
सर्दियों की दस्तक और शीतकालीन अवकाश के लिए ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की उल्टी गिनती शुरू होने के बीच देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बाबा केदार के दर्शन के लिए उत्तराखंड के दौरे पर पहुंच रही हैं। निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 2 नवंबर को केदारनाथ धाम पहुंचकर गर्भगृह में रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। इस वर्ष केदारनाथ धाम के कपाट भैयादूज के पावन अवसर पर आगामी 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे विधिवत शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। ऐसे में कपाट बंद होने से ठीक नौ दिन पहले महामहिम के इस प्रस्तावित उच्च-स्तरीय दौरे को लेकर उत्तराखंड शासन, पुलिस मुख्यालय और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
राष्ट्रपति भवन और राज्य प्रोटोकॉल विभाग से मिली प्राथमिक सूचना के आधार पर उत्तराखंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने सुरक्षा व्यवस्था, वीवीआईपी मूवमेंट, हेलीकॉप्टर संचालन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। केदारनाथ धाम समुद्र तल से 11,755 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है, जहां इन दिनों तापमान शून्य से नीचे जा रहा है और हाल ही में सीजन की बर्फबारी भी दर्ज हुई है। मौसम की संवेदनशीलता और महामहिम की सुरक्षा को देखते हुए धाम परिसर से लेकर सभी प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स पर कड़े सुरक्षा घेरे की योजना बनाई जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति के दो दिवसीय उत्तराखंड प्रवास का रूपरेखा इस प्रकार तय किया गया है:
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1 नवंबर को देहरादून आगमन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 1 नवंबर की शाम करीब 4:45 बजे विशेष वायुसेना विमान से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगी। वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा अगवानी किए जाने के बाद वे राजपुर रोड स्थित राष्ट्रपति निकेतन (लोकभवन) के लिए प्रस्थान करेंगी। राष्ट्रपति का रात्रि विश्राम देहरादून में ही रहेगा।
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2 नवंबर को केदारनाथ के लिए उड़ान: 2 नवंबर की सुबह राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष हेलीकॉप्टर से सीधे केदारनाथ धाम स्थित वीवीआईपी हेलीपैड के लिए उड़ान भरेंगी।
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बाबा केदार की विशेष पूजा: हेलीपैड से राष्ट्रपति ऑल-वेदर मार्ग से मंदिर परिसर पहुंचेंगी, जहां वे मुख्य पुजारियों और बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पदाधिकारियों की उपस्थिति में विशेष षोडशोपचार पूजा व लोक-कल्याण के लिए प्रार्थना करेंगी।
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दिल्ली वापसी: पूजा-अर्चना और धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का अवलोकन करने के बाद राष्ट्रपति दोपहर तक जौलीग्रांट एयरपोर्ट लौटेंगी और वहां से नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी।
राष्ट्रपति केदारनाथ दौरे को सुरक्षित और त्रुटिरहित बनाने के लिए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। सुरक्षा के लिहाज से निम्नलिखित विशेष कदम उठाए जा रहे हैं:
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स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) और पुलिस का समन्वय: महामहिम के आगमन से पहले एसपीजी और उत्तराखंड पुलिस की विशेष सुरक्षा शाखा मंदिर क्षेत्र, हेलीपैड और आसपास के पूरे मार्ग का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट (ASL – Advance Security Liaison) पूरा करेगी।
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बैकअप हेलीपैड व्यवस्था: अधिक ऊंचाई पर मौसम अचानक खराब होने के जोखिम को देखते हुए केदारनाथ मुख्य हेलीपैड के अलावा गुप्तकाशी, सेरसी, फाटा और गौचर में आपातकालीन वैकल्पिक (Standby) हेलीपैड तैयार रखे जा रहे हैं।
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अत्याधुनिक स्वास्थ्य और ऑक्सीजन सुविधाएं: धाम में गिरते तापमान और ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए केदारनाथ अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों, कार्डियोलॉजिस्ट और एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) से लैस एंबुलेंस व वेंटिलेटर की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
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भीड़ और दर्शन प्रबंधन: राष्ट्रपति के दर्शन के समय मंदिर के गर्भगृह और मुख्य प्रांगण में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश को कुछ समय के लिए नियंत्रित किया जाएगा ताकि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो सके, हालांकि प्रशासन इस बात का भी ध्यान रख रहा है कि दूर-दराज से आए आम तीर्थयात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।
साल 2026 की चारधाम यात्रा अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इस वर्ष केदारनाथ धाम के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के आंकड़े ने नया इतिहास रच दिया है और अब तक 17.84 लाख से अधिक तीर्थयात्री बाबा केदार के समक्ष शीश नवा चुके हैं। पारंपरिक पंचांग गणना के अनुसार, भैयादूज के दिन यानी 11 नवंबर को सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे, जिसके बाद बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी।
कपाट बंद होने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह धार्मिक यात्रा पूरे देश के श्रद्धालुओं और उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहित समाज के लिए बेहद उत्साहजनक मानी जा रही है। मंदिर समिति ने महामहिम को प्रसाद के रूप में ब्रह्मकमल, भस्म और विशेष स्मृति चिह्न भेंट करने की तैयारी भी पूरी कर ली है।
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