J&K सरकारी स्कूलों की किताबों पर बड़ा विवाद: हाफिज सईद और मकबूल भट को बताया गया ‘महान’, FIR दर्ज, सरकार ने वापस मंगाईं सभी प्रतियां

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई दो पुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इन किताबों में मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और अलगाववादी नेता मकबूल भट समेत कई विवादित व्यक्तियों को प्रभावशाली और महान व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मामला सामने आने के बाद इन दोनों पुस्तकों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, शिक्षा विभाग ने सभी प्रतियां तत्काल प्रभाव से वापस मंगाने का आदेश जारी कर दिया है।

किन किताबों पर उठा विवाद?

विवाद जिन दो पुस्तकों को लेकर सामने आया है, उनमें पहली ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ J&K’ है, जिसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीना हैं तथा इसे जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस ने प्रकाशित किया है। दूसरी पुस्तक ‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’ है, जिसे सुशांत गिरी ने लिखा है और दिल्ली स्थित अनुराग प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।

आरोप है कि इन पुस्तकों में कई अलगाववादी नेताओं और आतंकी गतिविधियों से जुड़े विवादित व्यक्तियों को सकारात्मक और प्रेरणादायक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (JKPF) ने सोशल मीडिया पर इन पुस्तकों के कुछ पन्नों का वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इनमें मकबूल भट को शहीद बताया गया है। साथ ही सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह और मीरवाइज उमर फारूक को प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में दर्शाया गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

भाजपा ने बताया ‘एकेडमिक जिहाद’

भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए इसे “एकेडमिक जिहाद” करार दिया है। पार्टी ने विवादित पुस्तकों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी इस प्रकरण में शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक पहुंची थीं किताबें

जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के 1832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए इन पुस्तकों की खरीद की गई थी। पुस्तकों के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समितियों ने सैकड़ों प्रकाशकों की पुस्तकों में से इनका चयन किया था।

अधिकारियों के मुताबिक, एक पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर के स्कूलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के सरकारी स्कूलों तक पहुंचाई गई थीं।

शिक्षा विभाग ने वापस मंगाईं सभी प्रतियां

विवाद बढ़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से दोनों पुस्तकों की सभी प्रतियां वापस लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग का कहना है कि पुस्तकों में मौजूद आपत्तिजनक सामग्री गंभीर चिंता का विषय है और इनके चयन की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई है।

सरकार ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट करने का फैसला भी लिया है। साथ ही उनकी अन्य प्रकाशित सामग्री को भी वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के लिए बनाई गई समिति

पूरे मामले की जांच के लिए दो अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है। समिति को 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद का केंद्र उन पुस्तकों में प्रकाशित सामग्री है, जिसमें कुछ ऐसे व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है जिन्हें भारत सरकार या भारतीय कानून के तहत अलगाववाद, आतंकवाद या विवादित गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें सकारात्मक या प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किए जाने के आरोप के बाद मामला कानूनी जांच के दायरे में आ गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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