सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अरुणाचल ठेकों की जांच शुरू, कांग्रेस का हमला— ‘ना खाऊंगा ना खाने दूंगा’ निकला जुमला

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के अहम आदेश के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। शीर्ष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को मामले में प्रारंभिक जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है और भ्रष्टाचार के खिलाफ दिए गए नारों पर सवाल खड़े किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, CBI को जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों के आवंटन और उनके क्रियान्वयन की जांच के लिए CBI को प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी हुए सभी सार्वजनिक कार्यों और ठेकों की जांच की जाएगी।कोर्ट ने एजेंसी को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर जांच प्रक्रिया शुरू करे और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करे।


CM परिवार से जुड़ी कंपनियों पर ठेकों का आरोप

मामला उस समय गंभीर हो गया जब सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि पिछले करीब दस वर्षों में लगभग 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके कथित तौर पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को दिए गए।याचिकाकर्ता संगठनों— सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना— की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राज्य सरकार के हलफनामे का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई ठेके सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के परिजनों के स्वामित्व वाली कंपनियों को आवंटित किए गए।

कांग्रेस का तीखा हमला, ‘यह तो बस शुरुआत’

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” का नारा पूरी तरह से छलावा साबित हो रहा है और अब सच्चाई सामने आने लगी है।उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में कई अन्य बीजेपी शासित राज्यों के मामलों में भी ऐसे ही खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पूर्वोत्तर के कुछ और मुख्यमंत्री भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

क्यों अहम है यह मामला?

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर सत्ता में बैठे मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों पर ठेके दिलाने के आरोप लगे हैं। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस पूरे प्रकरण की निगरानी और जांच की दिशा पर देशभर की नजरें टिकी हैं।

राजनीतिक तापमान बढ़ने के आसार

जांच के आदेश के बाद आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस जहां इसे बड़े भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर उठाने की तैयारी में है, वहीं बीजेपी की ओर से भी जवाबी रणनीति बनाई जा सकती है।

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