
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक संबंधों को नई गति देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर आ रहे हैं। वर्ष 2026 में रूबियो का यह दूसरा आधिकारिक भारत दौरा होगा। इस यात्रा की सबसे खास और उल्लेखनीय बात यह है कि अमेरिकी विदेश मंत्री देश की राजधानी नई दिल्ली जाने के बजाय सीधे देश की वित्तीय राजधानीमुम्बईClick to open side panel for more information और गुजरात के प्रमुख वैश्विक ऊर्जा केंद्रजामनगरClick to open side panel for more information का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और मार्को रूबियो के बीच एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक होगी।लखनऊClick to open side panel for more information और नई दिल्ली के कूटनीतिक गलियारों से लेकर वॉल स्ट्रीट और दलाल स्ट्रीट तक रूबियो की इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें ऊर्जा सुरक्षा, प्रस्तावित ट्रेड डील और द्विपक्षीय निवेश जैसे बड़े मुद्दे केंद्र में रहने वाले हैं।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, मुंबई में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और मार्को रूबियो के बीच होने वाली वार्ता में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक हितों से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) के लैंडिंग प्वाइंट्स और कानूनी मसौदे पर भी बात आगे बढ़ सकती है। इसके अलावा, हाल के दिनों में भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों के एच-1बी (H-1B) वीजा व लेबर सर्टिफिकेशन से जुड़े मुद्दों पर भी भारतीय पक्ष द्वारा अपनी चिंताएं रखे जाने की संभावना है। मुंबई में अमेरिकी मिशन द्वारा अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन भी इस यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा रहेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री का गुजरात के जामनगर जाना इस पूरे दौरे का सबसे रणनीतिक और चौंकाने वाला आकर्षण माना जा रहा है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का विश्व का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स स्थित है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है। अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक बयान में भी स्पष्ट किया गया है कि रूबियो की इस यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाना है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति, रिफाइनिंग क्षमता और रिलायंस द्वारा अमेरिका के टेक्सास में प्रस्तावित बड़े ऊर्जा निवेश के संदर्भ में जामनगर का यह दौरा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक नया समीकरण तय कर सकता है।
मार्को रूबियो का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कूटनीति में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के प्रवाह को लेकर वैश्विक स्तर पर खींचतान जारी है। अमेरिका लगातार भारत को अपनी ऊर्जा खरीद विविधीकृत करने और अमेरिकी ऊर्जा निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। वहीं, भारत हमेशा से अपने राष्ट्रीय हितों और 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहा है। विदेश मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लाने वाले किसी भी रचनात्मक कदम का समर्थन करता है। ऐसे में मुंबई और जामनगर में होने वाली यह उच्चस्तरीय बातचीत दोनों देशों के बीच मतभेदों को कम कर दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने में मददगार साबित होगी।
भारत और अमेरिका केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि क्वाड (Quad) के तहत हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता के भी मजबूत पैरोकार हैं। वर्ष 2030 तक दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। रूबियो का नई दिल्ली की औपचारिक यात्रा के बजाय मुंबई जैसे आर्थिक केंद्र और जामनगर जैसे औद्योगिक हब को चुनना यह साफ दर्शाता है कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित न रखकर ठोस आर्थिक, औद्योगिक और ऊर्जा निवेश के धरातल पर आगे बढ़ाना चाहता है।
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