अमेरिकी संसद में भारतवंशियों का ऐतिहासिक डंका, पिया डांडिया और सुहास सुब्रमण्यम की शानदार जीत

संयुक्त राज्य अमेरिका में संपन्न हुए बहुचर्चित मध्यावधि चुनाव (US Midterm Elections 2026) के परिणाम सामने आने के साथ ही अमेरिकी राजनीति में भारतीय प्रवासियों का डंका एक बार फिर जोरदार तरीके से बजा है। इस चुनाव के रुझान और नतीजे न केवल अमेरिकी संसद के दोनों सदनों का शक्ति संतुलन तय कर रहे हैं, बल्कि इनका सीधा कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी देखने को मिलने वाला है। मतों की गिनती के बीच भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर निर्णायक जीत दर्ज करके अमेरिकी लोकतंत्र में अपनी बढ़ती ताकत का अहसास कराया है। इस चुनावी समर में सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत फ्लोरिडा राज्य से सामने आई है, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की भारतीय मूल की उम्मीदवार पिया डांडिया ने जबर्दस्त उलटफेर करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) में अपनी जगह पक्की कर ली है। प्रमुख चुनाव ट्रैकर 'डिसीजन डेस्क एचक्यू' और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पिया डांडिया को फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से आधिकारिक तौर पर विजेता घोषित किया है। पिया ने लगभग 52.2 प्रतिशत वोट हासिल कर रिपब्लिकन उम्मीदवार को शिकस्त दी और इस नवगठित सीट पर जीत हासिल करने वाली पहली भारतवंशी बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

फ्लोरिडा में मिली इस ऐतिहासिक जीत के अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख भारतीय-अमेरिकी चेहरे सुहास सुब्रमण्यम ने भी संसद के निचले सदन में अपनी दूसरी पारी सुनिश्चित कर ली है। वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से मैदान में उतरे सुहास सुब्रमण्यम को जनता का जबर्दस्त समर्थन मिला और उन्होंने रिकॉर्ड 63 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करके अपने प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मुकाबले में धूल चटा दी। सुहास का प्रतिनिधि सभा में यह दूसरा लगातार कार्यकाल होगा। इससे पहले वर्ष 2024 के आम चुनावों में वे वर्जीनिया से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी सांसद बने थे। इसके साथ ही मैरीलैंड राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान बना चुकीं भारतीय मूल की वरिष्ठ नेता अरुणा मिलर ने भी अपनी ऐतिहासिक जीत का परचम लहराया है। अरुणा मिलर ने राज्यव्यापी चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर मैरीलैंड के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) का प्रतिष्ठित पद अपने नाम कर लिया है।

जहां एक ओर डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े कई भारतीय-अमेरिकी चेहरों ने शानदार जीत का स्वाद चखा, वहीं रिपब्लिकन पार्टी के सबसे चर्चित और मुखर भारतवंशी नेता विवेक रामास्वामी को मध्यावधि चुनाव में एक अप्रत्याशित और करारी हार का सामना करना पड़ा है। राष्ट्रपति चुनाव की प्राथमिकताओं में कभी डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे विवेक रामास्वामी ओहियो राज्य के गवर्नर पद की हाई-प्रोफाइल चुनावी दौड़ में शामिल थे। इस बेहद कड़े मुकाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत उम्मीदवार डॉ. एमी एक्टन ने विवेक रामास्वामी को पराजित कर रिपब्लिकन खेमे को बड़ा झटका दिया है। रामास्वामी की इस हार को रिपब्लिकन पार्टी के लिए राज्य स्तर पर एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि वे पार्टी के भावी नेतृत्व का एक प्रमुख चेहरा माने जा रहे थे।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में लंबे समय से सेवा दे रहे प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सांसदों—रो खन्ना (कैलिफोर्निया), डॉ. अमी बेरा (कैलिफोर्निया) और प्रमिला जयपाल (वाशिंगटन)—ने भी अपने-अपने गढ़ों में दोबारा चुने जाने के लिए ताल ठोकी है। इनके अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी के डॉ. अमीश शाह भी कांटे की टक्कर वाली सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। इस बार के मध्यावधि चुनावों में स्थानीय निकायों, राज्य विधानसभाओं और कांग्रेस की सीटों पर रिकॉर्ड संख्या में भारतवंशी मैदान में उतरे हैं, जिनमें रितेश टंडन, नीरव सेठ, महेश गनोरकर, संदीप दीक्षित और अनिल कुमार जैसे नाम शामिल हैं। इन चुनावों में भारतीय मूल के उम्मीदवारों की व्यापक भागीदारी और शानदार सफलता यह साबित करती है कि अमेरिकी नीति-निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा और विधायी प्रक्रियाओं में भारतीय प्रवासियों का प्रभाव अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक हो चुका है।

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