पिछले चार साल से भी अधिक समय से तबाही मचा रहे रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) को एक खुला पत्र (Open Letter) लिखकर आमने-सामने बैठकर शांति वार्ता करने का एक अप्रत्याशित प्रस्ताव दिया है। युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब जेलेंस्की ने सीधे पुतिन से बातचीत की पेशकश की है। जेलेंस्की ने साफ किया है कि दोनों देशों के बीच के इस महा-संकट का समाधान केवल दोनों शीर्ष नेता ही आमने-सामने बैठकर कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ तटस्थ देशों में मुलाकात करने की इच्छा जताई है।
कीव या मॉस्को नहीं, जेलेंस्की ने शांति वार्ता के लिए रखे इन 3 न्यूट्रल देशों के नाम
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने खुले पत्र में स्पष्ट किया है कि यह ऐतिहासिक बातचीत न तो रूस की राजधानी मॉस्को में होनी चाहिए और न ही यूक्रेन के कीव में। उन्होंने पुतिन को किसी न्यूट्रल (तटस्थ) देश में मिलने का न्योता दिया है। जेलेंस्की ने बातचीत के लिए तीन प्रमुख जगहों का सुझाव दिया है:
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स्विट्जरलैंड (Switzerland)
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तुर्किए (Turkey)
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कोई भी अरब देश (Arab Nations)
जेलेंस्की ने पुतिन से अपील की है कि वे जल्द से जल्द एक ऐसी तारीख और समय निश्चित करें, जब दोनों नेता एक मेज पर बैठ सकें। उन्होंने यह भी माना कि केवल अमेरिका के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने का अब कोई फायदा नहीं है, क्योंकि अमेरिका का ध्यान इस समय ईरान और मध्य पूर्व के संकट पर ज्यादा केंद्रित है।
जेलेंस्की की बड़ी शर्तें— ‘बातचीत के दौरान तुरंत लागू हो पूर्ण युद्धविराम’
शांति वार्ता के इस बड़े प्रस्ताव के साथ जेलेंस्की ने रूस के सामने कुछ कड़े नियम और शर्तें भी रखी हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि:
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पूर्ण युद्धविराम (Ceasefire): जब तक दोनों नेताओं के बीच बातचीत चलेगी, उस दौरान सीमाओं पर पूरी तरह से युद्धविराम लागू होना चाहिए और दोनों तरफ से गोलीबारी व हमले तुरंत रोके जाने चाहिए।
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युद्धबंदियों की अदला-बदली (Prisoner Exchange): युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए सैनिकों और नागरिकों की पूरी तरह से अदला-बदली की जानी चाहिए। जेलेंस्की ने रूस की जेलों में बंद सभी यूक्रेनी नागरिकों को तुरंत रिहा करने की मांग की है।
‘जमीनी मोर्चे पर नाकाम रूस अब मिसाइलों के भरोसे, पड़ोसी देशों में बढ़ा रहा है तनाव’
शांति का हाथ बढ़ाने के साथ-साथ जेलेंस्की ने पुतिन सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रूसी सेना को जमीनी अभियान (Ground Operation) में कोई खास सफलता नहीं मिल पा रही है, यही वजह है कि हताशा में रूस अब यूक्रेन के रिहायशी इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले तेज कर रहा है।
जेलेंस्की का दावा है कि रूस चाहता है कि यह युद्ध एक-दो साल और खिंचे ताकि वह किसी भी तरह यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर कब्जा जमा सके। इसके अलावा पुतिन अब बेलारूस को भी इस भीषण संघर्ष में जबरन घसीटना चाहते हैं और मोल्दोवा में अपने समर्थकों के जरिए ट्रांसनिस्ट्रिया क्षेत्र के आस-पास नया कूटनीतिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
‘यूक्रेनी ड्रोनों और आर्थिक मंदी से पस्त हो चुका है रूस, एक महीने में गंवाए 30 हजार सैनिक’
रूसी अर्थव्यवस्था की बदहाली का जिक्र करते हुए जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस इस युद्ध से बुरी तरह त्रस्त हो चुका है और अब इसकी भारी कीमत चुका रहा है। यूक्रेन की तरफ से लगातार किए जा रहे ताबड़तोड़ ड्रोन हमलों, आसमान छूती महंगाई और देश में ईंधन (Fuel) की भारी किल्लत के चलते रूस इस समय भीषण आर्थिक दबाव में है और अंदर से पस्त हो चुका है।
जेलेंस्की ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए दावा किया कि अकेले पिछले एक महीने के भीतर ही रूस के 30 हजार से ज्यादा सैनिक या तो मारे गए हैं या फिर हमेशा के लिए अपाहिज हो चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस लंबे युद्ध के कारण यूक्रेन को भी जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जेलेंस्की ने अंत में लिखा कि आज पूरी दुनिया यूक्रेन से नहीं बल्कि रूस की हठधर्मिता से परेशान हो चुकी है, यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यूक्रेन के साथ खड़ा है और रूस पर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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