PM मोदी ने राष्ट्रपति मुर्मू से की मुलाकात, दीं दिवाली की बधाई

प्रकाश और उमंग के पावन पर्व दीपावली के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन जाकर औपचारिक व सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके स्वस्थ, सुदीर्घ जीवन की मंगलकामना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें तथा समस्त देशवासियों को सुख, समृद्धि और शांति के इस राष्ट्रीय पर्व की अग्रिम बधाइयां दीं। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों के प्रमुखों की तस्वीरें साझा की गईं, जिसमें दोनों नेता परस्पर मंगलकामनाएं संप्रेषित करते हुए देश में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि के विस्तार पर विचार विमर्श करते नजर आ रहे हैं। इस मुलाकात से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में अग्रिम मोर्चों पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपोत्सव मनाया था, जहां उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे और सुरक्षित भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित किया था।

देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह बैठक अत्यंत सौहार्दपूर्ण और आत्मीय वातावरण में संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पारंपरिक परिधान में राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पुष्पगुच्छ भेंट कर दीपोत्सव की बधाई दी। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी प्रधानमंत्री के राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की सराहना करते हुए देश के निरंतर विकास और जन-कल्याण के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।

संवैधानिक प्रमुखों के बीच होने वाली यह पारंपरिक दिवाली मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भर नहीं है, बल्कि यह देश के शीर्ष संस्थानों के बीच गहरे समन्वय और लोकतांत्रिक मूल्यों की दृढ़ता का जीवंत प्रतीक भी है। राष्ट्रपति भवन द्वारा साझा की गई तस्वीरों में दोनों नेताओं के चेहरे पर पर्व का उल्लास और देश के उज्ज्वल भविष्य के प्रति आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था। इस अवसर पर देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य, सीमांत क्षेत्रों में तैनात जवानों के समर्पण और राष्ट्रीय प्रगति के विभिन्न आयामों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई।

राष्ट्रपति भवन जाने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 को देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से उनके आधिकारिक आवास पर जाकर मुलाकात की थी। उपराष्ट्रपति आवास पर पहुंचने पर सीपी राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री का भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को दीपावली पर्व की बधाई दी और देश की आध्यात्मिक परंपरा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विचार साझा किए।

मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के प्रति उनके स्नेहपूर्ण स्वागत और शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया था। उपराष्ट्रपति के साथ हुई इस भेंट ने देश के विधायी और प्रशासनिक स्तंभों के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्ते को उजागर किया, जिसने पूरे राष्ट्रीय नेतृत्व में दीपोत्सव की सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

हर वर्ष सरहद और सुदूर मोर्चों पर देश की रक्षा में मुस्तैद सुरक्षा बलों के बीच दिवाली मनाने की अपनी अटूट परंपरा को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे ऐतिहासिक क्षेत्र बस्तर पहुंचे। घने जंगलों और संवेदनशील सुरक्षा चौकियों के बीच सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और स्थानीय सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपोत्सव मनाते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें अपने हाथों से मिठाइयां खिलाईं और उनका हौसला बढ़ाया।

जवानों को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब पूरा देश और विश्व के विभिन्न कोनों में रहने वाले करोड़ों भारतीय रोशनी का यह त्योहार मना रहे हैं, लोग अपने पैतृक घरों में जाकर परिजनों के साथ खुशियां बांटते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में तैनात वीर जवान ही उनका परिवार हैं, इसलिए वे प्रतिवर्ष अपने परिवार के साथ दीपोत्सव का उल्लास साझा करने इन दुर्गम मोर्चों पर खिंचे चले आते हैं। जवानों के अदम्य साहस को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के त्याग और सतर्कता की बदौलत ही देश का हर नागरिक अपने घर में निर्भय होकर दीपक जला पाता है।

बस्तर की पावन और ऐतिहासिक धरती से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि का उद्घोष किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि वर्ष 2026 की दीपावली स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो रही है, क्योंकि यह देश की ऐसी पहली दीपावली है जब भारत का प्रत्येक जिला नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद के काले साये से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि दशकों तक देश के कई राज्य और जिले नक्सली आतंक और हिंसा के खौफ में जीने को मजबूर थे, जिसके कारण विकास की किरणें वहां तक नहीं पहुंच पाती थीं। सुरक्षा बलों के निरंतर पराक्रम, सुनियोजित अभियानों और प्रशासनिक दृढ़ता के फलस्वरूप आज करोड़ों देशवासी नक्सलवाद के भय से हमेशा के लिए बाहर निकल चुके हैं। बस्तर, जो कभी हिंसा और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, आज शांति, पर्यटन, स्थानीय कला और अधोसंरचना विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हमारे अमर शहीदों और सुरक्षा बलों के अदम्य पराक्रम का ही सुफल है।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते वर्षों में देश के अलग-अलग दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में जवानों संग बिताई गई दीवालियों की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि हिमालय की शून्य से नीचे तापमान वाली बर्फीली चोटियों पर स्थित कारगिल और लेपचा से लेकर तपते रेगिस्तान और दलदली सर क्रीक तक, तथा खुले समंदर में भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बनकर तैरते विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत तक, वीर जवानों के सान्निध्य में मनाई गई प्रत्येक दीपावली उनके जीवन की सबसे अनमोल धरोहर बन चुकी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे सियाचिन के ग्लेशियर हों या बस्तर के बीहड़ वन, भारतीय सैनिकों का शौर्य और अनुशासन हर विपरीत परिस्थिति को परास्त कर देता है। बस्तर के वनांचल में जवानों संग बिताए गए पल यह संदेश देते हैं कि देश अब रक्षा और सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर और निर्णायक बन चुका है। जवानों के साथ बिताए इन प्रेरणादायी पलों के बाद ही प्रधानमंत्री सीधे दिल्ली लौटे, जहां उन्होंने राष्ट्र प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट कर समूचे देश के लिए खुशहाली और निरंतर प्रगति की प्रार्थना की।

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