KGMU लखनऊ में अवैध मजारों पर एक्शन: दोबारा थमाया गया नोटिस, 15 दिन में जवाब न मिलने पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर!

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने अपने कैंपस के भीतर बनी अवैध मजारों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बीते 22 जनवरी को जारी किए गए नोटिस के बाद भी जब अवैध निर्माणों की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम चेतावनी के तौर पर दोबारा नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि तय सीमा के भीतर ठोस प्रमाण नहीं दिए गए, तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

5 मजारों ने साधी चुप्पी, एक का जवाब ‘अधूरा’

केजीएमयू प्रशासन द्वारा चिन्हित की गई कुल 6 अवैध मजारों में से 5 की ओर से अभी तक पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया है। वहीं, एक मजार प्रबंधन की तरफ से जो स्पष्टीकरण आया है, उसे प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि वह जवाब किसी संस्था या प्रबंधन का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर दिया गया प्रतीत होता है, जिसके पास मजार की वैधता को साबित करने के लिए कोई पक्के दस्तावेज नहीं हैं।


शाहमीना और हरमैन साहब दरगाह पर कोई विवाद नहीं

अक्सर ऐसी कार्रवाइयों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है। केजीएमयू प्रशासन ने आधिकारिक बयान में कहा कि परिसर में स्थित मशहूर शाहमीना मजार और हरमैन साहब दरगाह को किसी भी प्रकार का नोटिस जारी नहीं किया गया है। इन दोनों ऐतिहासिक स्थलों से प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है। कार्रवाई केवल उन्हीं 6 स्थलों पर केंद्रित है, जिन्हें अवैध रूप से कैंपस की जमीन पर चिन्हित किया गया है।


28 फरवरी तक का आखिरी मौका, वरना होगी कार्रवाई

प्रशासन ने अब इन अवैध मजारों को 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख है कि मजार प्रबंधन से जुड़े लोग अपनी बात रखने के लिए 28 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से प्रशासन के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं।

“अगर 15 दिनों के भीतर कोई ठोस जवाब नहीं मिलता या व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान साक्ष्य पेश नहीं किए जाते, तो विश्वविद्यालय प्रशासन अतिक्रमण हटाने की वैधानिक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगा।” – KGMU प्रशासन

कैंपस सुरक्षा और सौंदर्यीकरण पर जोर

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि यह कदम कैंपस की सुरक्षा, अनुशासन और सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। मेडिकल यूनिवर्सिटी की जमीन पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सबकी निगाहें 28 फरवरी की समय सीमा पर टिकी हैं कि क्या मजार प्रबंधन कोई वैध दस्तावेज पेश कर पाता है या केजीएमयू परिसर में बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई देखने को मिलेगी।

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