TMC में बगावत पर फूटा सागरिका घोष का गुस्सा, बोलीं- अमित शाह का फोन आते ही खत्म हो गई नैतिकता? जनादेश का क्या हुआ

TMC छोड़ने वाले नेताओं पर राज्यसभा सांसद का तीखा हमला, दल-बदल की राजनीति को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची उथल-पुथल के बीच पार्टी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बगावती नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी से दूरी बनाने वाले सांसदों और विधायकों पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जनता से मिला जनादेश किस उद्देश्य के लिए था। उन्होंने बिना नाम लिए उन नेताओं पर हमला बोला जो चुनाव के बाद राजनीतिक पाला बदलने की राह पर चल पड़े हैं।

“अमित शाह का फोन आते ही बदल गई सोच”

सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए दल-बदल करने वाले नेताओं की मंशा और नैतिकता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की प्रतिबद्धता और सिद्धांत उस समय गायब हो जाते हैं जब उन्हें सत्ता या राजनीतिक लाभ का अवसर दिखाई देता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या एक फोन कॉल आते ही राजनीतिक नैतिकता समाप्त हो जाती है?

सागरिका ने इशारों-इशारों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का पहला दायित्व अपने मतदाताओं और पार्टी के प्रति होता है, न कि राजनीतिक अवसरवादिता के प्रति।

जनादेश के सम्मान की उठाई मांग

टीएमसी सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ देना या राजनीतिक निष्ठा बदल लेना मतदाताओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ माना जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि जब जनता ने किसी विशेष विचारधारा और पार्टी के नाम पर वोट दिया था, तो फिर उस जनादेश का सम्मान कौन करेगा?

सागरिका घोष ने कहा कि राजनीतिक दल बदलने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है और इससे जनता का भरोसा भी प्रभावित होता है। उन्होंने नेताओं से अपने राजनीतिक और नैतिक दायित्वों को समझने की अपील की।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद टीएमसी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। पार्टी के कुछ नेताओं के रुख में बदलाव को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच सागरिका घोष का यह बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की स्थिति और विपक्षी दलों की रणनीति बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। वहीं सागरिका घोष के बयान ने दल-बदल और राजनीतिक नैतिकता के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

Check Also

a16z generative ai

Hippocratic AI raises $141M to staff hospitals with clinical AI agents Story Partners with Stability …