Mirzapur The Movie: बड़े पर्दे पर नहीं दिखेंगे कालीन भैया और गुड्डू पंडित के ये खूनी सीन्स, सेंसर बोर्ड ने चलाई तीखी कैंची

भारतीय मनोरंजन जगत में ‘मिर्जापुर’ एक ऐसा नाम बन चुका है जिसने अपने बेबाक अंदाज, तीखे देसी संवादों, रूह कंपा देने वाले खूनी एक्शन और गाली-गलौज से भरपूर यथार्थवादी प्रस्तुति के दम पर डिजिटल दुनिया में इतिहास रचा था। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल कंटेंट के लिए जहां रचनात्मक स्वतंत्रता का दायरा काफी बड़ा रहता है, वहीं जब कोई प्रोजेक्ट सिनेमाघरों के 70 एमएम स्क्रीन पर उतरता है, तो उसे भारत सरकार के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के बेहद सख्त नियमों और दिशानिर्देशों से गुजरना पड़ता है। बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मिर्जापुर – द मूवी’ जब सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी के पास सर्टिफिकेशन के लिए पहुंची, तो बोर्ड के सदस्यों ने फिल्म में मौजूद कई अत्यधिक हिंसक और आपत्तिजनक दृश्यों पर गहरी आपत्ति जताई। सिनेमाघरों में हर आयु वर्ग और सामाजिक ताने-बाने के संतुलन को बनाए रखने के लिए सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कई मुख्य दृश्यों, गालियों और प्रतीकात्मक दृश्यों पर अपनी कैंची चला दी है, जिसका सीधा मतलब है कि ओटीटी पर बिना किसी फिल्टर के भौकाल देखने वाले फैंस को थिएटर्स में थोड़ा बदला हुआ और संशोधित मिर्जापुर देखने को मिलेगा।

गालियों और भद्दे शब्दों पर चला सेंसर का डंडा: कई संवादों को किया गया म्यूट और रिप्लेस

मिर्जापुर फ्रेंचाइजी की पहचान उसके किरदारों की ठेठ पूर्वांचली बोली और बात-बात पर दी जाने वाली बेबाक गालियां रही हैं। गुड्डू पंडित, मुन्ना भैया और शरद शुक्ला जैसे किरदारों के मुंह से निकलने वाले अपशब्दों को वेब सीरीज में खुले तौर पर दिखाया गया था। किंतु सेंसर बोर्ड की स्क्रीनिंग कमेटी ने फिल्म के कई ऐसे संवादों पर सख्त आपत्ति जताई जो महिलाओं, सामाजिक संस्थाओं या व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

सेंसर बोर्ड के निर्देशों के तहत फिल्म के लगभग 14 से 18 स्थानों पर इस्तेमाल किए गए अत्यधिक भद्दे और आपत्तिजनक अपशब्दों को पूरी तरह ‘म्यूट’ (आवाज बंद) करने या उन्हें सभ्य शब्दों से बदलने का आदेश दिया गया है। विशेष रूप से महिलाओं के संदर्भ में बोले गए अपमानजनक शब्दों और कुछ चुनिंदा गालियों को सबटाइटल्स से भी हटाने को कहा गया है। मेकर्स को कुछ बेहद लोकप्रिय लेकिन असंस्कृत मुहावरों की जगह वैकल्पिक ऑडियो ट्रैक डब करना पड़ा है ताकि फिल्म की मूल भावना भी न मरे और सिनेमाटोग्राफ एक्ट के नियमों का उल्लंघन भी न हो।

रूह कंपा देने वाले अत्यधिक हिंसक और खूनी सीन्स में भारी कांट-छांट

मिर्जापुर अपनी अनफिल्टर्ड हिंसा और क्लोज-अप मर्डर सीन्स के लिए जाना जाता है। कट्टे से सिर उड़ाने, चाकुओं से गोदने और अंगों को क्षत-विक्षत करने के दृश्य सीरीज का मुख्य आकर्षण रहे हैं। बड़े पर्दे पर यह दृश्य अत्यधिक विचलित करने वाले (Gory & Graphic) न लगें, इसके लिए सेंसर बोर्ड ने हिंसा से जुड़े दृश्यों के टाइम ड्यूरेशन में भारी कटौती की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक महत्वपूर्ण एक्शन सीक्वेंस में जहां मुख्य किरदार अपने विरोधी पर लगातार धारदार हथियार से कई मिनटों तक क्रूरतापूर्वक हमला करता है, उस दृश्य की लंबाई को लगभग 40 प्रतिशत तक छोटा कर दिया गया है। इसके अलावा खून के फव्वारे छूटने, कटे हुए अंगों के अत्यधिक क्लोज-अप शॉट्स और तड़पते हुए इंसानों के चेहरों के विजुअल्स को या तो ब्लर (धुंधला) करने या कैमरा एंगल को वाइड करने का निर्देश दिया गया है। सेंसर बोर्ड का तर्क था कि सिनेमाघरों के विशाल स्क्रीन और सराउंड साउंड सिस्टम पर अत्यधिक नग्न हिंसा दर्शकों में मानसिक आघात या असहजता पैदा कर सकती है।

