मुंबई। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के मौजूदा सीजन में संघर्ष कर रही मुंबई इंडियंस (MI) के लिए सोमवार की शाम एक नई उम्मीद लेकर आई। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के बाद मैदान पर धमाकेदार वापसी की और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दिलाई। रोहित की इस पारी के बाद पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
‘वानखेड़े’ में रोहित का तूफान: 44 गेंदों में कूटे 84 रन
12 अप्रैल को आरसीबी के खिलाफ मैच के दौरान चोटिल हुए रोहित शर्मा पांच मैचों तक टीम से बाहर रहे। लेकिन वापसी करते ही उन्होंने साबित कर दिया कि उन्हें ‘हिटमैन’ क्यों कहा जाता है। लखनऊ द्वारा दिए गए 229 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए रोहित ने महज 44 गेंदों में 84 रनों की आतिशी पारी खेली। उन्होंने युवा बल्लेबाज रेयान रिकेल्टन (32 गेंद, 83 रन) के साथ मिलकर 143 रनों की साझेदारी की और मुंबई को 6 विकेट से जीत दिला दी।
हरभजन सिंह का ‘काश’ और मुंबई की स्थिति
हरभजन सिंह ने एक खेल चर्चा के दौरान कहा कि रोहित की गैरमौजूदगी मुंबई को भारी पड़ी। भज्जी ने कहा:
“मैदान पर रहकर आप अंतर पैदा कर सकते हैं, डगआउट में बैठकर नहीं। काश! रोहित की चोट थोड़ी जल्दी ठीक हो गई होती। जब मुंबई लगातार मैच हार रही थी, तब अगर रोहित साथ होते तो शायद एक-दो मैच जीतकर टीम आज प्लेऑफ की रेस में बेहतर स्थिति में होती।”
हरभजन ने आगे कहा कि रोहित ने न केवल टीम को एक मजबूत नींव दी, बल्कि उसे अंत तक खींचा भी। अगर वह अपना शतक पूरा कर लेते, तो यह सोने पर सुहागा होता।
रवि शास्त्री ने LSG को दिखाया आईना
वहीं, पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने लखनऊ सुपर जायंट्स की लगातार छठी हार पर तीखी टिप्पणी की। शास्त्री ने कहा कि एलएसजी की सबसे बड़ी समस्या तालमेल की कमी है। जब उनके गेंदबाज चलते हैं तो बल्लेबाज फ्लॉप हो जाते हैं, और जब बल्लेबाज 228 जैसा स्कोर खड़ा करते हैं, तो गेंदबाज जमकर रन लुटा देते हैं। प्रदर्शन में निरंतरता न होना ही लखनऊ के 10वें पायदान पर होने की मुख्य वजह है।
प्वॉइंट्स टेबल का समीकरण: क्या अब भी उम्मीद है?
लखनऊ पर इस धमाकेदार जीत के बावजूद मुंबई इंडियंस की राह आसान नहीं है।
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मुंबई इंडियंस: 10 मैचों में 3 जीत के साथ 6 अंक, पायदान— 9वां।
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लखनऊ सुपर जायंट्स: 9 मैचों में केवल 4 अंक, लगातार 6 हार के साथ— 10वां (अंतिम)।
मुंबई ने अपनी मामूली उम्मीदों को तो जिंदा रखा है, लेकिन अब उन्हें न केवल अपने बाकी बचे मैच जीतने होंगे, बल्कि दूसरी टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा।
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