भारत दौरे के बीच मार्को रूबियो के बयान पर भड़का ईरान, कहा- अमेरिकी प्रतिबंधों ने ऊर्जा बाजार को बनाया संकटग्रस्त

भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के एक बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है। रूबियो द्वारा वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर की गई टिप्पणी पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली स्थित Embassy of Iran in New Delhi ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि दुनिया में ऊर्जा संकट की असली वजह अमेरिका की प्रतिबंध नीति है।

मार्को रूबियो के बयान से बढ़ा कूटनीतिक तनाव

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत यात्रा के दौरान कथित तौर पर कहा था कि कुछ देश ऊर्जा बाजार को “बंधक” बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस बयान को सीधे तौर पर ईरान से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद तेहरान की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

ईरानी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका लंबे समय से एकतरफा प्रतिबंधों के जरिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी नीतियों ने तेल और गैस बाजार में अस्थिरता पैदा की है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।

ईरान बोला- अमेरिका खुद है ऊर्जा संकट की वजह

ईरानी दूतावास ने बयान में कहा कि वॉशिंगटन द्वारा लगाए गए आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंध वैश्विक बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका राजनीतिक हितों के लिए ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है और दूसरे देशों पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।

दूतावास ने यह भी कहा कि ईरान हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष ऊर्जा व्यापार का समर्थक रहा है। साथ ही यह दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से कई विकासशील देशों को ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

भारत दौरे के बीच बयान ने खींचा ध्यान

मार्को रूबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा चल रही है। ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे दोनों देशों की वार्ता में अहम माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह बयानबाजी युद्ध आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ सकती है चिंता

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और गहराता है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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