
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था, सेवा और मातृभक्ति की एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी का दिल छू लिया। मध्य प्रदेश के उमरिया से एक बेटे ने अपनी 100 साल की मां को कंधे पर बैठाकर प्रयागराज पहुंचकर संगम में स्नान कराया। वृद्ध मां की इच्छा पूरी करने के लिए बेटे ने लंबा सफर तय किया और भीड़ के बीच उन्हें खुद सहारा देते हुए पवित्र संगम तक ले गया।
उमरिया से प्रयागराज तक आस्था की यात्रा
मध्य प्रदेश के उमरिया से निकले इस परिवार ने महाशिवरात्रि पर स्नान का संकल्प लिया था। मां की उम्र 100 वर्ष होने के कारण चलना-फिरना लगभग असंभव है, लेकिन उनकी इच्छा थी कि वह जीवन में एक बार फिर संगम में डुबकी लगाएं। बेटे ने मां की भावनाओं को समझा और बिना किसी हिचकिचाहट उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर यात्रा पूरी की।
संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब
महाशिवरात्रि के मौके पर प्रयागराज में भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे। आस्था के इस सैलाब के बीच जब लोगों ने बेटे को अपनी वृद्ध मां को कंधे पर उठाए देखा तो हर कोई भावुक हो उठा। पवित्र त्रिवेणी संगम पर पहुंचकर बेटे ने पहले मां को सुरक्षित उतारा और फिर विधि-विधान से स्नान कराया।
मातृभक्ति की मिसाल बना यह दृश्य
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मां पूरे समय भगवान का स्मरण करती रहीं और बेटे के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देती रहीं। भीड़ में मौजूद कई लोगों ने इस भावुक पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया। सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से चर्चा में है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां रिश्तों में दूरियां बढ़ती दिखती हैं, वहां यह बेटा सच्ची सेवा और संस्कारों का उदाहरण बन गया।
महाशिवरात्रि पर उमड़ी आस्था
महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारों के साथ स्नान किया और शिवालयों में जलाभिषेक किया। इसी भीड़ में यह भावुक दृश्य लोगों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बन गया।
यह घटना न सिर्फ मां-बेटे के अटूट रिश्ते की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आस्था और सेवा के आगे उम्र और दूरी मायने नहीं रखती
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