
मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर से बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं, क्योंकि ईरान की संसद ने देश के नए रक्षा मंत्री के रूप में मेहरदाद अखलाघी किताबची (Mehrdad Akhlaghi Ketabchi) के नाम पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन द्वारा मनोनीत किए जाने के बाद संसद में हुए विश्वास मत में भारी समर्थन हासिल करने वाले अखलाघी की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर है। रक्षा मंत्रालय की कमान संभालते ही उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों को लेकर तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और अधिक आक्रामक होने वाली है।
कौन हैं मेहरदाद अखलाघी और क्या है उनका पुराना इतिहास?
मेहरदाद अखलाघी को ईरान के सैन्य और रक्षा औद्योगिक ढांचे का एक बेहद अनुभवी और कद्दावर चेहरा माना जाता है। उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान अमीरकबीर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (Amirkabir University of Technology) से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और इसके बाद मालिक अश्तर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री पूरी की। उनकी तकनीकी दक्षता और रणनीतिक समझ ने उन्हें ईरान के रक्षा तंत्र के शीर्ष तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। ईरानी सेना के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मिसाइल कार्यक्रम के संस्थापक चेहरों में गिने जाने वाले हसन तेहरानी मोगaddam के साथ उन्होंने काफी करीबी रूप से काम किया है। इसके अलावा, उन्होंने शाहिद बाघेरी इंडस्ट्रियल ग्रुप (SBIG) का नेतृत्व करते हुए सॉलिड-प्रोपेलेंट मिसाइल प्रणालियों और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
मिसाइल और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता
अखलाघी को ईरान के आधुनिक मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क का मुख्य वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने अपने अब तक के करियर में एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गेनाइजेशन (AIO) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में भी देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करने का काम किया है। उनकी कार्यशैली हमेशा से रिसर्च, डिजाइन और अत्याधुनिक हथियार निर्माण के इर्द-गिर्द घूमती रही है। रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी प्राथमिकताओं में सैन्य उपग्रहों का प्रक्षेपण, अंतरिक्ष आधारित खुफिया तकनीक का विस्तार और देश के सामरिक हथियारों के जखीरे को अधिक आधुनिक बनाना शामिल है। इसके अलावा, वह पारंपरिक सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ देश की प्राइवेट टेक कंपनियों और रिसर्च लैब को भी रक्षा निर्माण श्रृंखला से जोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं ताकि उत्पादन की रफ्तार को और तेज किया जा सके।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का सामना
मेहरदाद अखलाघी की वैश्विक स्तर पर पहचान एक ऐसे रक्षा विशेषज्ञ के रूप में है जो लंबे समय से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दायरे में रहे हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी (Treasury Department) ने साल 2008 में ही उनके खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद, उनके मिसाइल विकास और परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम प्रणालियों से जुड़े होने के कारण साल 2023 में यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) ने भी उन पर कड़े प्रतिबंध और यात्रा पाबंदियां लगा दी थीं। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की इन तमाम पाबंदियों के बावजूद ईरान की संसद द्वारा उन्हें रक्षा मंत्री बनाया जाना यह संकेत देता है कि तेहरान अपने रणनीतिक और रक्षा कार्यक्रमों से पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है, बल्कि वह अपनी आक्रामक नीति पर अडिग है।
कार्यभार संभालते ही अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
पद संभालते ही मेहरदाद अखलाघी ने अपने तेवर स्पष्ट कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अमेरिकी प्रशासन और क्षेत्रीय वार्निंग जारी करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देश ईरान पर कोई नया सैन्य हमला करने की भूल करते हैं, तो उन्हें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता का हवाला देते हुए अमेरिकी सैन्य कर्मियों और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विश्लेषकों का मानना है कि फरवरी में पिछले रक्षा मंत्री के संघर्ष के दौरान मारे जाने के बाद खाली हुए इस पद पर एक तकनीकी रूप से दक्ष और आक्रामक नेता का आना मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन को और अधिक जटिल बना सकता है।
ईरान की घरेलू राजनीति और सेना में समन्वय
ईरान के भीतर सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच तालमेल बिठाने में अखलाघी की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। उन्हें देश के सर्वोच्च नेतृत्व का भी करीबी और भरोसेमंद माना जाता है, जिन्हें कई मौकों पर सीधे तौर पर सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की सरकार के लिए यह नियुक्ति कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा संदेश है। एक तरफ जहां देश आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा मंत्रालय की कमान एक कट्टर तकनीकी विशेषज्ञ के हाथ में सौंपकर ईरान ने यह जता दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य आत्मनिर्भरता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
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