‘SC/ST का कॉलम तो OBC का क्यों नहीं?’, जाति गणना की प्रश्नावली पर राहुल-खरगे ने खोला नया मोर्चा; PM मोदी को चिट्ठी लिखकर वर्तमान फॉर्मेट रद्द करने और बिहार-तेलंगाना मॉडल अपनाने की मांग

केंद्र सरकार द्वारा आगामी राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण के लिए अधिसूचित की गई 40 सवालों वाली प्रश्नावली को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने जनगणना में जाति से जुड़े सवालों के प्रारूप पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘सामाजिक न्याय के साथ धोखा’ करार दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर वर्तमान प्रश्नावली को तत्काल रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस का सीधा सवाल है कि जब जनगणना के प्रारूप में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का स्पष्ट कॉलम मौजूद है, तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग श्रेणी या कॉलम क्यों नहीं जोड़ा गया? कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मौजूदा अस्पष्ट व्यवस्था से देश में ओबीसी की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा कभी सामने नहीं आ पाएगा।

‘ओपन-एंडेड’ सवाल पर विवाद: एक ही जाति के बन जाएंगे लाखों नाम

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार द्वारा अपनाए गए ‘ओपन-एंडेड’ (खुले उत्तर वाले) सवाल के तरीके पर गंभीर तकनीकी सवाल उठाए हैं। वर्तमान प्रारूप के तहत गणनाकर्ता (Enumerator) नागरिक से उसकी जाति का नाम पूछेगा और नागरिक जो भी स्थानीय नाम या उपजाति बताएगा, उसे सीधे दर्ज कर लिया जाएगा।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि भारत में भाषाई विविधता, क्षेत्रीय बोलियों और उपजातियों के आधार पर एक ही मूल जाति को अलग-अलग राज्यों में दर्जनों नामों से जाना जाता है।

  • उदाहरण के लिए, हरियाणा में बढ़ई (Carpenter) समुदाय को जांगिड़, जांगड़ा, खाती, धीमान और विश्वकर्मा जैसे कई नामों से पुकारा जाता है।

  • यदि कोई मानकीकृत प्रणाली नहीं होगी, तो देश भर में एक ही जाति हजारों अलग-अलग नामों में बंट जाएगी।

  • समाजशास्त्रियों और डेटा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस खुली व्यवस्था से देश भर में 40 से 46 लाख अलग-अलग जातियों की भ्रामक प्रविष्टियां दर्ज हो जाएंगी।

  • इसके बाद सरकार डेटा की अत्यधिक जटिलता का बहाना बनाकर जातिगत आंकड़ों को ‘अवैज्ञानिक’ घोषित कर खारिज कर सकती है।

‘प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द ही गायब’: ओबीसी आबादी की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। जयराम रमेश ने कहा कि 14 अगस्त को जारी गजट नोटिफिकेशन में कुल 40 सवाल हैं, जिसमें 10वें सवाल के तहत धर्म और जाति का ब्योरा मांगा गया है। लेकिन पूरे फॉर्म में ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) या ‘पिछड़ा वर्ग’ (Backward Classes) शब्द का कोई स्पष्ट विकल्प ही नहीं दिया गया है।

कांग्रेस ने कहा कि जब तक फॉर्म में स्पष्ट ओबीसी वर्गीकरण नहीं होगा, तब तक देश के 50 प्रतिशत से अधिक पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित समुदायों की सटीक सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जनसंख्या का आकलन असंभव हो जाएगा। इसका सीधा नुकसान शिक्षा, सरकारी नौकरियों में आरक्षण, बजटीय आवंटन और सामाजिक कल्याण की योजनाओं के निर्माण पर पड़ेगा।

कांग्रेस ने PM मोदी के सामने रखीं 4 प्रमुख मांगें

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्र में चार ठोस कदम उठाने की अपील की है:

  • वर्तमान प्रश्नावली को तुरंत रद्द किया जाए: 14 अगस्त को अधिसूचित की गई 40 सवालों की मौजूदा प्रश्नावली को वापस लिया जाए।

  • सर्वदलीय बैठक और विशेषज्ञों से संवाद: सभी राजनीतिक दलों, समाजशास्त्रियों, मानवविज्ञानियों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रश्नावली तैयार की जाए।

  • डिजिटल ‘ड्रॉप-डाउन’ और कोड सूची लागू हो: जनगणना के मोबाइल ऐप और फॉर्म में पहले से सत्यापित जातियों की एक ड्रॉप-डाउन सूची और निश्चित न्यूमेरिकल कोड प्रणाली दी जाए, ताकि गणनाकर्ता नागरिक द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर सही श्रेणी (SC, ST या OBC) के अंतर्गत उपयुक्त जाति का चयन कर सके।

  • आधिकारिक सूचियों का उपयोग: केंद्र और राज्य सरकारों के पास मौजूद सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग सूचियों (SEBC Lists) और ‘एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण) के आधिकारिक डेटाबेस का उपयोग कर यह मास्टर लिस्ट तैयार की जाए।

बिहार और तेलंगाना मॉडल का दिया उदाहरण: क्यों बेहतर है यह व्यवस्था?

कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र के साथ बिहार और तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए जातिगत सर्वेक्षणों की आधिकारिक नियमावली और कोड सूचियां भी प्रधानमंत्री को संलग्न की हैं।

  • बिहार जाति सर्वेक्षण: बिहार में 215 जातियों की एक मानक कोड सूची बनाई गई थी। प्रत्येक जाति को एक यूनिक न्यूमेरिकल कोड दिया गया था, जिससे डेटा संकलन में किसी भी तरह के मानवीय भ्रम या स्पेलिंग की गलती की गुंजाइश नहीं रही।

  • तेलंगाना मॉडल: तेलंगाना में 54 विस्तृत सवालों के साथ 242 जातियों की स्पष्ट ड्रॉप-डाउन सूची तैयार कर एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यक समुदायों की सटीक सामाजिक-आर्थिक गणना की गई।

जयराम रमेश ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने भी 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया था कि जाति जनगणना के लिए पहले से जातियों की एक प्रामाणिक सूची तैयार करना अनिवार्य है। ऐसे में केंद्र सरकार अब उस वैज्ञानिक तरीके से पीछे क्यों हट रही है?

2027 की जनगणना से पहले सुधार का आखिरी मौका

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम व बर्फबारी वाले इलाकों में गैर-समकालिक जनगणना 1 से 30 सितंबर तक होनी है, जबकि देश के बाकी मैदानी हिस्सों में मुख्य जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार के पास अभी भी पर्याप्त समय है कि वह अपनी गलती सुधारकर सभी हितधारकों के साथ मिलकर प्रश्नावली का पुनर्गठन करे। राहुल गांधी ने दोहराया है कि विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) जाति जनगणना को सिर्फ एक औपचारिकता या लीपापोती नहीं बनने देगा, बल्कि इसे देश के करोड़ों शोषितों और पिछड़ों के अधिकारों की गिनती का सबसे मजबूत आधार बनाएगा।

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