संयुक्त राष्ट्र में एस जयशंकर का कड़ा संदेश: आतंकवाद पर पाकिस्तान बेनकाब

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद और वैश्विक कूटनीति के मुद्दे पर दुनिया को आईना दिखाया है। न्यूयॉर्क में दिए गए अपने प्रभावशाली भाषण में उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को 'आतंकवाद का मुख्य केंद्र' और 'सीरियल प्रैक्टीशनर' करार देते हुए उसकी पोल खोल दी। इसके साथ ही, उन्होंने चीन और अन्य महाशक्तियों को भी चेताया कि भू-राजनीतिक स्वार्थों के लिए वैश्विक नियमों और व्यापारिक मार्गों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को दो टूक: नहीं चलेगी ड्रामेबाजी

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं या सीमा पार से प्रायोजित हिंसा करते हैं, उन्हें अब वैश्विक मंचों पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दोस्ती की बातें एक साथ नहीं चल सकतीं। भारत ने साफ कर दिया है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने के अपने अधिकार का पूरी तरह से पालन करेगा। आतंकवाद को सामान्य ठहराने और इसके नतीजों से बचने की कोई भी कोशिश अब कामयाब नहीं होने वाली।

ग्लोबल साउथ की आवाज और चीन की नीतियों पर परोक्ष प्रहार

भाषण के दौरान एस जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बिना नाम लिए चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि गैर-बाजार प्रथाओं और मार्केट डिनायल (बाजार तक पहुंच रोकने) के जरिए विकासशील देशों और 'ग्लोबल साउथ' के औद्योगीकरण के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। तकनीक जो कभी उम्मीद की किरण हुआ करती थी, आज वह चिंता और अविश्वास का स्रोत बनती जा रही है। उन्होंने सप्लाई चेन को बाधित करने और संसाधनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति की भी कड़ी आलोचना की।

भू-राजनीतिक संकट और दुनिया के सामने मंडराता खतरा

विदेश मंत्री ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया आज खड्ड के मुहाने पर खड़ी है। युद्ध और संघर्षों का खामियाजा उन देशों को भुगतना पड़ रहा है जिनका उन लड़ाइयों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। खाद्य सुरक्षा, ईंधन, उर्वरक और वित्त (4F संकट) को लेकर दुनिया गंभीर दौर से गुजर रही है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने को उन्होंने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया, जो सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और स्थिरता को चुनौती देता है।

महात्मा गांधी के संदेश से शांति का आह्वान

अपने ऐतिहासिक संबोधन के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा और उनके संदेश को याद किया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाते हुए कहा कि 'शांति का कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांति ही एकमात्र रास्ता है'। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध और हिंसा के दौर को पीछे छोड़कर संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का समय आ गया है, और वैश्विक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनना होगा।

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