
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और सुपरस्टार बल्लेबाज विराट कोहली आज 37 वर्ष की उम्र में भी दुनिया के सबसे फिट एथलीटों में गिने जाते हैं। विराट ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासित डाइट और कठोर ट्रेनिंग रूटीन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। हालांकि, हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई भारतीय और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से जुड़े क्रिकेटर विराट कोहली जैसा स्लिम और लीन (Lean) लुक पाने के लिए शॉर्टकट अपना रहे हैं। युवा और सीनियर खिलाड़ी तेजी से वजन घटाने के लिए ‘ओजेम्पिक’ (Ozempic) और ‘माउंजारो’ (Mounjaro) जैसे जीएलपी-1 (GLP-1) श्रेणी के इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्रिकेटर्स में बढ़ा जीएलपी-1 दवाओं का इस्तेमाल: क्या है ओजेम्पिक और माउंजारो?
रिपोर्ट्स और खेल जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के कई खिलाड़ी वर्कआउट के साथ-साथ इन दवाओं को वजन घटाने के सबसे आसान और त्वरित तरीके के तौर पर देख रहे हैं। मूल रूप से डॉक्टरों द्वारा टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के इलाज के लिए दी जाने वाली ये दवाएं अब एथलीट्स के बीच ‘शॉर्टकट फिटनेस’ का जरिया बन चुकी हैं। ओजेम्पिक में ‘सेमाग्लूटाइड’ (Semaglutide) नामक तत्व होता है, जो भूख को दबाने और पाचन प्रक्रिया को धीमा करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। वहीं, माउंजारो में ‘टिरजेपेटाइड’ (Tirzepatide) पाया जाता है, जो तेजी से वजन कम करने और शरीर का फैट घटाने में मदद करता है। बॉलीवुड सितारों के बाद अब यह ट्रेंड युवा क्रिकेटरों में तेजी से फैल रहा है, जहां वे मैदान पर पतला दिखने के लिए बिना परिणाम की परवाह किए ये इंजेक्शन ले रहे हैं।
सेहत और खेल करियर पर गंभीर असर: क्यों खतरनाक हैं ये इंजेक्शन?
सिर्फ स्लिम दिखने की चाह में इन दवाओं का इस्तेमाल खिलाड़ियों की सेहत और उनके पेशेवर करियर के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं के कई गंभीर दुष्प्रभाव (Side Effects) होते हैं, जैसे—जी मिचलाना, उल्टी, डायरिया (दस्त), गंभीर कब्ज और पेट में ऐंठन। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये इंजेक्शन शरीर का फैट कम करने के साथ-साथ एथलीट की मांसपेशियों (Muscle Loss) को भी तेजी से कमजोर कर देते हैं। क्रिकेट जैसे उच्च-तीव्रता (High-Intensity) वाले खेल में, जहां स्टैमिना, ताकत और मांसपेशियों की मजबूती सबसे अहम होती है, वहां मसल मास कम होना किसी भी खिलाड़ी की परफॉर्मेंस को पूरी तरह तबाह कर सकता है।
भारतीय क्रिकेट में फिटनेस की समस्या और बढ़ती चोटों का संकट
फिलहाल भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की फिटनेस और बार-बार लगने वाली चोटें (Injuries) मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बनी हुई हैं। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और हर्षित राणा जैसे प्रमुख खिलाड़ी लगातार चोटिल होकर टीम से बाहर-अंदर होते रहे हैं। हाल ही में जसप्रीत बुमराह घुटने की गंभीर चोट के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर हो गए, जहां भारत को दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। युवा बल्लेबाज बी साई सुदर्शन भी पूरी तरह फिट न होने की वजह से टीम में शामिल नहीं हो सके। ऐसे माहौल में, जब टीम इंडिया चोटों के संकट से जूझ रही है, खिलाड़ियों का फिटनेस सुधारने के बजाय दवाइयों और इंजेक्शनों के जरिए सेहत के साथ खिलवाड़ करना भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया