कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने न केवल राज्य की सत्ता बदली है, बल्कि एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट की स्थिति भी पैदा कर दी है। भाजपा की प्रचंड जीत के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। इतिहास में यह पहला मौका है जब कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी जबरन मुख्यमंत्री बनी रह सकती हैं? संविधान में ऐसे ‘अड़ियल’ रुख से निपटने के लिए राज्यपाल के पास क्या विकल्प हैं?
अनुच्छेद 164: राज्यपाल का ‘बर्खास्तगी’ का अधिकार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और मुख्यमंत्री ‘राज्यपाल के प्रसादपर्यंत’ (During the Pleasure of the Governor) पद पर बने रहते हैं।
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बहुमत खोने पर कार्रवाई: हालांकि ‘प्रसादपर्यंत’ का अर्थ मनमानी नहीं है, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद यदि किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत है (जैसे भाजपा के पास 207 सीटें हैं), तो निवर्तमान मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना असंवैधानिक है।
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सीधे बर्खास्तगी: यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त (Dismiss) कर सकते हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री की सहमति की आवश्यकता नहीं होती।
7 मई: जब स्वतः समाप्त हो जाएगी पुरानी सरकार
मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।
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स्वचालित विघटन: जैसे ही कार्यकाल समाप्त होगा, पुरानी विधानसभा स्वतः भंग हो जाएगी।
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सरकार का अंत: विधानसभा भंग होने के साथ ही ममता बनर्जी की सरकार का कानूनी अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसके बाद वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री (Caretaker CM) भी तभी रह सकती हैं जब राज्यपाल उन्हें ऐसा करने के लिए कहें।
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नया शपथ ग्रहण: राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बिना भी नई विधानसभा का गठन कर सकते हैं और बहुमत वाले दल के नेता (भाजपा नेता) को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं।
अनुच्छेद 356: राष्ट्रपति शासन की संभावना
यदि ममता बनर्जी के समर्थक या राज्य प्रशासन नई सरकार के गठन में बाधा उत्पन्न करते हैं या राज्य में कानून-व्यवस्था का गंभीर संकट खड़ा होता है, तो राज्यपाल के पास एक और ‘ब्रह्मास्त्र’ है:
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संवैधानिक विफलता: राज्यपाल केंद्र को रिपोर्ट भेज सकते हैं कि राज्य में संविधान के अनुरूप शासन चलाना संभव नहीं है।
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राष्ट्रपति शासन: ऐसी स्थिति में राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, जिससे पूरी कमान केंद्र और राज्यपाल के हाथों में आ जाएगी।
क्या कहती है परंपरा और नैतिकता?
संसदीय लोकतंत्र में यह एक स्थापित परंपरा है कि चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री तुरंत राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंपते हैं। ममता बनर्जी का यह कहना कि वह ‘इस्तीफा नहीं देंगी’, केवल एक राजनीतिक बयानबाजी हो सकती है। संवैधानिक रूप से, वह बहुमत के बिना एक मिनट भी पद पर नहीं रह सकतीं। राज्यपाल किसी भी समय भाजपा के विधायक दल के नेता को सरकार बनाने का न्यौता देकर इस विवाद को खत्म कर सकते हैं।
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