बोल्ड, इंटीमेट और आपत्तिजनक विजुअल्स पर चला बदलाव का हथौड़ा

वेब सीरीज के प्रारूप में मिर्जापुर के अंदर कई बोल्ड, कामुक और इंटीमेट सीन्स दिखाए गए थे, जो सत्ता, वासना और बदले की राजनीति को उजागर करते थे। फिल्म में भी कुछ ऐसे दृश्य शामिल किए गए थे जो किरदारों के बीच के आंतरिक संबंधों और उनकी शारीरिक नजदीकियों को दर्शाते थे।

सेंसर बोर्ड ने फिल्म के दो प्रमुख इंटीमेट दृश्यों में शामिल अत्यधिक बोल्ड और लंबे शॉट्स पर आपत्ति जताई। निर्माताओं को इन सीन्स के कुछ सेकेंड्स के फुटेज को हटाने और कुछ जगहों पर लाइटिंग व शैडो को डार्क करने के लिए कहा गया ताकि दृश्य अश्लीलता की सीमा को पार न करें। इसके साथ ही, बैकग्राउंड में शराब, सिगरेट और मादक पदार्थों के खुले सेवन वाले दृश्यों में स्क्रीन के निचले हिस्से पर ‘एंटी-तंबाकू’ और ‘शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’ का वैधानिक डिस्क्लेमर अनिवार्य रूप से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

संवेदनशील राजनीतिक संदर्भों और प्रशासनिक प्रतीकों में किए गए संशोधन

मिर्जापुर की कहानी केवल बाहुबलियों की नहीं, बल्कि राजनीतिज्ञों, पुलिस प्रशासन और अपराधियों के नापाक गठजोड़ की दास्तान है। फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य और संवाद थे जो असल जिंदगी की राजनीतिक व्यवस्था, पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और कुछ स्थानीय प्रशासनिक पदों पर तीखा तंज कसते थे।

सेंसर बोर्ड की कमेटी ने किसी भी वास्तविक राजनीतिक दल, समुदाय या प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति दुर्भावना पैदा करने वाले संदर्भों को हटाने का निर्देश दिया। फिल्म में इस्तेमाल किए गए कुछ काल्पनिक चुनाव चिन्हों और पुलिस अफसरों के नेमप्लेट व पदनामों में मामूली बदलाव किए गए हैं ताकि किसी भी वास्तविक संवैधानिक संस्था की छवि को ठेस न पहुंचे। कोर्टरूम और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े कुछ संवादों को भी कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के बाद थोड़ा अधिक संतुलित बनाया गया है।

‘ए’ (A) सर्टिफिकेट के साथ मिला क्लीयरेंस: रनटाइम और रिलीज पर क्या पड़ा असर?

सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी कट्स, मॉडिफिकेशन्स और म्यूट निर्देशों को लागू करने के बाद मेकर्स ने फिल्म का फाइनल एडिटेड वर्जन दोबारा सबमिट किया। इसके पश्चात केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने ‘मिर्जापुर – द मूवी’ को ‘ए’ (Adults Only) सर्टिफिकेट देकर थियेट्रिकल रिलीज के लिए हरी झंडी दे दी है।

इन सभी कट्स और ट्रिमिंग के चलते फिल्म के कुल रनटाइम में लगभग 3 मिनट 45 सेकेंड की कमी आई है। हालांकि, फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह और लेखक पुनीत कृष्णा ने आश्वस्त किया है कि इन कट्स से फिल्म की मूल आत्मा, गति और रोमांच पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। फिल्म का ड्रामा, किरदारों का टकराव और बदले की आग बड़े पर्दे पर उतनी ही तीव्रता और गहराई के साथ दर्शकों को देखने को मिलेगी।

सिनेमाघरों में कालीन और मुन्ना भैया के भौकाल का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार

सेंसर बोर्ड की कैंची चलने के बावजूद फैंस के बीच फिल्म को लेकर उत्साह रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। पंकज त्रिपाठी का शांत लेकिन खौफनाक अंदाज, दिव्येंदु शर्मा का ऊर्जावान और पागलपन से भरा मुन्ना भैया का किरदार और अली फजल का प्रतिशोध से जलता हुआ गुड्डू पंडित जब बड़े पर्दे पर आमने-सामने टकराएंगे, तो सिनेमाघरों में सीटी और तालियों की गूंज तय मानी जा रही है।

ओटीटी और थियेटर के दर्शकों का मिजाज अलग होता है, और फिल्म के निर्माताओं ने सेंसर के नियमों का पालन करते हुए भी कहानी के कोर इमोशन और लार्जर दैन लाइफ फील को बखूबी बरकरार रखा है। अब देखना यह होगा कि जब बिना कट्स वाली अनसेंसर्ड दुनिया से निकलकर मिर्जापुर के बाहुबली सिनेमाघरों के कड़े नियमों वाले अखाड़े में उतरेंगे, तो वे बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कितने नए कीर्तिमान स्थापित करते हैं।

Check Also

बिग बॉस 20 के लिए सलमान खान को मिलेंगे रिकॉर्ड तोड़ 120 करोड़ रुपये? 2.5 करोड़ से शुरू होकर 350 करोड़ तक कैसे पहुंचा भाईजान की फीस का ऐतिहासिक सफर

भारतीय टेलीविजन और डिजिटल एंटरटेनमेंट के इतिहास में यदि किसी एक रियलिटी शो ने दर्शकों …