दिल्ली में गर्मी का ‘डरावना’ अलर्ट: साल में 180 नहीं अब 210 दिन सताएगी तपिश, AI रिपोर्ट ने दी 2040 तक भीषण चेतावनी

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और पूरे उत्तर भारत के लिए जलवायु परिवर्तन की एक ऐसी डरावनी तस्वीर सामने आई है, जो भविष्य की मुश्किलों का संकेत दे रही है। ‘CRAVIS’ नामक देश के पहले AI आधारित क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 20 वर्षों में दिल्ली वालों को साल के करीब 7 महीने भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में गर्म रातों की संख्या 180 से बढ़कर 210 होने वाली है, जिससे न केवल आम जनजीवन बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ेगा।

CRAVIS की रिपोर्ट: 40 दिन और बढ़ जाएगी ‘अग्निपरीक्षा’

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर (CEEW) द्वारा विकसित इस AI प्लेटफॉर्म ने चेतावनी दी है कि 1981-2010 के दौर की तुलना में आने वाले समय में साल के 15 से 40 दिन अतिरिक्त गर्म होंगे। इसका मतलब है कि दिल्ली में जो गर्मी अब तक सही जा रही थी, उसमें एक महीने से ज्यादा का इजाफा होने वाला है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस प्लेटफॉर्म का उद्घाटन करते हुए स्वीकार किया कि बेमौसम बारिश और बढ़ती तपिश भारत पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रहार का संकेत है।

क्या होती हैं ‘गर्म रातें’ और क्यों बढ़ी चिंता?

मौसम विज्ञान की भाषा में ‘गर्म रात’ उसे कहा जाता है जब न्यूनतम तापमान 20°C से नीचे न गिरे। दिल्ली में वर्तमान औसत के अनुसार साल में ऐसी 180 रातें होती हैं, जो अब बढ़कर 210 होने का अनुमान है। गर्म रातें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती हैं क्योंकि रात में शरीर को ठंडक न मिलने के कारण रिकवरी नहीं हो पाती, जिससे कार्यक्षमता (Efficiency) घटती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

बारिश के दिनों में भी होगा बदलाव

AI प्लेटफॉर्म ‘CRAVIS’ के डेटा के अनुसार, केवल गर्मी ही नहीं बल्कि सालाना बारिश के पैटर्न में भी बड़ा उलटफेर होने वाला है। आने वाले वर्षों में सालाना बारिश के दिनों में 10 से 30 दिन की वृद्धि हो सकती है। यानी एक तरफ जहां लोग भीषण गर्मी से बेहाल होंगे, वहीं दूसरी तरफ अचानक होने वाली तेज बारिश और जलभराव की चुनौतियां भी बढ़ेंगी।

बिजली संकट और डेटा सेंटर्स पर भी खतरा

गर्मी बढ़ने का सीधा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी के दिन बढ़ने से बिजली की ‘पीक लोड’ डिमांड में भारी इजाफा होगा, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत के 281 डेटा सेंटर्स में से आधे से ज्यादा पहले ही साल के 90 दिन 35°C से अधिक तापमान झेल रहे हैं। 2040 तक ऐसे डेटा केंद्रों की संख्या 90% तक पहुंच जाएगी, जिससे देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठंडा रखने की चुनौती और भी गंभीर हो जाएगी।

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