
दक्षिण चीन सागर में जारी भारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा अनिश्चितता के बीच भारत निर्मित घातक ब्रह्मोस मिसाइल ने वैश्विक रक्षा मंच पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। फिलीपीन मरीन कॉर्प्स द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय इंटरनल सिमुलेशन और वॉरगेम अभ्यास में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने काल्पनिक चीनी नौसैनिक बेड़े के आधुनिक एयर डिफेंस शील्ड को सफलतापूर्वक भेदकर अचूक निशाना साधा। चीनी नौसेना के सबसे अडवांस्ड टाइप 052D गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और टाइप 054A फ्रिगेट जैसे अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों के एयर डिफेंस मॉडल इस सुपरसोनिक मिसाइल के हमले को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। इस वॉरगेम के असाधारण नतीजों ने जहां दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है, वहीं बीजिंग में चीनी सैन्य रणनीतिकारों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सामरिक चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम द्वारा तैयार यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के भारी-भरकम जहाजों को पलक झपकते तबाह करने की क्षमता रखती है।
फिलीपीनी मरीन के वॉरगेम में भारत की सुपरसोनिक मिसाइल का ऐतिहासिक प्रदर्शन
इंडो-पैसिफिक रीजन में भारत की सैन्य तकनीक ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। फिलीपीन मरीन कॉर्प्स द्वारा आयोजित इस गुप्त सिम्युलेटेड अभ्यास में चीनी नौसेना के एडवांस मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क को चुनौती दी गई थी। वॉरगेम सिमुलेशन में चीन के घातक युद्धपोत, जिनमें टाइप 052D डिस्ट्रॉयर और टाइप 054A गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट शामिल थे, ब्रह्मोस मिसाइल के तीव्र वेग और नीची उड़ान क्षमता (सी-स्किमिंग) का मुकाबला नहीं कर सके। मैक 2.8 से मैक 3.0 की सुपरसोनिक गति (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) से हमला करने वाली ब्रह्मोस ने चीनी रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया देने का बिल्कुल अवसर नहीं दिया। इस सिमुलेशन के नतीजे सामने आने के बाद फिलीपीनी रक्षा विशेषज्ञों ने माना कि भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली उनकी तटीय सुरक्षा और समुद्री संप्रभुता के लिए गेम-चेंजर साबित हुई है।
तटीय सुरक्षा का नया ढांचा और ड्रोन-मिसाइल की घातक रणनीति
फिलीपींस अपनी तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के साथ मिलकर रणनीतिक अभियान चला रहा है। उत्तरी लुजोन और दक्षिण चीन सागर के विवादित इलाकों में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दौरान जमीनी मिसाइल बैटरियों को हर्मेस मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) और आधुनिक सर्विलांस ड्रोन से जोड़ा गया। इस नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में ड्रोन ने दूर समुद्र में छिपे दुश्मन जहाजों का सटीक स्थान ट्रैक किया और डेटा सीधे तट पर तैनात ब्रह्मोस लॉन्चर को ट्रांसफर कर दिया। वर्ष 2022 में भारत के साथ हुए 375 मिलियन डॉलर (लगभग 3,000 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक समझौते के तहत फिलीपींस को ब्रह्मोस की तीन मिसाइल बैटरियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें से पहली तटीय बैटरी पूरी तरह से ऑपरेशनल होकर सेवा में तैनात हो चुकी है।
इंडो-पैसिफिक में बदला शक्ति संतुलन और चीन की बढ़ती बेचैनी
दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों और सेकंड थॉमस शोल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर चीन के एकतरफा दावों का मुकाबला करने के लिए फिलीपींस तेजी से अपनी सामरिक क्षमताएं मजबूत कर रहा है। भारत द्वारा निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की तैनाती से ड्रैगन की आक्रामक विस्तारवादी नीति पर प्रभावी अंकुश लगा है। सिम्युलेटेड युद्ध अभ्यासों में चीनी बेड़े के एयर डिफेंस सिस्टम के ध्वस्त होने की खबर ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) में हड़कंप मचा दिया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस सफल परीक्षण के बाद वियतनाम, इंडोनेशिया और अन्य आसियान देश भी भारतीय हथियार प्रणालियों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में मेक इन इंडिया की धाक और अधिक मजबूत होगी।
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