नई दिल्ली। आज के दौर में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसने हर किसी को चिंता में डाल दिया है। कई बार अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ देता है। ऐसी स्थिति में CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक ऐसी ‘लाइफ सेविंग’ तकनीक है जो यमराज के मुंह से भी इंसान को खींच लाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हार्ट अटैक के तुरंत बाद सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो मरीज के बचने की संभावना 60% तक बढ़ जाती है।
क्या है CPR और यह कैसे काम करता है?
CPR का मतलब है कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन। जब किसी व्यक्ति का दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और सांसें रुक जाती हैं, तो शरीर के अंगों, विशेषकर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचना बंद हो जाता है। सीपीआर के जरिए हम छाती पर दबाव बनाकर कृत्रिम रूप से दिल को पंप करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में रक्त का संचार बना रहता है और मेडिकल सहायता मिलने तक मरीज को जीवित रखा जा सकता है।
कैसे पहचानें कि मरीज को CPR की जरूरत है?
अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर जाए, तो घबराने के बजाय इन स्टेप्स को फॉलो करें:
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प्रतिक्रिया जांचें: मरीज को कंधे से थपथपाएं और जोर से पूछें- “क्या आप ठीक हैं?”
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मदद मांगें: तुरंत एम्बुलेंस (108) को कॉल करें।
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सांस और पल्स चेक करें: देखें कि क्या छाती ऊपर-नीचे हो रही है? मरीज के नाक के पास अपना कान ले जाकर सांस महसूस करें। गर्दन की नसों (कैरोटिड पल्स) को छूकर देखें कि धड़कन चल रही है या नहीं। यदि 10 सेकंड के भीतर कोई हलचल न दिखे, तो बिना देर किए सीपीआर शुरू करें।
CPR देने का सही और स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
सीपीआर देने के लिए तकनीक का सही होना बहुत जरूरी है, वरना पसलियों को नुकसान पहुंच सकता है:
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सही पोजीशन: मरीज को किसी सख्त और समतल जगह पर लेटा दें। आप मरीज के बगल में घुटनों के बल बैठ जाएं।
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हाथों का लॉक: अपनी एक हथेली को मरीज की छाती के बीचों-बीच (स्टर्नम हड्डी के निचले हिस्से) रखें। दूसरी हथेली को पहली हथेली के ऊपर रखें और उंगलियों को आपस में फंसा (इन्टरलॉक) लें।
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कोहनियां सीधी रखें: आपके कंधे मरीज की छाती के ठीक ऊपर होने चाहिए और कोहनियां बिल्कुल सीधी। दबाव आपके हाथों से नहीं, बल्कि आपके शरीर के वजन से पड़ना चाहिए।
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कंप्रेशन की गति: एक मिनट में कम से कम 100 से 120 बार छाती को दबाएं। हर बार दबाते समय छाती लगभग 2 इंच नीचे जानी चाहिए। दबाने के बाद छाती को वापस ऊपर आने का पूरा मौका दें।
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कब तक जारी रखें: जब तक मरीज को होश न आ जाए, वह सांस न लेने लगे या मेडिकल टीम मौके पर न पहुंच जाए, तब तक लगातार कंप्रेशन देते रहें।
याद रखें: कार्डियक अरेस्ट में हर एक सेकंड कीमती है। आपकी थोड़ी सी हिम्मत और यह छोटी सी तकनीक किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है।
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