्राज्य और बच्चे अपने पास रखे, और उन्हें सिर्फ वह फ्लैट दे दे ताकि वे अपनी जिंदगी शांति से जी सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि श्वेता बाद में इन तमाम बातों को अपने तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश कर रही हैं और इसे एक ‘बलिदान’ का रूप दे रही हैं, जबकि एक इंसान जो अपनी जिंदगी में केवल रहने के लिए एक ठिकाना ढूंढ रहा था, उसे इस तरह से प्रचारित करना पूरी तरह गलत है।
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