
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक लाल सागर (Red Sea) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है। यमन के पश्चिमी तट के पास लाल सागर में भारत के झंडे वाले एक कमर्शियल मर्चेंट और मशीनीकृत सेलिंग वेसल पर अचानक एक खतरनाक प्रोजेक्टाइल या मिसाइल से हमला कर दिया गया। यह हमला इतना भीषण था कि जहाज इस झटके को सहन नहीं कर सका और कुछ ही समय में पलटकर समुद्र की अथाह गहराइयों में डूब गया। इस पोत पर कुल 14 नाविक सवार थे, जिनमें 13 भारतीय नागरिक और एक अन्य विदेशी शामिल था। जैसे ही इस घटना की खबर नई दिल्ली तक पहुंची, देश के रक्षा और कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि, सबसे बड़ी राहत की खबर यह रही कि समय रहते चलाए गए एक साहसी और त्वरित बचाव अभियान के तहत सभी 13 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
कैसे हुआ लाल सागर में यह खतरनाक हमला और डूबा जहाज?
यह पूरी सनसनीखेज घटना यमन के हूती-नियंत्रित बंदरगाह शहर होदेइदाह से लगभग 13 नॉटिकल मील दक्षिण की ओर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में घटी। जिस जहाज पर यह हमला हुआ उसका नाम ‘एमएसवी फैज नूर ओलिया’ (MSV Faize Noore Oliya) था। यह एक मशीनीकृत नौकायन और कार्गो पोत था, जो लाल सागर के रास्ते से गुजर रहा था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, अज्ञात स्रोतों से दागे गए एक प्रोजेक्टाइल ने सीधे इस नाकाबंदी रहित और रक्षाहीन पोत को अपना निशाना बनाया। जोरदार धमाके के बाद जहाज में गंभीर तकनीकी और संरचनात्मक नुकसान हुआ, जिससे पानी तेजी से अंदर भरने लगा। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि चालक दल के पास संभलने का भी मौका नहीं मिला और देखते ही देखते यह कार्गो शिप लाल सागर के ठंडे पानी में पूरी तरह से समा गया।
यमनी कोस्ट गार्ड का राहत अभियान और मोखा बंदरगाह पर सुरक्षित वापसी
जब जहाज पर संकट के बादल मंडराए और वह डूबने लगा, तो उस वक्त वहां तैनात स्थानीय समुद्री सुरक्षा बलों और बचाव टीमों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया था। यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स (NRF), वहां की नौसेना और यमनी कोस्ट गार्ड ने तत्परता दिखाते हुए एक संयुक्त बचाव अभियान (Joint Rescue Operation) को अंजाम दिया। जान की बाजी लगाकर चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान डूबते हुए जहाज के सभी 14 क्रू मेंबरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इन सभी सुरक्षित बचाए गए नाविकों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और इसके बाद उन्हें सुरक्षित रूप से यमन के ही मोखा बंदरगाह (Port of Mokha) पर पहुंचा दिया गया। इस साहसिक बचाव कार्य के चलते एक बड़ा मानवीय संकट टल गया और सभी भारतीय परिवारों ने राहत की सांस ली।
भारत सरकार और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरी घटना पर भारत सरकार की तरफ से बेहद सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाज़ रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घटना की पुष्टि करते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत बिना किसी उकसावे के इस रक्षाहीन मशीनीकृत सेलिंग पोत पर हुए कायराना हमले की पुरजोर निंदा करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में फंसे या काम कर रहे हमारे नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री ने तुरंत प्रभाव से समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) को निर्देश दिया है कि वह सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करें ताकि इस क्षेत्र में काम कर रहे अन्य भारतीय नाविकों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और रेस्क्यू किए गए लोगों को हरसंभव सहायता मुहैया कराई जा सके।
विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख: वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद हों
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी इस मामले पर एक आधिकारिक और कड़ा बयान जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि यमन के तट के पास लाल सागर में भारतीय झंडे वाले वाणिज्यिक पोत पर हुआ यह हमला अत्यंत चिंताजनक है। नई दिल्ली ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शांतिपूर्ण तरीके से आवाजाही कर रहे कमर्शियल शिपिंग और नागरिक जहाजों को निशाना बनाए जाने का यह सिलसिला तुरंत प्रभाव से रोका जाना चाहिए। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा है कि वैश्विक व्यापारिक और समुद्री मार्गों पर नेविगेशन की स्वतंत्रता और सुरक्षा को बहाल रखना बेहद आवश्यक है। रियाद में स्थित भारतीय दूतावास लगातार यमनी अधिकारियों के साथ संपर्क में है और क्रू मेंबर्स की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया पर बारीक नजर बनाए हुए है।
लाल सागर और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
लाल सागर और उससे जुड़ा बाब अल-मदब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक भू-राजनीति और सुरक्षा का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला यह समुद्री गलियारा ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई का एक मुख्य द्वार है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कारोबार करता है। यमन के एक बड़े हिस्से पर काबिज हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण इस इलाके में लगातार तनाव बना हुआ है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र से गुजरने वाले मर्चेंट जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन कंपनियों को मजबूरन अपने जहाजों के रूट बदलने पड़ रहे हैं या अफ्रीका के लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। इस नवीनतम घटना ने एक बार फिर इस जलीय मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार का ‘सेफेलर-फर्स्ट’ फ्रेमवर्क
इस प्रकार की लगातार बढ़ती समुद्री वारदातों और सुरक्षा जोखिमों को भांपते हुए भारत सरकार ने पहले ही कई कड़े कदम उठाए हैं। शिपिंग मंत्रालय और डीजीएमए (DGMA) ने मिलकर ‘सेफेलर-फर्स्ट’ (Seafarer-First) फ्रेमवर्क के तहत एक व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। इसके तहत भारतीय नाविकों को संघर्ष-प्रभावित और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से लाल सागर, फारस की खाड़ी और अदन की खाड़ी से गुजरने वाली नौकाओं पर तैनाती से बचने की सख्त सलाह दी गई है। पोत संचालकों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी समुद्री यात्रा से पहले जोखिम का पूरा आकलन करें, जहाज पर सुरक्षा ड्रिल करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित मैरीटाइम एजेंसियों को दें। इसके अलावा भारतीय नौसेना और दुनिया भर के सूचना संलयन केंद्रों (IFC-IOR) के साथ मिलकर भारतीय जहाजों की गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
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