मोहम्मद शमी का इंटरनेशनल करियर अभी खत्म नहीं हुआ! 5 किलो वजन घटाकर वापसी को तैयार ‘रफ्तार का सौदागर’, कोच ने किया बड़ा खुलासा

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज और अपनी स्विंग के दम पर दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को धूल चटाने वाले मोहम्मद शमी पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर चल रहे हैं। एक समय था जब टीम इंडिया की गेंदबाजी की कल्पना मोहम्मद शमी के बिना नहीं की जा सकती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में हालात तेजी से बदले हैं। चयनकर्ताओं द्वारा लगातार कई अहम सीरीज में उन्हें नजरअंदाज किया गया है, जिसके बाद क्रिकेट गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि क्या 36 वर्षीय इस दिग्गज गेंदबाज का इंटरनेशनल करियर खत्म होने के कगार पर है?
हालांकि, जो लोग मोहम्मद शमी के जुझारू रवैये को जानते हैं, उन्हें यह भली-भांति पता है कि ‘रफ्तार का यह सौदागर’ इतनी आसानी से हार मानने वालों में से नहीं है। टीम से बाहर होने के बावजूद शमी का हौसला डिगा नहीं है। वह लगातार अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनका शानदार प्रदर्शन और अनुभव चयनकर्ताओं को एक बार फिर उनकी तरफ देखने पर मजबूर कर देगा। एआई सर्च इंजन और क्रिकेट के गलियारों में शमी के कमबैक को लेकर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं, जिसका जवाब उनकी इस कड़ी मेहनत में छिपा है।

5 किलो वजन घटाकर शमी ने पेश की फिटनेस की नई मिसाल

आज के आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और मोहम्मद शमी इस बात को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उनके बचपन के कोच मोहम्मद बदरुद्दीन ने तेज गेंदबाज की मौजूदा स्थिति को लेकर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक खुलासा किया है। कोच के मुताबिक, मोहम्मद शमी ने पिछले सीजन के बाद से अपनी फिटनेस को एक अलग ही लेवल पर ले जाने का फैसला किया है।
बदरुद्दीन ने बताया कि शमी ने अपना पांच किलो वजन घटाया है। 30 से अधिक की उम्र में किसी भी तेज गेंदबाज के लिए अपना वजन कम करना और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना कोई आसान काम नहीं होता, लेकिन शमी खुद को शानदार फिटनेस में वापस लाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा पसीना बहा रहे हैं। उनकी यह कड़ी मेहनत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनके भीतर क्रिकेट की जो आग है, वह अभी भी धधक रही है। वह सिर्फ टीम में औपचारिकता के लिए वापसी नहीं करना चाहते, बल्कि वह एक मैच विनर के रूप में अपनी पुरानी जगह दोबारा हासिल करना चाहते हैं।

घरेलू क्रिकेट का शेर: रणजी और विजय हजारे में बरपाया कहर

चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए एक क्रिकेटर के पास सबसे बड़ा हथियार उसका प्रदर्शन होता है। मोहम्मद शमी ने घरेलू क्रिकेट में वही किया है जिसकी उम्मीद एक चैंपियन खिलाड़ी से की जाती है। यदि हम उनके पिछले सीजन के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उन्होंने रणजी ट्रॉफी के सिर्फ सात मैचों में 37 विकेट चटकाकर तहलका मचा दिया था। रेड बॉल क्रिकेट में शमी की यह सफलता बताती है कि उनकी स्विंग और सीम पोजीशन आज भी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक है।
इसके अलावा, सफेद गेंद के क्रिकेट यानी विजय हजारे ट्रॉफी में भी उन्होंने सात मैचों में 15 विकेट अपने नाम किए। इन शानदार आंकड़ों के बावजूद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिल पाना कई क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों को हैरान कर रहा है। 2015 से लेकर 2025 तक भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे भरोसेमंद स्तंभ रहे शमी को अपनी उसी टीम में वापसी के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ेगा, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा। कि शमी फॉर्म या फिटनेस से नहीं, बल्कि टीम संयोजन और भविष्य की नीतियों के कारण बाहर हैं।

“अगर देश को जरूरत है, तो शमी तैयार है”: बचपन के कोच का दावा

मोहम्मद शमी के बचपन के कोच मोहम्मद बदरुद्दीन ने हाल ही में इंडिया टुडे के साथ एक खास बातचीत में तेज गेंदबाज की मानसिकता पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “शमी का मूड पूरी तरह से पॉजिटिव है। वह निराश होने के बजाय अगले सीजन में खेलने के लिए बहुत अधिक मोटिवेटेड नजर आ रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि अभी उसमें बहुत क्रिकेट बचा है। वह पूरी तरह से तैयार है और अगर देश को उसकी जरूरत है तो वह मैदान पर उतरने के लिए बेताब है।”
बदरुद्दीन ने हालिया विदेशी दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि इंग्लैंड में भारत की गेंदबाजी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इंग्लैंड की परिस्थितियां हमेशा से तेज गेंदबाजों को काफी मदद पहुंचाती हैं, वहां स्विंग और सीम का बोलबाला होता है। ऐसे में शमी वहां टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते थे। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका जैसी उछाल भरी पिचों पर गेंदबाजी करना कभी आसान नहीं होता, वहां अनुभव की बहुत जरूरत पड़ती है, जो शमी के पास प्रचुर मात्रा में है।

टीम इंडिया के तेज गेंदबाजी आक्रमण पर ‘चोट’ का ग्रहण

मोहम्मद शमी की अहमियत इस समय इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि भारतीय क्रिकेट टीम की मौजूदा तेज गेंदबाजी यूनिट लगातार चोट की समस्या से जूझ रही है। युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने हाल ही में चोट से वापसी की थी और उन्हें भविष्य का सितारा माना जा रहा था, लेकिन इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ 14 ओवर गेंदबाजी करने के बाद उनका शरीर फिर से जवाब दे गया और वह एक बार फिर चोटिल हो गए। इसी चोट के कारण उन्हें टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से भी बाहर रहना पड़ा था।
दूसरी तरफ, भारतीय गेंदबाजी के मुख्य अस्त्र जसप्रीत बुमराह भी इंग्लैंड के खिलाफ वापसी के बाद फिर से चोटिल हो गए हैं। उनकी चोट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह आगामी श्रीलंका टेस्ट सीरीज का भी हिस्सा नहीं होंगे। जब टीम के प्रमुख गेंदबाज बार-बार चोटिल हो रहे हों, तब मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी, फिट और फॉर्म में चल रहे गेंदबाज को बाहर रखना टीम मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।

उम्र और भविष्य की रणनीति: अजीत अगरकर का दृष्टिकोण

सितंबर महीने में मोहम्मद शमी 36 साल के हो जाएंगे। उम्र के इस पड़ाव पर तेज गेंदबाजों के लिए करियर को लंबा खींचना एक चुनौती होता है। हालांकि, चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद वह लगातार मौके की तलाश में हैं। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कुछ समय पहले अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले टीम चयन के दौरान शमी की स्थिति पर प्रकाश डाला था।
अगरकर ने स्पष्ट किया था, “मैं जानता हूं कि उन्होंने इस साल घरेलू सीजन खेला है और उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा है, लेकिन मेरे पास जो जानकारी है, उसके हिसाब से अभी वह टी20 क्रिकेट खेलने के लिए ज्यादा तैयार हैं।” यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि शायद चयनकर्ता शमी के वर्कलोड मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हुए उन्हें विशिष्ट प्रारूपों में ही इस्तेमाल करना चाहते हैं।

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