
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया है। टीएमसी सुप्रीमो ने दावा किया कि शुरुआत में देश में ‘एसआईआर’ (SIR) के मुद्दे पर किसी का कोई ध्यान नहीं था, लेकिन जब उनकी पार्टी ने पश्चिम बंगाल से इसके खिलाफ आवाज उठाई और लड़ाई शुरू की, तब जाकर इस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी।
ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं के अधिकारों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने और उन्हें वैनिश (गायब) करने के आदेश दिए जा रहे हैं, जिसके चलते वे व्यक्तिगत रूप से सीईसी को तीखी आलोचना का पात्र मानती हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने का कुचक्र चलाया है, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी।
विपक्ष की रणनीतियों और चुनावी प्रक्रिया पर बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जब बिहार में एसआईआर से जुड़ी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तब जाकर कांग्रेस और आरजेडी जैसे दलों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में हर एक डिटेल को बेहद बारीकी से समझने की आवश्यकता होती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सुरक्षाकर्मियों को घर-घर भेजा गया और मतदाताओं को धमकाया गया ताकि वे टीएमसी के पक्ष में मतदान न करें। उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में टीएमसी ने जीत दर्ज की है, सुनियोजित तरीके से उन्हीं इलाकों के मतदाताओं के नाम सबसे ज्यादा संख्या में वोटर लिस्ट से काटे गए। उन्होंने 2023 में चुनाव आयुक्तों को दिए गए इम्युनिटी (सुरक्षा) प्रावधानों पर भी कड़े सवाल उठाए।
हाल ही में हुई ‘इंडी गठबंधन’ (INDIA Alliance) की बैठक के बौरान के अनुभवों को साझा करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ का खेल खेला गया है और पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणामों के बाद ईवीएम (EVM) मशीनों को जलाकर तमाम पुख्ता सबूतों को नष्ट करने का घिनौना प्रयास किया गया।
ममता बनर्जी ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल इस्तीफा नहीं देते हैं, तो तमाम विपक्षी दल मिलकर देश स्तर पर एक बहुत बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल की जनता और विपक्षी दल नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करते रहेंगे।
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